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कौन हैं पवन वर्मा, जिन्हें जेडीयू ने दिखाया बाहर का रास्ता
Wed, 29 Jan 2020 07:16 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: अनवर अंसारी
Updated Wed, 29 Jan 2020 07:16 PM IST
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पवन वर्मा (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लंबी खींचतान के बाद पार्टी उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर और पूर्व राज्यसभा सांसद पवन वर्मा को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। जेडीयू के मुताबिक ये दोनों नेता लगातार पार्टी के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे।
पार्टी ने कहा कि प्रशांत किशोर और पवन वर्मा लगातार पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सवाल खड़ा कर रहे थे। सीएम नीतीश कुमार ने उन्हें बार-बार कहा था कि वे अपनी बात को पार्टी के सही मंच पर रखें। मगर इन दोनों लोगों ने लगातार पार्टी के खिलाफ आवाज बुलंद की और इसलिए पार्टी ने इन्हें बाहर निकाल दिया।
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प्रशांत किशोर को लाने में निभाई अहम भूमिका
पवन वर्मा जेडीयू के कद्दावर नेता माने जाते रहे। प्रशांत किशोर को जेडीयू में लाने में उनकी अहम भूमिका रही। हालांकि, कुछ समय से वह भी हाशिए पर चल रहे थे। बिहार जाकर रहने से पहले वह दिल्ली में जेडीयू के नेता रहे हैं।
नीतीश के सलाहकार भी रहे
राजनीति में आने से पहले पवन वर्मा एक पूर्व भारतीय विदेश सेवा अधिकारी रहे हैं। साथ ही वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सलाहकार भी रहे। जेडीयू ने उन्हें साल 2014 में राज्यसभा भेजा। जहां वे जून 2014 से जुलाई 2016 तक राज्यसभा सांसद रहे। पवन वर्मा प्रमुख अंग्रेजी अखबारों के लिए स्तंभकार भी है।
भाजपा से गठबंधन पर उठाए थे सवाल
पवन वर्मा बिहार जाने से पहले दिल्ली में जेडीयू के नेता के तौर पर कार्य करते रहे। ऐसे में जब दिल्ली में जेडीयू और भाजपा का गठबंधन हुआ तो उन्होंने पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाते हुए नीतीश कुमार को एक पत्र लिखा।
यह पत्र बना प्रमुख वजह
अपने इस पत्र में पवन वर्मा ने नीतीश कुमार को 2012 में हुई मुलाकात की याद दिलाई। पत्र में उन्होंने लिखा, '2012 में जब पटना में मेरी आपसे भेंट हुई थी, उस वक्त औपचारिक तौर पर मैं पार्टी में शामिल भी नहीं हुआ था। आपने मुझसे भाजपा और आरएसएस की विभाजनकारी नीतियों और कैसे नरेंद्र मोदी देश के भविष्य के लिए उपयुक्त नहीं हैं, इस पर लंबी चर्चा की थी।' इसके साथ ही दिल्ली में भाजपा के साथ गठबंधन पवन वर्मा ने नीतीश कुमार से कहा कि वह गठबंधन को लेकर अपनी विचारधारा पूरी तरह से स्पष्ट करें।
पवन वर्मा ने अपनी चिट्ठी में नीतीश कुमार से यह भी स्पष्ट करने को कहा था कि एनआरसी और सीएए के मुद्दे पर उनकी क्या राय है। पवन वर्मा की इस चिट्ठी पर नीतीश कुमार ने कहा था कि इसे पत्र नहीं कहते हैं कि ईमेल पर कुछ भेज दीजिए और प्रेस में जारी कर दीजिए।
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पार्टी ने कहा कि प्रशांत किशोर और पवन वर्मा लगातार पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सवाल खड़ा कर रहे थे। सीएम नीतीश कुमार ने उन्हें बार-बार कहा था कि वे अपनी बात को पार्टी के सही मंच पर रखें। मगर इन दोनों लोगों ने लगातार पार्टी के खिलाफ आवाज बुलंद की और इसलिए पार्टी ने इन्हें बाहर निकाल दिया।
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आइए आपको बताते हैं कि आखिर कौन हैं पवन वर्मा जिन्हें सीएम नीतीश ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया है।
प्रशांत किशोर को लाने में निभाई अहम भूमिका
पवन वर्मा जेडीयू के कद्दावर नेता माने जाते रहे। प्रशांत किशोर को जेडीयू में लाने में उनकी अहम भूमिका रही। हालांकि, कुछ समय से वह भी हाशिए पर चल रहे थे। बिहार जाकर रहने से पहले वह दिल्ली में जेडीयू के नेता रहे हैं।
नीतीश के सलाहकार भी रहे
राजनीति में आने से पहले पवन वर्मा एक पूर्व भारतीय विदेश सेवा अधिकारी रहे हैं। साथ ही वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सलाहकार भी रहे। जेडीयू ने उन्हें साल 2014 में राज्यसभा भेजा। जहां वे जून 2014 से जुलाई 2016 तक राज्यसभा सांसद रहे। पवन वर्मा प्रमुख अंग्रेजी अखबारों के लिए स्तंभकार भी है।
भाजपा से गठबंधन पर उठाए थे सवाल
पवन वर्मा बिहार जाने से पहले दिल्ली में जेडीयू के नेता के तौर पर कार्य करते रहे। ऐसे में जब दिल्ली में जेडीयू और भाजपा का गठबंधन हुआ तो उन्होंने पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाते हुए नीतीश कुमार को एक पत्र लिखा।
यह पत्र बना प्रमुख वजह
अपने इस पत्र में पवन वर्मा ने नीतीश कुमार को 2012 में हुई मुलाकात की याद दिलाई। पत्र में उन्होंने लिखा, '2012 में जब पटना में मेरी आपसे भेंट हुई थी, उस वक्त औपचारिक तौर पर मैं पार्टी में शामिल भी नहीं हुआ था। आपने मुझसे भाजपा और आरएसएस की विभाजनकारी नीतियों और कैसे नरेंद्र मोदी देश के भविष्य के लिए उपयुक्त नहीं हैं, इस पर लंबी चर्चा की थी।' इसके साथ ही दिल्ली में भाजपा के साथ गठबंधन पवन वर्मा ने नीतीश कुमार से कहा कि वह गठबंधन को लेकर अपनी विचारधारा पूरी तरह से स्पष्ट करें।
पवन वर्मा ने अपनी चिट्ठी में नीतीश कुमार से यह भी स्पष्ट करने को कहा था कि एनआरसी और सीएए के मुद्दे पर उनकी क्या राय है। पवन वर्मा की इस चिट्ठी पर नीतीश कुमार ने कहा था कि इसे पत्र नहीं कहते हैं कि ईमेल पर कुछ भेज दीजिए और प्रेस में जारी कर दीजिए।