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धरती से दूर एक ऐसा खतरनाक ग्रह, जहां होती है हीरे की बारिश

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sat, 28 Dec 2019 02:36 PM IST
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dangerous planet far away from the earth Neptune where diamonds rain
वरुण ग्रह - फोटो : Social media

हमारे सौर मंडल में चार ग्रह ऐसे हैं, जिन्हें 'गैस दानव' कहा जाता है, क्योंकि वहां मिटटी-पत्थर के बजाय अधिकतर गैस हैं और इनका आकार बहुत ही विशाल है। वरुण (नेपच्यून) भी इन्हीं ग्रहों में से एक है। बाकी तीन बृहस्पति, शनि और अरुण (युरेनस) हैं। वरुण यूं तो धरती से सबसे ज्यादा दूर है और खतरनाक भी, क्योंकि वहां का तापमान शून्य से 200 डिग्री सेल्सियस नीचे रहता है। इतने में तो इंसान ऐसा जमेगा कि फिर वो किसी पत्थर की तरह टूट सकता है। 

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वरुण ग्रह - फोटो : Social media

वरुण हमारे सौरमंडल का पहला ऐसा ग्रह था, जिसके अस्तित्व की भविष्यवाणी उसे बिना कभी देखे ही गणित के अध्ययन से की गयी थी और फिर उसे उसी आधार पर खोजा गया। यह तब हुआ जब अरुण की परिक्रमा में कुछ अजीब गड़बड़ी पायी गई जिसका अर्थ केवल यही हो सकता था कि एक अज्ञात पड़ोसी ग्रह उसपर अपना गुरुत्वाकर्षक प्रभाव डाल रहा है। 

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वरुण ग्रह - फोटो : Social media

वरुण को पहली बार 23 सितंबर, 1846 को दूरबीन से देखा गया था और इसका नाम नेपच्यून रख दिया गया। नेपच्यून प्राचीन रोमन धर्म में समुद्र के देवता थे। ठीक यही स्थान भारत में वरुण देवता का रहा है, इसलिए इस ग्रह को हिंदी में वरुण कहा जाता है। रोमन धर्म में नेपच्यून देवता के हाथ में त्रिशूल होता था, इसलिए वरुण का खगोलशास्त्रिय चिन्ह ♆ ही है।

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वरुण ग्रह - फोटो : Social media

वरुण ग्रह पर जमी हुई मीथेन गैस के बादल उड़ते हैं और यहां हवाओं की रफ्तार सौरमंडल के दूसरे किसी भी ग्रह से काफी ज्यादा है। यहां मीथेन की सुपरसोनिक हवाओं को रोकने के लिए कुछ भी नहीं है, इसलिए उनकी रफ्तार 1,500 मील प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।   

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

वरुण के वायुमंडल में संघनित कार्बन होने के कारण वहां हीरे की बारिश भी होती है। अगर इंसान कभी इस ग्रह पर पहुंच भी जाए तो इन हीरों को बटोर नहीं पाएगा, क्योंकि अत्यधिक ठंड के कारण वो वहीं पर जम जाएगा।

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