Zara Hatke: इस देश में स्ट्रीटलाइट का रंग बदल कर दिया लाल? वजह जानकर दंग रह जाएंगे
Zara Hatke: डेनमार्क एक बार फिर अपने मानवीय मूल्यों को लेकर चर्चा में है। हाल ही में सामने आई एक खबर के अनुसार डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन के पास ग्लाडसैक्से नामक इलाके में पारंपरिक सफेद स्ट्रीटलाइट्स की जगह लाल रोशनी वाले लैंप लगाए जा रहे हैं। इसके पीछे की वजह किसी को भी चौंका सकती है।
विस्तार
डेनमार्क उत्तरी यूरोप में स्थित एक अत्यंत विकसित, खुशहाल और प्रगतिशील स्कैंडिनेवियाई देश है। यह देश अपने उच्च जीवन स्तर, मुफ्त शिक्षा-स्वास्थ्य, साइकिल संस्कृति और पर्यावरण के अनुकूल शहरी नियोजन के लिए प्रसिद्ध है।
बेहद अनोखा प्रयोग
डेनमार्क एक बार फिर अपने मानवीय मूल्यों के साथ एक बेहद अनोखे प्रयोग को लेकर भी चर्चा में है। हाल ही में सामने आई एक खबर के अनुसार, डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन के पास ग्लाडसैक्से नामक इलाके में पारंपरिक सफेद स्ट्रीटलाइट्स की जगह लाल रोशनी वाले लैंप लगाए जा रहे हैं। जिसके पीछे की वजह किसी को भी चौंका सकती है। बता दें कि यह रोशनी इंसानों के लिए नहीं, बल्कि चमगादड़ों के लिए बदली गई है।
चमगादड़ों के लिए बदली गई स्ट्रीटलाइट्स
यह देश सिर्फ इंसानों का ही नहीं, बल्कि चमगादड़ों जैसे जीवों का भी उतना ही ख्याल रखता है। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रेडरिक्सबोर्गवेय क्षेत्र में चमगादड़ों की एक स्थायी कॉलोनी रहती है। इस इलाके में कृत्रिम रोशनी चमगादड़ों के उड़ने, खाने और रास्ता पहचानने में बाधा डालती थी, इसलिए सड़क की विशेष पट्टियों पर सफेद लाइट हटाकर लाल रंग की रोशनी लगाई गई है। लाल प्रकाश की तरंगें लंबी होती हैं और शोध के अनुसार यह चमगादड़ों पर सबसे कम नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। जबकि नीली, हरी या सफेद रोशनी उनके व्यवहार को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।
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सड़क पर लाइटिंग डिजाइनसड़क के कुछ हिस्सों चौराहों और क्रॉसिंग पर अभी भी गर्म सफेद रोशनी लगाई गई है। इन्हें ऊंचे पोलों पर रखा गया है ताकि ड्राइवरों और साइकिल चालकों को विजिबिलिटी में किसी तरह की दिक्कत न हो। ग्लाडसैक्से इलाके में सड़क पर लाइटिंग डिजाइन को इस तरह बनाया गया है, कि जहां जानवर ज्यादा सक्रिय हैं वहां लाल रोशनी और जहां मानवीय गतिविधि अधिक है वहां सफेद रोशनी का इस्तेमाल किया जाए।
पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील लाल रोशनी
चमगादड आमतौर पर अंधेरे और शांत स्थानों पर रहना पसंद करते हैं। वे सफेद और तेज रोशनी से बचते हैं, जो उनके प्राकृतिक व्यवहार में बाधा डालती है। तो वहीं उन्हें आकर्षित करने के लिए कम तीव्रता वाली, विशेषकर लाल रोशनी उपयुक्त मानी जाती है। लाल रोशनी एक तरह का प्रतीक भी है। जो यह बताती है कि यह इलाका पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील है। डेनमार्क का यह प्रयोग दिखाता है कि, कभी-कभी सड़कें सिर्फ रोशनी से नहीं, बल्कि सोच में बदलाव से भी सुरक्षित बनाई जा सकती हैं। फिलहाल लाल स्ट्रीटलाइट्स का दायरा छोटा है और इसे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। लेकिन यूरोप और अमेरिका के कई शहरी योजनाकार इस मॉडल को उत्सुकता से देख रहे हैं।