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Zara Hatke: मौत के 5 घंटे बाद जिंदा हो गया शख्स! धड़कन और सांस हो गई थी बंद, फिर अस्पताल में हुआ चमत्कार

फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: Dharmendra Kumar Singh Updated Wed, 15 Apr 2026 06:52 PM IST
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सार

Zara Hatke: रूस के साइबेरिया से एक ऐसी खबर सामने आई, जिसके बारे में जानकर आपके लिए यकीन करना मुश्किल होगा। दरअसल, यहां पर मरने के पांच घंटे बाद एक शख्स जिंदा हो गया। आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है? 

Zara Hatke Frozen man clinically dead for 5 hours brought back to life in Siberia
मौत के 5 घंटे बाद जिंदा हो गया शख्स! धड़कन और सांस हो गई थी बंद - फोटो : AI
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विस्तार

Zara Hatke: कहा जाता है कि जाको राखे साइयां मार सके ना कोय। इसका मतलब है जिसकी रक्षा ईश्वर करते हैं, उसे कोई नहीं मार सकता। अब एक ऐसा मामला सामने आया है, जो इस कथन को सच साबित करता है। दरअसल, रूस के साइबेरिया में एक ऐसी घटना घटी है, जिसने विज्ञान को हैरान कर दिया है। यहां पर एक शख्स जमा देने वाली ठंड में 5 घंटे से पड़ा हुआ था, जिसकी धड़कन और सांसें नहीं चल रही थीं।

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सबसे हैरानी वाली बात यह है कि डॉक्टरों ने शख्स को क्लीनिकली डेड मान लिया था। इसके बाद बेहद हैरा कर देने वाली घटना हुई। दरअसल, शख्स जिंदा हो गया और अपने आप चलकर अस्पताल से बाहर आया। आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है? 
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दुनिया के सबसे ठंडे इलाकों में शामिल साइबेरिया के मिरनी में घटी इस घटना को मेडिकल साइंस का चमत्कार माना जा रहा है। शख्स कड़ाके की ठंड में शराब पीकर बेहोश हो गया था और पांच घंटे तक बिना किसी जीवन संकेत के बर्फ में पड़ा रहा है। उसके जिंदा होने के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे थे। लेकिन डॉक्टरों ने उसे दोबारा जिंदा कर दिया। 

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मीडिया रिपोर्ट के मताबिक, नशे में शख्स एक बेंच पर गिर गया था और उस समय वहां तापमान  -20 डिग्री सेल्सियस था। जब राहगीरों ने देखा तो उसकी सांसें बंद थीं। जब मौके पर पैरामेडिक्स पहुंचे, तो उन्हें भी कोई पल्स नहीं मिली और न ही ब्लड प्रेशर। ईसीजी मशीन पर भी उसकी हृदय गति पूरी तरह स्थिर थी। सामान्य परिस्थितियों में इसे क्लीनिकल डेथ मान लिया जाता है। 

क्लीनिकल डेथ के बाद डॉक्टरों ने नहीं छोड़ी उम्मीद 

क्लीनिकल डेथ के बाद भी डॉक्टरों ने उम्मीद नहीं छोड़ी। एनेस्थेटिस्ट डॉ. दिमित्री बोसिकोव की देखरेख में डॉक्टरों की टीम ने एक जटिल प्रक्रिया की शुरुआत की। डॉक्टरों ने उसके शरीर का तापमान बढ़ाने की तकनीक अपनाई। उन्होंने उसके शपरी का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से बढ़ाकर 34 डिग्री सेल्सियस कर दिया। इसके उन्होंने चार घंटे तक कड़ी मेहनत की। 

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अस्पताल की तरफ से बताया गया है कि अगर शख्स के शरीर को अचानक गर्म कर देते, तो छोटी नसें फट सकती थीं। इससे ब्रेन हेमरेज या हार्ट अटैक हो सकता था। इससे धीरे-धीरे शरीर को गर्म करने की प्रक्रिया अपनाई गई। शरीर का तापमान 34 डिग्री तक पहुंचने पर सीपीआर और लाइफ सपोर्ट दवाओं का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया। 25 मिनट की मशक्कत के बाद मॉनिटर पर जीवन की हल्की किरण नजर आई। 

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विशेषज्ञों का बयान 

मेडिकल विशेषज्ञों ने बताया कि इस केस में ज्यादा ठंड शख्स के लिए वरदान साबित हुई। शरीर के ज्यादा ठंडा होने पर अंगों को ऑक्सीजन की बहुत कम जरूरत होती है। इससे मस्तिष्क और महत्वपूर्ण अंग एक तरह के प्रिजर्वेशन मोड में पहुंच जाते हैं। इसके कारण ही 5 घंटे तक धड़कन बंद होने पर शख्स के अंग खराब नहीं हुए। अस्पताल में शख्स 5 दिन तक भर्ती रहा और फिर घर चला गया। 

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