Gold-Silver Price: सोना-चांदी आम आदमी की पहुंच से दूर, जानें सर्राफा बाजार का आज का अपडेट
वैश्विक तनाव और बाजार की अनिश्चितता के चलते सोने-चांदी की कीमतों में तेज उछाल आया है। चांदी पहली बार 3 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई, जबकि सोना भी रिकॉर्ड स्तरों के करीब है, जिससे आम लोगों के लिए खरीदारी महंगी हो गई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर क्यों बढ़ रहे हैं सोने-चांदी के दाम।
विस्तार
दुनिया में चल रहे राजनीतिक और आर्थिक तनाव का असर अब आम लोगों की जेब पर भी दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता के बीच लोग सोना-चांदी को सुरक्षित निवेश मानकर खरीदारी कर रहे हैं, जिससे इनके दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि चांदी ने पहली बार इतिहास में 3 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा पार कर लिया।
घेरलू बाजार में सोना-चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
चांदी की कीमतों में मंगलवार को रिकॉर्ड तोड़ उछाल जारी रहा और यह 3.2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई, जबकि सोने के वायदा भाव में भी तेजी आई और यह 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर, मार्च डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा भाव में 9,674 रुपये या 3.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 3,19,949 रुपये प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
सोमवार को भारत में चांदी 3,10,000 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई, जबकि सोना भी नए ऊंचे स्तरों पर कारोबार करता दिखा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 1,47,757 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3,10,151 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई। यानी अब आम आदमी के लिए सोना-चांदी खरीदना पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है।
सर्राफा बाजार में क्या है सोने का भाव
सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव 1,46,250 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट सोना 1,34,060 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,09,690 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। वहीं चांदी की कीमत भी 3,05,100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है।
वैश्विक बाजार में सोने-चांदी का भाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। कॉमेक्स पर आज सोना $4,669.40 प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी का भाव $93.400 प्रति औंस रहा। इससे पहले सोमवार को सोना $4,672.50 प्रति औंस और चांदी $94.065 प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गई थी।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस महंगाई की बड़ी वजह दुनिया भर में बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों, यूरोप से जुड़े व्यापार विवाद, चांदी की कम आपूर्ति और मजबूत मांग ने कीमतों को और ऊपर धकेल दिया है। ऐसे में आम लोगों के लिए गहने खरीदना या बचत के लिए सोना-चांदी लेना अब और भारी पड़ने लगा है।
कम आपूर्ति और औद्योगिक क्षेत्रे में मांग ज्यादा
जियोजित इंवेस्टमेंट्स लिमिटेड के कोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी बताते हैं, वैश्विक और घरेलू कारणों की वजहों से भारत में चांदी कीमतें 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गई हैं। इस वृद्धि के पीछे एक मुख्य कारण वैश्विक सप्लाई में लगातार कमी है। वे कहते हैं, दुनिया भर में चांदी का उत्पादन बढ़ती मांग को पूरा करना मुश्किल हो रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि खदानों का आउटपुट कम है और रीसाइक्लिंग वॉल्यूम भी कम है, जिसकी वजह से स्ट्रक्चलर में कमी हो रही है, ऐसी संभावना है कि यह परेशानी 2026 तक बनी रहेगी। हरीश बताते हैं चांदी की औद्योगिकी मांग काफी बढ़ गई है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस टेक्नोलॉजी में चांदी की आवश्यक इनपुट है। यह ऐसे सेक्टर हैं, जो ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन के हिस्से के तौर पर तेजी से बढ़ रहे हैं।
बदलते मैक्रोइकोनॉमिक हालात
हरीश कहते हैं कि मैक्रोइकोनॉमिक हालात ने भी कीमतों को बढ़ाया है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के बीच निवेशक चांदी को एक सुरक्षित निवश एसेट के तौर पर देख रहे हैं, जिससे सिल्वर ईटीएफ में रिटेल और इंस्टीट्यूशनल दोनों तरह का पैसा आ रहा है।
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घरेलू बाजारों ने चांदी कीमतों को हवा दी
उनका कहना है भारत में घरेलू वजहों से जैसे कि त्योहार और शादी के मौसम में खरीदारी, डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये से आयात महंगा होना और मजबूत घरेलू मांग ने चांदी की कीमतों में तेजी लाने में प्रमुख भूमिका निभाई है। कुल मिलाकर कम आपूर्ति, मजबूत मांग और बुलिश निवेशक सेंटिमेंट के इस अनोखे मेल ने भारतीय बाजार में चांदी को रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब पहुंचा दिया है।
भूराजनीतिक तनाव और ग्रीनेलैंड की खरीदारी ने बढ़ाई कीमतें
कमोडिटी विशेषज्ञों का कहना है अमेरिका के राष्ट्रपति के ग्रीनलैंड की खरीदारी की योजना का विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों, जिनमें फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम शामिल है, उनके आयात पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है। 1 फरवरी 2026 से शुरू होने वाला यह टैरिफ जून 2026 तक बढ़कर 25 प्रतिशत किया जाएगा। जिसकी वजह से सुरक्षित निवेश की ओर निवेशकों की मांग बढ़ती है, जिसने सोने-चांदी की कीमतों उच्च स्तर पर पहुंचा दिया है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी के वीपी रिसर्च विशेषज्ञ जतिन त्रिवेदी कहते हैं, चांदी की कीमते 3 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के पीछे कई स्ट्रक्चलर और मैक्रो फैक्टर्स का मिला-जुला असर है। जब चांदी की कीमतों ने 1,00,000 रुपये पार करने के बाद घरेलू फिजिकल मांग में उछाला आया है। दूसरा दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक व्हीकल और इलेक्ट्रॉनिक्स से मजबूत औद्योगिक मांग बढ़ने से सप्लाई कम हो रही है, जबकि बढ़ते हुए जियोपॉलिटिकल तनाव जो रूस -यूक्रेन, ईरान-इस्राइल और अमेरिका-ईरान यहा तक कि अब ग्रीनलैंड तक फैला हुआ है, जिसने रिस्क प्रीमियम को बढ़ा दिया है। त्रिवेदी कहते हैं, डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और फिएट मुद्राएं (फिएट मुद्राएं सरकार द्वारा जारी की गई मुद्राएं होती हैं, से अमेरिकी डॉलर या यूरो, जो किसी भौतिक वस्तु (जैसे सोना) द्वारा समर्थित नहीं होती) के विकल्प के तौर पर बुलियन को सुरक्षित निवेश के तौर पर पसंद किए जाने की वजह से निवेश मांग बढ़ गई है, जिससे चांदी की रैली तेज हो गई है।
जनवरी 2026 के बीच तक चांदी ने दिया 30 प्रतिशत रिटर्न
चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर मकदा ने कहा, जनवरी 2026 के बीच तक चांदी ने निवेशकों को 30 प्रतिशत रिटर्न दिया है, जो साल 2025 से तेजी से बढ़ रहा है। चांदी 93 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई है, यह एक ऐसा स्तर है, जिसके बारे में कभी सोचा भी नहीं गया था। औद्योगिक क्षेत्र में जिस तरह से चांदी की मांग बढ़ी है, उसी उलट उसका उत्पादन भी कम रहा है और भूराजनीतिक बदलावों के 'परफेक्ट स्टॉर्म' वजह से यह स्तर देखा जा रहा है।
चांदी की कीमतों में काफी समय से तेजी देखी गई है, पिछले चार महीनों से भी कम समय में इसने निवेशकों के पैसे दोगुने कर दिए है। एमसीएक्स पर वायदा भाव ने पहले बार अक्तूबर 2025 में शुरुआत में 1,50,000 रुपये प्रति किलाग्राम का स्तर पार किया था। वहीं स्पॉट बाजार यानी हाजिर बाजार में चांदी कीमत 29 सितंबर 2025 को 1,50,000 रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची थी। आज 19 जनवरी 2026 को चांदी की कीमतों में नया रिकॉर्ड बनाया है, जहां एमसीएक्स पर मार्च वायदा 3,01,315 रुपये प्रति किलो रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। देखें तो 3 महीने में निवेशकों को दोगुना रिटर्न चांदी ने दिया है।
चांदी जरूरी औद्योगिकी कमोडिटी बन गई है
मकदा कहते हैं, चांदी जरूरी औद्योगिकी कमोडिटी बन गई है जो तीन विशेष टेक्नोलॉजी की वजह से, पहला सोलर कैपेसिटी को बढ़ना, दूसरा इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग, तीसरी चांदी आधारित कपोनेंट्स की बढ़ती निर्भर एआई और डेटा सेंटर्स की बढ़ती जरूरतें मुख्य है।
चीन के सख्त निर्यात लाइसेंसिंग
वे कहते हैं चीन के सख्त निर्यात लाइसेंसिंग और लिमिटेड माइनिंग ग्रोथ की वजह से बाजार को स्ट्रक्चलर आपूर्ति की कीम का सामना करना पड़ा रहा है। जिसमें इन्वेंट्री में भारी गिरावट आई है। इसके साथ ही वेनेजुएला ने चांदी की सुरक्षित-निवेश की अपील को मजबूत किया है, जिससे इसकी मांग और बढ़ी है क्योंकि निवेशक वोलैटिलिटी के बीच स्टेबिलिटी चाहते हैं।
गोल्ड-टू-सिल्वर रेश्यो में बड़ी गिरावट
उन्होंने कहा कि गोल्ड-सिल्वर रेश्यो में बड़ी गिरावट आने वाले वर्षों में चांदी के लिए एक संभावित तेजी का ट्रेंड दिखाती है। गोल्ड/सिल्वर रेश्यो आज की तारीख में अपने ऐतिहासिक एवरेज मार्क यानी 50 :1 तक गिर गया है, जिससे पता चलता है कि सिल्वर की कीमत से बेहतर परफॉर्म कर रहा है। यह गिरावट दर्शाती है कि चांदी, सोने की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रही है। अंतरराष्ट्रीय संकेतो का असर भारतीय बाजारों जारी रहेगा। घरेलू मोर्चे पर एमसीएक्स पर सोने और चांदी के कीमतों में तेजी जारी रहने की संभावना है।