शहरी सहकारी बैंकों को RBI गवर्नर की दो टूक: 'गवर्नेंस' और 'एसेट क्वालिटी' से समझौता मंजूर नहीं, जानें सबकुछ
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शहरी सहकारी बैंकों को गवर्नेंस और एसेट क्वालिटी सुधारने के निर्देश दिए। जानें मुंबई बैठक में ग्राहकों के भरोसे और अंडरराइटिंग पर क्या कहा गया।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शहरी सहकारी बैंकों (अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक या यूसीबी) को साफ कर दिया कि सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को अपनी साख बनाए रखने के लिए गवर्नेंस के उच्च मानकों का पालन करना होगा। केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को ऐसे बैंको को विशेष रूप से एसेट क्वालिटी पर कड़ी निगरानी रखने और मजबूत अंडरराइटिंग प्रथाओं को अपनाने की वकालत की है। यह निर्देश मुंबई में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान दिया गया, जहां गवर्नर चुनिंदा यूसीबी के चेयरपर्सन, प्रबंध निदेशकों (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को संबोधित कर रहे थे।
आरबीआई गवर्नर ने सहकारी बैंकों को क्या सलाह दी?
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक में साफ किया कि यूसीबी को केवल कर्ज बांटने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि उस कर्ज की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने 'एसेट क्वालिटी' पर मेहनती निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया। बैंकिंग सेक्टर में बढ़ते जोखिमों के बीच गवर्नर का यह बयान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मजबूत अंडरराइटिंग प्रथाओं को अपनाना समय की मांग है, ताकि बैड लोन या एनपीए जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
सहकारी बैंकों की प्रासंगिकता पर बात करते हुए गवर्नर ने कहा कि 'क्रेडिट डिलीवरी' यानी ऋण वितरण में यूसीबी की भूमिका अहम बनी हुई है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह नहीं पहुंची हैं, वहां वित्तीय समावेशन को बढ़ाने में ये बैंक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। गवर्नर ने भरोसा जताया कि रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में शुरू की गई नीतिगत पहल इस क्षेत्र को मजबूत बनाने और स्वस्थ तरीके से विकसित होने में मदद करेंगी।
बैंकिंग व्यवसाय के बारे में क्या बोले गवर्नर?
बैंकिंग व्यवसाय पूरी तरह से भरोसे पर टिका है। गवर्नर मल्होत्रा ने बैंकरों को 'ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण' अपनाने की सलाह दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में ग्राहकों का विश्वास बनाए रखने के लिए नैतिक प्रथाओं का पालन करना और समय पर शिकायतों का निवारण करना अनिवार्य है। इस इंटरैक्टिव सत्र के दौरान, यूसीबी के प्रमुखों ने नीतिगत मुद्दों और परिचालन मामलों पर अपने सुझाव और फीडबैक साझा किए। बैठक में नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनयूसीएफडीसी) और नेशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक्स एंड क्रेडिट सोसाइटीज लिमिटेड (एनएएफसीयूबी) के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
बैठक में गवर्नर के अलावा डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे और एससी मुर्मू भी उपस्थित थे। गौरतलब है कि इस तरह की पिछली बैठक पिछले साल मार्च में आयोजित की गई थी। आरबीआई का यह कदम बताता है कि रेगुलेटर सहकारी बैंकों को मुख्यधारा की बैंकिंग प्रणाली के समकक्ष और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए गंभीर है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शहरी सहकारी बैंकों को गवर्नेंस और एसेट क्वालिटी सुधारने के निर्देश दिए। जानें मुंबई बैठक में ग्राहकों के भरोसे और अंडरराइटिंग पर क्या कहा गया।