The Bonus Market Update: सेंसेक्स 750 अंक से ज्यादा टूटा; निफ्टी 24 हजार के नीचे, आईटी शेयरों में बिकवाली
शुक्रवार को शेयर बाजार में भारी कोहराम दिखा। सेंसेक्स 750 से ज्यादा अंक टूटकर 76,694 पर और निफ्टी 24,000 के नीचे पहुंचा। आईअी इंडेक्स में छह की बड़ी गिरावट आई। जानें क्यों मजबूत होते रुपये और अमेरिका-ईरान समझौते से बाजार को है रिकवरी की उम्मीद। विस्तृत बिजनेस न्यूज पढ़ें।
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विस्तार
गुरुवार की मजबूती के बाद, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद खराब रही है। शुरुआती कारोबार में ही बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह धड़ाम हो गए हैं। हालांकि, अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीदों और डॉलर के मुकाबले मजबूत होते रुपये से विश्लेषकों को आगे बाजार में रिकवरी की आशा है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आज बाजार में क्या हुआ और निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत हैं।
शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार में कितनी भयंकर गिरावट आई है?
सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों में निराशा छा गई। आईटी कंपनियों में भारी बिकवाली के चलते शुक्रवार को पांच दिनों की तेजी के बाद शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती कारोबार में गिरावट आई। एक्सेंचर की राजस्व वृद्धि के अनुमानों में कटौती के बाद यह नरमी देखी गई। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 786.58 अंक गिरकर 76,624.90 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 210.95 अंक गिरकर 23,959.80 पर पहुंच गया।
बाजार की इस भारी गिरावट में किस सेक्टर ने सबसे ज्यादा डुबोया?
बाजार में मची इस हाहाकार के पीछे सबसे बड़ा हाथ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) सेक्टर का है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, आईटी इंडेक्स में छह प्रतिशत की भारी-भरकम गिरावट दर्ज की गई है, जिसने पूरे शेयर बाजार के सेंटीमेंट को बुरी तरह से नीचे खींच लिया है। सेंसेक्स में सूचीबद्ध 30 कंपनियों में से इंफोसिस के शेयर आठ प्रतिशत से अधिक गिरे, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयर छह प्रतिशत लुढ़के, टेक महिंद्रा के शेयर पांच प्रतिशत नीचे आए और एचसीएल टेक के शेयर 4.9 प्रतिशत गिरे। एचडीएफसी बैंक और टाटा स्टील भी गिरावट दर्ज करने वाली कंपनियों में शामिल थीं।एनटीपीसी, भारती एयरटेल, ट्रेंट और पावर ग्रिड विजेताओं में शामिल थे। बीएसई आईटी इंडेक्स में 5.38 प्रतिशत की गिरावट आई।
शेयर बाजार के उलट, विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की क्या स्थिति है?
शेयर बाजार में जहां कोहराम मचा है, वहीं विदेशी मुद्रा बाजार से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये ने 10 पैसे की मजबूती दर्ज की है और यह 94.30 के स्तर पर पहुंच गया है।
क्या बाजार की यह गिरावट आगे भी जारी रहेगी या रिकवरी की कोई उम्मीद है?
गुरुवार को घरेलू बाजार काफी लचीला रहा था और निफ्टी 82 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ था। बाजार विश्लेषकों को अभी भी उम्मीद है कि भारतीय शेयर बाजार अपनी सकारात्मक गति बनाए रखेगा और इसकी चाल ऊपर की तरफ बनी रहेगी। शुक्रवार को अमेरिका-ईरान के बीच संभावित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जिससे भू-राजनीतिक चिंताएं और कम होंगी। इसके साथ ही कच्चे तेल की नरम कीमतें और स्थिर रुपया निवेशकों के भरोसे को और मजबूत कर सकते हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, "एक्सेंचर द्वारा अपने अनुमानों में कटौती करने से भारतीय आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के एडीआर (अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स) में बिकवाली शुरू हो गई है।"
प्राइमरी मार्केट और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का आज क्या हाल है?
प्राथमिक बाजार में हलचल बनी हुई है, जहां 'टर्टलमिंट आईपीओ' के लिए पहले दिन की बोली आज से शुरू हो गई है। लेकिन अगर ग्लोबल बाजारों की बात करें, तो वहां भी मंदी छाई हुई है। अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स और जापान के टॉपिक्स में 0.3% की गिरावट आई है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया का और यूरोप का यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स 0.5% तक गिर गया है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.93 प्रतिशत गिरकर 79.11 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई 225 सूचकांक मामूली रूप से ऊपर रहा। गुरुवार को अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए।
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 1,025.20 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। गुरुवार को बेंचमार्क इक्विटी सूचकांक सकारात्मक दायरे में बंद हुए, लगातार पांचवें सत्र में इनमें तेजी देखी गई। सेंसेक्स 254.36 अंक या 0.33 प्रतिशत चढ़कर 77,409.98 पर बंद हुआ। निफ्टी 82.30 अंक या 0.34 प्रतिशत बढ़कर 24,168 पर समाप्त हुआ।फिलहाल आईटी शेयरों की भारी बिकवाली और ग्लोबल बाजारों की सुस्ती ने भारतीय शेयर बाजार पर भारी दबाव बना दिया है। लेकिन स्थिर होते रुपये और पश्चिम एशिया में संभावित शांति समझौते को देखते हुए, लंबी अवधि में बाजार के फिर से मजबूत होने की पूरी गुंजाइश बनी हुई है।