{"_id":"6a3475931064a3e56e0399a4","slug":"business-updates-india-share-mkt-usd-vs-inr-forex-commerce-trade-import-export-hindi-news-2026-06-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Biz Updates: आंध्र प्रदेश बनेगा देश का सबसे बड़ा सोना आपूर्तिकर्ता, जोननगिरी में मिला 50 टन का भंडार","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Biz Updates: आंध्र प्रदेश बनेगा देश का सबसे बड़ा सोना आपूर्तिकर्ता, जोननगिरी में मिला 50 टन का भंडार
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 19 Jun 2026 04:18 AM IST
विज्ञापन
बिजनेस न्यूज एंड अपडेट्स
- फोटो : amarujala.com
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आंध्र प्रदेश के एक अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में राज्य देश का सबसे बड़ा सोना आपूर्तिकर्ता बन सकता है। उन्होंने इसके पीछे कुरनूल जिले के जोननगिरी गांव में अनुमानित 50 टन सोने के भंडार का हवाला दिया।
खदान विभाग के प्रधान सचिव मुकेश कुमार मीना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जोननगिरी के अलावा राज्य में चार और संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई है, जहां सोने के भंडार हो सकते हैं। इनमें रामगिरी, जाव्वाकुला और चिगुरुकुंटा बिस्नातम जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
उन्होंने कहा, हमारा अनुमान है कि अकेले जोननगिरी में 50 टन सोना मौजूद है। इसलिए हमें भरोसा है कि कुछ वर्षों में आंध्र प्रदेश देश का सबसे बड़ा सोना आपूर्तिकर्ता बन जाएगा। उन्होंने बताया कि जोननगिरी में सोने का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो चुका है और करीब एक दशक पहले इस गांव में 1,500 एकड़ जमीन खनन के लिए आवंटित की गई थी। इन 1,500 एकड़ में से लगभग 500 एकड़ में ही अभी तक अन्वेषण हुआ है, जहां करीब 13 टन सोने का अनुमान लगाया गया है।
विज्ञापन
अधिकारी ने कहा कि बाकी 1,000 एकड़ में अभी भी खोज कार्य बाकी है, जिससे कुल अनुमानित भंडार बढ़कर 50 टन तक पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोने की खनन प्रक्रिया बहुत महंगी और विशेषज्ञता वाली होती है, इसलिए सरकार ने इसे टेंडर के जरिये निजी कंपनियों को सौंपा है। मीना ने बताया कि समय के साथ सोने की प्राप्ति दर भी काफी कम हो गई है। पहले एक टन अयस्क से तीन ग्राम सोना मिलता था, जबकि अब यह घटकर लगभग एक ग्राम रह गया है।
एचडीएफसी बैंक: मिस्त्री का कार्यकाल तीन माह बढ़ा
आरबीआई ने एचडीएफसी बैंक के अंतरिम चेयरमैन के रूप में केकी मिस्त्री का कार्यकाल तीन महीने तक बढ़ा दिया है। बैंक ने बृहस्पतिवार को कहा, मिस्त्री का कार्यकाल 18 सितंबर, 2026 तक या नियमित चेयरमैन की नियुक्ति तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगा। बैंक ने यह भी बताया, उसके बोर्ड ने 32वीं सालाना आम बैठक 5 अगस्त को आयोजित करने को मंजूरी दी है। इसमें 2025-26 के लिए 13 रुपये प्रति शेयर के लाभांश भुगतान को भी मंजूरी दी जाएगी।
अल-नीनो की मार: मानसून में देरी से खरीफ बुआई पिछड़ी, दलहन-कपास को बड़ा झटका
देश के ग्रामीण अर्थतंत्र और किसानों के लिए शुरुआती संकेत अच्छे नहीं मिल रहे हैं। अल-नीनो के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ गई है, जिससे देश में अब तक सामान्य से 38 फीसदी कम बारिश हुई है। इसका असर खेतों में दिखने लगा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 12 जून तक खरीफ फसलों की बुआई 84.60 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो एक साल पहले के 88.04 लाख हेक्टेयर से 3.44 लाख हेक्टेयर कम है।
कम बारिश से दालों की बुआई को सबसे तगड़ा झटका लगा है। दलहन का कुल रकबा पिछले साल के 2.73 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.55 लाख हेक्टेयर रह गया।
इसमें 1.18 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। मूंग सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। पिछले साल के 1.54 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस बार सिर्फ 0.69 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई है। अरहर की बुआई 0.21 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.09 लाख हेक्टेयर रह गई। उड़द का रकबा भी 0.35 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.27 लाख हेक्टेयर रह गया है। नकदी फसलों में कपास की बुआई में सबसे बड़ी 3.66 लाख हेक्टेयर की गिरावट देखने को मिली है। रकबा 13.19 लाख हेक्टेयर से घटकर 9.53 लाख हेक्टेयर रह गया है।
हालांकि, शुरुआती दौर में धान की बुआई में थोड़ी तेजी देखी गई है। अब तक 4.98 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई हुई है, जो पिछले साल के 3.88 लाख हेक्टेयर से 1.09 लाख हेक्टेयर अधिक है। मानसून में सुधार नहीं होने पर आगे इस पर दबाव आ सकता है। तिलहन की बुआई पिछले साल के लगभग बराबर यानी 3.51 लाख हेक्टेयर में हुई है।
विज्ञापन
खदान विभाग के प्रधान सचिव मुकेश कुमार मीना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जोननगिरी के अलावा राज्य में चार और संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई है, जहां सोने के भंडार हो सकते हैं। इनमें रामगिरी, जाव्वाकुला और चिगुरुकुंटा बिस्नातम जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा, हमारा अनुमान है कि अकेले जोननगिरी में 50 टन सोना मौजूद है। इसलिए हमें भरोसा है कि कुछ वर्षों में आंध्र प्रदेश देश का सबसे बड़ा सोना आपूर्तिकर्ता बन जाएगा। उन्होंने बताया कि जोननगिरी में सोने का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो चुका है और करीब एक दशक पहले इस गांव में 1,500 एकड़ जमीन खनन के लिए आवंटित की गई थी। इन 1,500 एकड़ में से लगभग 500 एकड़ में ही अभी तक अन्वेषण हुआ है, जहां करीब 13 टन सोने का अनुमान लगाया गया है।
विज्ञापन
अधिकारी ने कहा कि बाकी 1,000 एकड़ में अभी भी खोज कार्य बाकी है, जिससे कुल अनुमानित भंडार बढ़कर 50 टन तक पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोने की खनन प्रक्रिया बहुत महंगी और विशेषज्ञता वाली होती है, इसलिए सरकार ने इसे टेंडर के जरिये निजी कंपनियों को सौंपा है। मीना ने बताया कि समय के साथ सोने की प्राप्ति दर भी काफी कम हो गई है। पहले एक टन अयस्क से तीन ग्राम सोना मिलता था, जबकि अब यह घटकर लगभग एक ग्राम रह गया है।
एचडीएफसी बैंक: मिस्त्री का कार्यकाल तीन माह बढ़ा
आरबीआई ने एचडीएफसी बैंक के अंतरिम चेयरमैन के रूप में केकी मिस्त्री का कार्यकाल तीन महीने तक बढ़ा दिया है। बैंक ने बृहस्पतिवार को कहा, मिस्त्री का कार्यकाल 18 सितंबर, 2026 तक या नियमित चेयरमैन की नियुक्ति तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगा। बैंक ने यह भी बताया, उसके बोर्ड ने 32वीं सालाना आम बैठक 5 अगस्त को आयोजित करने को मंजूरी दी है। इसमें 2025-26 के लिए 13 रुपये प्रति शेयर के लाभांश भुगतान को भी मंजूरी दी जाएगी।
अल-नीनो की मार: मानसून में देरी से खरीफ बुआई पिछड़ी, दलहन-कपास को बड़ा झटका
देश के ग्रामीण अर्थतंत्र और किसानों के लिए शुरुआती संकेत अच्छे नहीं मिल रहे हैं। अल-नीनो के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ गई है, जिससे देश में अब तक सामान्य से 38 फीसदी कम बारिश हुई है। इसका असर खेतों में दिखने लगा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 12 जून तक खरीफ फसलों की बुआई 84.60 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो एक साल पहले के 88.04 लाख हेक्टेयर से 3.44 लाख हेक्टेयर कम है।
कम बारिश से दालों की बुआई को सबसे तगड़ा झटका लगा है। दलहन का कुल रकबा पिछले साल के 2.73 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.55 लाख हेक्टेयर रह गया।
इसमें 1.18 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। मूंग सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। पिछले साल के 1.54 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस बार सिर्फ 0.69 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई है। अरहर की बुआई 0.21 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.09 लाख हेक्टेयर रह गई। उड़द का रकबा भी 0.35 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.27 लाख हेक्टेयर रह गया है। नकदी फसलों में कपास की बुआई में सबसे बड़ी 3.66 लाख हेक्टेयर की गिरावट देखने को मिली है। रकबा 13.19 लाख हेक्टेयर से घटकर 9.53 लाख हेक्टेयर रह गया है।
हालांकि, शुरुआती दौर में धान की बुआई में थोड़ी तेजी देखी गई है। अब तक 4.98 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई हुई है, जो पिछले साल के 3.88 लाख हेक्टेयर से 1.09 लाख हेक्टेयर अधिक है। मानसून में सुधार नहीं होने पर आगे इस पर दबाव आ सकता है। तिलहन की बुआई पिछले साल के लगभग बराबर यानी 3.51 लाख हेक्टेयर में हुई है।