The Bonus Market Update: जंग व एआई शेयरों में नरमी से आहत बाजार; सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 23150 से नीचे
पश्चिम के तनाव और वैश्विक स्तर पर एआई शेयरों की बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार को हिला दिया है। सेंसेक्स 719 अंक टूटकर बंद हुआ और निफ्टी 23,150 के नीचे फिसल गया। आइए बाजार की चाल के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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विस्तार
भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन भारी उथल-पुथल और नुकसान वाला साबित हुआ। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के 100 दिन पूरे होने और ग्लोबल स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े ट्रेड में आ रहे बड़े बदलावों के कारण घरेलू इक्विटी बाजार बुरी तरह लड़खड़ा गए। इस भारी बिकवाली के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध कंपनियों के मार्केट कैप में एक ही झटके में 4.5 लाख करोड़ रुपये की बड़ी सेंध लग गई।
बाजार में आज इतनी भारी गिरावट क्यों आई?
कारोबारी सत्र के अंत में बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बीएसई का सेंसेक्स 719.08 अंक (0.96%) लुढ़ककर 73,524.26 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 243.71 अंक (1.04%) टूटकर 23,150 के अपने अहम सपोर्ट लेवल से नीचे 23,123.00 पर बंद हुआ। इस व्यापक गिरावट के माहौल में प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी भारी दबाव देखा गया, जहां जियो फाइनेंशियल और इटरनल जैसे शेयरों में चार-चार प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों को 4.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान कैसे हुआ?
बाजार में यह पतन केवल एक दिन का परिणाम नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल एआई ट्रेड के ढांचे में हो रही आक्रामक अनवाइंडिंग (बिकवाली) का सीधा असर है। वैश्विक बाजार की इन तेज हवाओं ने भारतीय शेयर बाजार को अपनी चपेट में ले लिया है। इस व्यापक बिकवाली के कारण निफ्टी इंडेक्स में करीब 7% की गिरावट आ चुकी है और इसी दबाव के चलते निवेशकों की 4.5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई।
कच्चा तेल और विदेशी निवेशक कैसे बढ़ा रहे हैं दोहरी मुसीबत?
भारतीय इक्विटी बाजार और अर्थव्यवस्था इस समय एक स्पष्ट 'दोहरे खतरे' का सामना कर रहे हैं:
- भू-राजनीतिक तनाव और महंगा तेल: पश्चिम एशिया में युद्ध लंबा खिंचने के कारण वैश्विक बाजार में भारी तनाव है, जिसने ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों को 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह एक बड़ा आर्थिक जोखिम है।
- विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड निकासी: दूसरी ओर, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। इस साल अब तक विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 28 अरब डॉलर मूल्य के शेयर बेचे हैं, जिससे बाजार की तरलता और निवेशकों के भरोसे दोनों को तगड़ा झटका लगा है।
जब तक पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती, तब तक घरेलू शेयर बाजार में दबाव बने रहने की आशंका है। विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड निकासी और ग्लोबल टेक शेयरों में चल रही उथल-पुथल यह स्पष्ट करती है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल बेहद अस्थिर रह सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए आगे का रास्ता काफी सतर्कता भरा रहने वाला है।