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Bond Yield: कच्चे तेल की तेजी में उबला बॉन्ड बाजार, भारत जैसे उभरते बाजारों पर पड़ेगा असर
बोनस डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 19 May 2026 03:44 AM IST
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सार
सैद्धांतिक रूप से बाजार में क्लासिक स्टैगफ्लेशनरी साइकिल बनता दिख रहा है। यानी ऐसी आर्थिक स्थिति जहां विकास दर गिर रही हो और महंगाई लगातार बढ़ रही हो। अमेरिका और यूरोप में वृद्धि धीमी पड़ रही है और महंगाई ऊपर टिकी है। आपूर्ति पक्ष से ऊर्जा का झटका है। मौद्रिक नीति पहले से ही सख्त थी और वृद्धि धीमी पड़ रही है।
बॉन्ड यील्ड में उछाल
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
अगर आप शेयर बाजार के निवेशक हैं और केवल निफ्टी या सेंसेक्स के उतार-चढ़ाव को देखकर अपनी निवेश रणनीति बना रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। इस अनिशि्चत समय बाजार की दिशा दलाल स्ट्रीट से नहीं, बल्कि वैश्विक बॉन्ड और मुद्रा बाजार की चाल से तय हो रही है।
ईरान संकट और कच्चे तेल की भड़कती आग के बीच दुनियाभर के बॉन्ड मार्केट में तेजी है। अमेरिका में बेंचमार्क 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 4.63 फीसदी पर पहुंच गई है, जो पिछले 16 महीने का सबसे ऊपरी स्तर है। यूरोजोन के बॉन्ड की यील्ड पहले से ही 15 साल के रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है। यूके (गिल्ट्स) और जापान के बॉन्ड में भी भारी उछाल है।
घरेलू मोर्चे पर भी 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.14 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है, जो 2 साल का सबसे उच्चतम स्तर है। दरअसल, बॉन्ड यील्ड की बढ़ोतरी का सीधा असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। जब अमेरिकी बॉन्ड में 4.6 फीसदी से ज्यादा का सुरक्षित रिटर्न मिलता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजारों से पैसा निकालकर अपने देश ले जाते हैं। एनएसडीएल के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस साल अब तक भारतीय बाजारों में 2.19 लाख करोड़ के शेयर बेचे हैं। बिकवाली जारी रहने से बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ेगा।
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दुनियाभर में बढ़ रही यील्ड
पश्चिम एशिया तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। पूरी दुनिया के केंद्रीय बैंक मान चुके हैं कि महंगाई इतनी आसानी से नीचे नहीं आने वाली। महंगे तेल का मतलब है...महंगाई का लंबे समय तक ऊंचा बने रहना। इससे आने वाले दिनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी होगी। अगर क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर रहा, तो अगली तिमाही में कुछ देश ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं।
स्टैगफ्लेशन का खतरा
सैद्धांतिक रूप से बाजार में क्लासिक स्टैगफ्लेशनरी साइकिल बनता दिख रहा है। यानी ऐसी आर्थिक स्थिति जहां विकास दर गिर रही हो और महंगाई लगातार बढ़ रही हो। अमेरिका और यूरोप में वृद्धि धीमी पड़ रही है और महंगाई ऊपर टिकी है। आपूर्ति पक्ष से ऊर्जा का झटका है। मौद्रिक नीति पहले से ही सख्त थी और वृद्धि धीमी पड़ रही है।
भारत की स्थिति: देश में स्टैगफ्लेशन जैसे हालात तो नहीं हैं, क्योंकि बुनियाद मजबूत है। दबाव जरूर है। वृद्धि दर का अनुमान 7.1 फीसदी से घटकर 6 से 6.5 फीसदी के बीच आ गया है, जबकि खुदरा महंगाई बढ़कर 4.5 से 5 फीसदी तक जा सकती है। ये दोनों परिस्थितियां बॉन्ड यील्ड को बढ़ा रही हैं।
10 साल के बॉन्ड की यील्ड में उछाल
देश यील्ड
अमेरिका 4.63%
यूरोजोन 3.53%
यूके 5.19%
भारत 7.14%
जापान 2.79%
चीन 1.76%
ब्राजील 14.47%
ईरान संकट और कच्चे तेल की भड़कती आग के बीच दुनियाभर के बॉन्ड मार्केट में तेजी है। अमेरिका में बेंचमार्क 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 4.63 फीसदी पर पहुंच गई है, जो पिछले 16 महीने का सबसे ऊपरी स्तर है। यूरोजोन के बॉन्ड की यील्ड पहले से ही 15 साल के रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है। यूके (गिल्ट्स) और जापान के बॉन्ड में भी भारी उछाल है।
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घरेलू मोर्चे पर भी 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.14 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है, जो 2 साल का सबसे उच्चतम स्तर है। दरअसल, बॉन्ड यील्ड की बढ़ोतरी का सीधा असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। जब अमेरिकी बॉन्ड में 4.6 फीसदी से ज्यादा का सुरक्षित रिटर्न मिलता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजारों से पैसा निकालकर अपने देश ले जाते हैं। एनएसडीएल के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस साल अब तक भारतीय बाजारों में 2.19 लाख करोड़ के शेयर बेचे हैं। बिकवाली जारी रहने से बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ेगा।
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दुनियाभर में बढ़ रही यील्ड
पश्चिम एशिया तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। पूरी दुनिया के केंद्रीय बैंक मान चुके हैं कि महंगाई इतनी आसानी से नीचे नहीं आने वाली। महंगे तेल का मतलब है...महंगाई का लंबे समय तक ऊंचा बने रहना। इससे आने वाले दिनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी होगी। अगर क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर रहा, तो अगली तिमाही में कुछ देश ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं।
स्टैगफ्लेशन का खतरा
सैद्धांतिक रूप से बाजार में क्लासिक स्टैगफ्लेशनरी साइकिल बनता दिख रहा है। यानी ऐसी आर्थिक स्थिति जहां विकास दर गिर रही हो और महंगाई लगातार बढ़ रही हो। अमेरिका और यूरोप में वृद्धि धीमी पड़ रही है और महंगाई ऊपर टिकी है। आपूर्ति पक्ष से ऊर्जा का झटका है। मौद्रिक नीति पहले से ही सख्त थी और वृद्धि धीमी पड़ रही है।
भारत की स्थिति: देश में स्टैगफ्लेशन जैसे हालात तो नहीं हैं, क्योंकि बुनियाद मजबूत है। दबाव जरूर है। वृद्धि दर का अनुमान 7.1 फीसदी से घटकर 6 से 6.5 फीसदी के बीच आ गया है, जबकि खुदरा महंगाई बढ़कर 4.5 से 5 फीसदी तक जा सकती है। ये दोनों परिस्थितियां बॉन्ड यील्ड को बढ़ा रही हैं।
10 साल के बॉन्ड की यील्ड में उछाल
देश यील्ड
अमेरिका 4.63%
यूरोजोन 3.53%
यूके 5.19%
भारत 7.14%
जापान 2.79%
चीन 1.76%
ब्राजील 14.47%