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SEBI: FY26 तक 22 शहरी निकायों ने बॉन्ड के जरिए जुटाए 4500 करोड़, सेबी प्रमुख ने बताया यह क्यों महत्वपूर्ण

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 18 May 2026 05:11 PM IST
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सार

सेबी प्रमुख ने बताया कैसे म्यूनिसिपल बॉन्ड शहरी विकास का अहम हिस्सा बन रहे हैं। आईपीओ, म्यूचुअल फंड और भारतीय शेयर बाजार के ऐतिहासिक उछाल की पूरी जानकारी के लिए अभी पढ़ें।

SEBI Chief: 22 Urban Local Bodies Raise Over Rs 4,500 Crore via Municipal Bonds Till FY26
तुहिन कांत पांडे, सेबी चेयरमैन - फोटो : ANI
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विस्तार

ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स (एएमएफआई) के कार्यक्रम में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे ने देश के पूंजी बाजार की अभूतपूर्व वृद्धि और बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण के नए तरीकों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि बैंक और सरकारी सहायता के अलावा अब म्यूनिसिपल बॉन्ड देश भर में शहरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तपोषण का एक प्रमुख स्रोत बन रहे हैं।

शहरी विकास का नया इंजन म्यूनिसिपल बॉन्ड

सेबी प्रमुख के अनुसार, भारत में म्यूनिसिपल बॉन्ड का बाजार अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन वित्त वर्ष 2026 (FY26) के अंत तक देश भर के 22 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) ने 31 इश्यू के जरिए कुल 4,500 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी जुटाई है।

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  • उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने शहरी स्तर के बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों के लिए म्यूनिसिपल बॉन्ड का सफलतापूर्वक उपयोग किया है।
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  • पांडे ने ओडिशा को भी अपनी विकास वित्तपोषण रणनीति के मुख्य स्तंभ के रूप में म्यूनिसिपल बॉन्ड को अपनाने का सुझाव दिया। 
  • उन्होंने कहा कि इनमें निवेश कर निवेशक केवल रिटर्न नहीं कमाते, बल्कि अपने शहर और राज्य के विकास में प्रत्यक्ष रूप से भागीदार बनते हैं।

शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड का ऐतिहासिक उछाल

घरेलू प्रतिभूति बाजार के व्यापक विस्तार पर प्रकाश डालते हुए सेबी अध्यक्ष ने मजबूत डेटा पेश किया:

  • मार्केट कैप में जबरदस्त वृद्धि: वित्त वर्ष 2016 में बाजार का कुल पूंजीकरण 95 लाख करोड़ रुपये था, जो अप्रैल 2026 में उछलकर लगभग 463 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
  • रिटेल निवेशकों की बढ़ती तादाद: यूनिक रिटेल निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 2019 के 38 मिलियन से बढ़कर 145 मिलियन तक पहुंच गई है।
  • म्यूचुअल फंड और एसआईपी का रिकॉर्ड: म्यूचुअल फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट FY16 के 12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अप्रैल 2026 के अंत तक लगभग 82 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, मासिक एसआईपी इनफ्लो 3,000 करोड़ रुपये से बढ़कर अप्रैल 2026 में 31,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।

प्राइमरी मार्केट में दबदबा और जागरूकता की चुनौती

भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक संघर्षों के बावजूद भारत के प्राइमरी मार्केट ने शानदार प्रदर्शन किया है। 

  • पिछले वित्तीय वर्ष में 366 इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPOs) आए, जिनसे 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए। 
  • आईपीओ की संख्या के मामले में भारत विश्व स्तर पर पहले स्थान पर रहा, जबकि इक्विटी और डेट मार्केट के माध्यम से कुल 13.6 लाख करोड़ रुपये का मोबिलाइजेशन हुआ।
  • हालांकि, निवेश को लेकर एक बड़ी चुनौती भी है। 'सेबी निवेशक सर्वेक्षण 2025' के अनुसार, 63 प्रतिशत परिवार बाजार से जुड़े उत्पादों के बारे में जागरूक हैं, लेकिन केवल 9.5 प्रतिशत ही इनमें निवेश करते हैं। इसमें शहरी क्षेत्रों की भागीदारी 15 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों की महज 6 प्रतिशत है।

सेबी प्रमुख का यह विस्तृत विश्लेषण स्पष्ट करता है कि भारतीय पूंजी बाजार बचत और निवेश के बीच एक मजबूत पुल का काम कर रहा है। जहां एक तरफ आईपीओ और म्यूचुअल फंड के जरिए कॉरपोरेट क्षेत्र को पूंजी मिल रही है, वहीं अब म्यूनिसिपल बॉन्ड और डेट इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से देश का शहरी ढांचा भी वित्तीय रूप से सशक्त बन रहा है। हालांकि, निवेश उत्पादों को लेकर जागरूकता और वास्तविक निवेश के बीच की खाई को पाटना भविष्य की एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार मजबूत
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और महंगाई का जोखिम काफी बढ़ गया है। हालांकि, भारतीय शेयर बाजार इस तरह के किसी भी बाहरी झटके को सफलतापूर्वक सहने में पूरी तरह सक्षम है।

भुवनेश्वर में आयोजित एक निवेशक जागरूकता सेमिनार में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे ने स्पष्ट किया है कि सितंबर 2024 से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) की निकासी जरूर देखी गई है, लेकिन घरेलू निवेशकों ने बाजार में अपना मजबूत भरोसा कायम रखा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जैसे ही यह वैश्विक संकट टलेगा, भारतीय बाजार फिर से अपनी सामान्य वृद्धि की राह पर लौट आएगा।

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