Foreign Stocks Tax: विदेशी शेयरों से कमाई पर टैक्स चुकाना है जरूरी, वरना खानी पड़ सकती है जेल की हवा
भारतीयों में विदेशी शेयरों में निवेश का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इस कमाई पर टैक्स चुकाना अनिवार्य है। शेयर को 24 महीने से ज्यादा रखने पर 12.5% (LTCG) और उससे कम समय रखने पर आय स्लैब के अनुसार (STCG) टैक्स लगता है। विदेशी संपत्ति की जानकारी छुपाने पर 10 लाख रुपये का जुर्माना और 7 साल तक की जेल हो सकती है। अगर आपने भी विदेशी शेयर लिए है या भविष्य लेने हैं, तो पूरे मामले को विस्तार से समझिए...
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विस्तार
आजकल भारतीयों में अमेरिकी शेयर बाजार और विदेशी कंपनियों में पैसा लगाने का बहुत ज्यादा क्रेज देखने को मिल रहा है। लोग सोचते हैं कि सात समंदर पार की कंपनियों में पैसा लगाकर वे आसानी से अमीर बन जाएंगे। लेकिन हमेशा याद रखिए, आपकी इस विदेशी कमाई पर भारत के आयकर विभाग की नजर बहुत पैनी है। विदेशी बाजारों से मोटा पैसा कमाना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन इस कमाई पर सरकार को सही समय पर टैक्स देना बहुत जरूरी है।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप विदेशी कंपनियों के शेयर या ईटीएफ खरीदकर मुनाफा कमा रहे हैं, तो सिर्फ डॉलर बटोरना ही काफी नहीं है। आपको अपनी इस विदेशी कमाई की पूरी जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी और उस पर सही तरीके से टैक्स भी चुकाना होगा। आपकी एक छोटी-सी लापरवाही या जानकारी छिपाने की गलती आपको बहुत भारी मुसीबत में डाल सकती है।
विदेशी शेयरों पर टैक्स का गणित कैसे काम करता है?
विदेशी शेयरों पर टैक्स इस बात पर पूरी तरह निर्भर करता है कि आपने उन शेयरों को खरीदकर कितने समय तक अपने पास रखा है। अगर आप किसी विदेशी कंपनी के शेयर को 24 महीने (दो साल) से ज्यादा समय तक अपने पास रखकर बेचते हैं, तो इसे लंबी अवधि का मुनाफा यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। इस मुनाफे पर आपको 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स देना होगा और इसके साथ लागू सरचार्ज और उपकर भी चुकाना होगा।
वहीं दूसरी तरफ, अगर आप विदेशी शेयर खरीदने के 24 महीने के भीतर ही उसे बेचकर मुनाफा कमा लेते हैं, तो यह कम अवधि का मुनाफा यानी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कहलाता है। इस स्थिति में, शेयरों से होने वाली यह कमाई आपकी कुल सालाना आमदनी में सीधे तौर पर जोड़ दी जाएगी। इसके बाद आपकी कुल आमदनी जिस भी टैक्स स्लैब (कर की श्रेणी) में आएगी, उसी के हिसाब से आपको सरकार को टैक्स चुकाना होगा।
| मुनाफे की अवधि का प्रकार | कितने समय तक शेयर अपने पास रखा | टैक्स का नियम और तय की गई दर |
| लंबी अवधि का मुनाफा (LTCG) | 24 महीने से ज्यादा समय तक | 12.5% टैक्स (इंडेक्सेशन के बिना) |
| कम अवधि का मुनाफा (STCG) | 24 महीने के भीतर बेच दिया | आपकी कुल आमदनी में जुड़ेगा (स्लैब के अनुसार टैक्स) |
ऊपर दी गई इस टेबल से यह समझना बहुत आसान हो जाता है कि सरकार विदेशी शेयरों के मुनाफे पर कैसे टैक्स लगाती है। अगर आप दो साल बाद शेयर बेचते हैं, तो आपको सीधा साढ़े बारह प्रतिशत टैक्स देना होगा। लेकिन अगर आप दो साल से पहले ही शेयर बेच देते हैं, तो वह पैसा आपकी कुल कमाई में जुड़ जाएगा और आपको अपनी आमदनी की स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा। अब इसमें इंडेक्सेशन जैसी कोई विशेष छूट भी नहीं मिलती है।
आयकर विभाग से जानकारी छुपाने का क्या होगा डरावना अंजाम?
अगर आप अपनी विदेशी संपत्ति और उससे होने वाली कमाई की जानकारी आयकर विभाग को नहीं देते हैं या जानबूझकर गलत जानकारी देते हैं, तो इसे बहुत बड़ी टैक्स चोरी माना जाता है। सरकार और आयकर विभाग इस मामले में बहुत सख्त रुख अपनाते हैं। ऐसा करने के नतीजे बहुत डरावने हो सकते हैं और आपको इसके लिए बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
विदेशी संपत्तियों का सही खुलासा न करने पर आयकर विभाग आप पर हर साल 10 लाख रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगा सकता है। इतना ही नहीं, जानकारी छुपाने को सरकार एक बहुत ही गंभीर अपराध मानती है। अगर आप इस मामले में दोषी पाए जाते हैं, तो आपको सात साल तक की लंबी जेल भी हो सकती है। इसके अलावा, आपको दोहरे कराधान बचाव समझौते (DTAA) के तहत मिलने वाली राहत का दावा करने का अधिकार भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
क्या तकनीक के इस दौर में टैक्स चोरी करके बचना मुमकिन है?
आज के समय में तकनीक बहुत आगे बढ़ चुकी है और भारत सरकार के पास डाटा साझा करने के कई बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते भी हैं। इन वजहों से आयकर विभाग के पास आपकी हर छोटी-बड़ी विदेशी वित्तीय गतिविधि की पूरी जानकारी मौजूद है। इसलिए, विभाग से अपनी विदेशी कमाई छुपाना अब लगभग नामुमकिन हो गया है। अगर विभाग को जरा भी शक होता है, तो वह आपको तुरंत कानूनी नोटिस भेज सकता है।
अगर जांच के दौरान आपकी धोखाधड़ी या टैक्स चोरी साबित हो गई, तो आप पर सख्त कानूनी कार्रवाई होना बिल्कुल तय है। इतना ही नहीं, भारत में काम करने वाले एक्सचेंज आपकी संपत्ति और आपके बैंक खाते को पूरी तरह से फ्रीज (रोक) भी कर सकते हैं। इसलिए यह याद रखें कि विदेशी बाजारों में निवेश करना रोमांचक है, लेकिन टैक्स चोरी का जोखिम आपके पूरे पोर्टफोलियो को बर्बाद कर सकता है। विदेशी कमाई पर टैक्स चुकाना ही आपकी वित्तीय सेहत के लिए सबसे समझदारी भरा कदम है।