सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   UN Global Forest Goals Report 2026 forest dwellers poverty UNFF 21st session middlemen forest products

Forest Economy: पांच ट्रिलियन डॉलर का जंगल व्यापार, अमीर हो रहे कारोबारी; फिर भी दाने-दाने को मोहताज वनवासी

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 18 May 2026 08:26 AM IST
विज्ञापन
सार

दुनिया भर के जंगलों से 1.5 ट्रिलियन डॉलर की कमाई होती है, लेकिन इसका फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की 'ग्लोबल फॉरेस्ट गोल्स रिपोर्ट 2026' के अनुसार, वन उत्पाद बेचने वाले असली वनवासी आज भी गरीबी में हैं। भारत में 27 करोड़ लोग जंगलों पर निर्भर हैं।

UN Global Forest Goals Report 2026 forest dwellers poverty UNFF 21st session middlemen forest products
असली मुनाफे से कोसों दूर हैं जंगल के असली हकदार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार

दुनिया भर के जंगलों से हर साल अरबों रुपये की भारी भरकम कमाई होती है, लेकिन इसका फायदा उन गरीब वनवासियों को नहीं मिल रहा है जो इन जंगलों पर पूरी तरह निर्भर हैं। लकड़ी, शहद और जड़ी-बूटियों जैसे उत्पादों से होने वाली असली कमाई पर बिचौलियों और बड़े कारोबारियों ने कब्जा कर लिया है। इसके कारण जंगल के असली हकदार आज भी घोर गरीबी के जाल में फंसे हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट ने इस बड़े और कड़वे सच को दुनिया के सामने उजागर किया है।



जंगलों से हर साल करीब 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार होता है। संयुक्त राष्ट्र की 'ग्लोबल फॉरेस्ट गोल्स रिपोर्ट 2026' के अनुसार, जंगल के पास रहने वाले लोग अपना कच्चा माल बहुत ही कम दाम में बेचने को मजबूर हैं। बाजार तक सीधे न पहुंच पाने और खराब रास्तों की वजह से सारा मोटा मुनाफा बीच वाले लोग यानी बिचौलिए खा जाते हैं। यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र वन मंच (यूएनएफएफ) की 21वीं बैठक में पेश की गई है, जो बताती है कि गरीब वनवासियों की हालत सुधारने के लक्ष्य बहुत धीमी गति से चल रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- डर और लालच पर जीत दिलाते हैं क्वांट फंड: एआई करेगा आपके पैसों का निवेश; आसान भाषा में समझिए यह नया तरीका


बिचौलिए कैसे हड़प रहे हैं वनवासियों की मेहनत की कमाई?
जंगलों से मिलने वाले कीमती उत्पाद जैसे बांस, लाख और तेंदूपत्ता करोड़ों लोगों के रोजगार का सबसे बड़ा साधन हैं। लेकिन इन गरीब लोगों के पास अपने माल को बड़े बाजार तक ले जाने की कोई सुविधा नहीं है। गांव में अच्छी सड़कें नहीं हैं और माल को सुरक्षित रखने के लिए कोई जगह नहीं होती है। इसका फायदा उठाकर बिचौलिए उनके माल को औने-पौने दाम पर खरीद लेते हैं।

वनवासियों की परेशानी इसका सीधा असर
बाजार तक सीधी पहुंच न होना मजबूरी में बिचौलियों को सस्ते में माल बेचना पड़ता है।
खराब सड़कें और वाहन की कमी बड़े शहरों के बाजार तक कीमती माल नहीं पहुंच पाता है।
सामान बनाने की मशीनें न होना कच्चा माल बिना साफ किए या बिना बनाए बेचना पड़ता है।


संयुक्त राष्ट्र के 2030 के लक्ष्य आखिर क्यों हो रहे हैं फेल?
साल 2017 में 'यूएन स्ट्रैटेजिक प्लान फॉर फॉरेस्ट्स 2017-2030' के तहत दुनिया भर के लिए छह बड़े लक्ष्य तय किए गए थे। इनमें से एक सबसे खास लक्ष्य था जंगलों पर निर्भर लोगों को 2030 तक अत्यधिक गरीबी से पूरी तरह बाहर निकालना। लेकिन अब जो ताजा रिपोर्ट सामने आई है, वह बहुत ही चिंताजनक है। दुनिया इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बहुत ही धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रही है और करोड़ों परिवार आज भी गरीबी में कैद हैं।

भारत के 27 करोड़ वनवासियों के सामने क्या हैं जमीनी चुनौतियां?
भारत में लगभग 27 करोड़ लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए सीधे तौर पर जंगलों पर ही निर्भर हैं। सरकार ने इनकी मदद के लिए 'वन धन विकास केंद्र', 'न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)' और 'स्वयं सहायता समूह' जैसी कई अच्छी योजनाएं चलाई हैं ताकि उन्हें बाजार से जोड़ा जा सके। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जमीनी हकीकत आज भी ज्यादा नहीं बदली है। इन सरकारी कोशिशों के बाद भी भारत के वनवासी बिचौलियों के जाल से नहीं निकल पाए हैं और असली मुनाफा आज भी बड़े नेटवर्क तक ही पहुंच रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed