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डर और लालच पर जीत दिलाते हैं क्वांट फंड: एआई करेगा आपके पैसों का निवेश; आसान भाषा में समझिए यह नया तरीका

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 18 May 2026 08:01 AM IST
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सार

क्वांट फंड में निवेश के फैसले इंसान नहीं बल्कि कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लेते हैं। यह फंड शेयर बाजार में इंसानी भावनाओं यानी डर और लालच को दूर कर डेटा के आधार पर काम करता है। भारत में एसबीआई, निप्पॉन जैसे फंड्स मौजूद हैं, लेकिन ये अभी शुरुआती दौर में हैं। क्वांट फंड लंबी अवधि के लिए सही हैं, लेकिन इन्हें पोर्टफोलियो का सिर्फ 10-15% हिस्सा ही बनाना चाहिए।

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निवेश का नया तरीका - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

साल 1997 की वह सुबह शायद ही कोई भूल सकता है, जब दुनिया के सबसे महान शतरंज खिलाड़ी गैरी कास्पारोव को आईबीएम के सुपर कंप्यूटर 'डीप ब्लू' ने हरा दिया था। यह इतिहास में पहली बार था, जब दुनिया ने यह माना कि जहां एक इंसान के सोचने की सीमा खत्म होती है, ठीक वहीं से डेटा और एल्गोरिदम की असली ताकत शुरू होती है। आज निवेश की दुनिया में भी बिल्कुल ऐसा ही समय आ गया है। अब आपकी मेहनत की कमाई को बढ़ाने की जिम्मेदारी किसी फंड मैनेजर की सोच या उसकी अंतरात्मा पर नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से क्वांट फंड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बेजोड़ गणित पर टिक गई है।



शेयर बाजार में हम अक्सर दो सबसे बड़ी भावनाओं के कारण अपना पैसा गंवाते हैं, और वे हैं डर और लालच। जब बाजार बहुत तेजी से ऊपर भागता है, तो हम लालच में आकर महंगे दाम पर शेयर खरीद लेते हैं, और जब बाजार नीचे गिरता है, तो हम डर के मारे अपने शेयर सस्ते में बेच देते हैं। क्वांट फंड इसी जगह पर पूरी बाजी पलट देते हैं। यह एक ऐसा निवेश का तरीका है, जहां किसी फंड मैनेजर की पसंद या नापसंद काम नहीं आती है, बल्कि एआई और कंप्यूटर खुद यह तय करते हैं कि बाजार में कब क्या खरीदना है और कब क्या बेचना है।
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क्वांट फंड का विज्ञान क्या है और यह कैसे काम करता है?
क्वांट फंड पूरी तरह से गणित के मॉडल और डेटा एनालिसिस पर काम करते हैं। इसमें शेयर चुनने के लिए कुछ नियम पहले से ही तय कर दिए जाते हैं, जैसे कि शेयर की वैल्यू क्या है, उसकी क्वालिटी कैसी है, उसमें कितनी तेजी है या उसमें उतार-चढ़ाव कितना कम है। इस रणनीति की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि इसमें इंसान की भावनाएं यानी डर और लालच बिल्कुल भी बीच में नहीं आते हैं। एक फंड मैनेजर का काम सिर्फ सही डेटा इकट्ठा करना और एक अच्छा कंप्यूटर मॉडल बनाना होता है, उसके बाद सारा काम मशीन अपने आप करती है। ऐतिहासिक और नए डेटा का इस्तेमाल करके मॉडल बनाया जाता है और फिर एआई के जरिए समय-समय पर शेयरों में बदलाव किया जाता है।


भारत के शेयर बाजार में क्वांट फंड की वर्तमान स्थिति क्या है?
भारत में क्वांट फंड मौजूद तो हैं, लेकिन अभी इनकी संख्या बाजार में बहुत कम है। हमारे देश के आम निवेशकों ने अभी तक इन फंडों में बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। वर्तमान में एसबीआई, निप्पॉन, आईसीआईसीआई और कुछ अन्य एएमसी (म्यूचुअल फंड कंपनियों) के पास क्वांट रणनीतियों पर आधारित म्यूचुअल फंड योजनाएं चल रही हैं। इन फंडों की निवेश की रणनीति अलग-अलग होती है, जो फ्लेक्सी कैप, मल्टी कैप या कुछ खास थीम पर आधारित होती है। अगर हम इन फंडों के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो शुरुआत में इनका रिटर्न काफी शानदार रहा है, लेकिन हाल के कुछ वर्षों में इन फंडों को बाजार में थोड़ा संघर्ष भी करना पड़ा है।

आखिर किस स्थिति में क्वांट फंड की रणनीति फेल हो सकती है?
क्वांट फंड की पूरी रणनीति बीते हुए कल के इतिहास पर टिकी होती है, लेकिन शेयर बाजार में यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है कि इतिहास हमेशा खुद को दोहराए। युद्ध या महामारी जैसी अचानक आने वाली घटनाओं को कंप्यूटर का मॉडल पहले से नहीं समझ पाता है। अगर बाजार का रुख अचानक से बदल जाए (जैसा कि हाल ही में युद्ध के हालात में हुआ था), तो कंप्यूटर के एल्गोरिदम को संभलने और नई स्थिति समझने में थोड़ा वक्त लगता है, जिससे निवेशक को घाटा हो सकता है। इसके अलावा, मशीन द्वारा बार-बार शेयर बदलने से टैक्स और ब्रोकरेज का खर्च बहुत बढ़ जाता है, जो आपके मुनाफे को धीरे-धीरे कम कर सकता है।

टॉप क्वांट फंड्स का पिछले तीन साल का प्रदर्शन कैसा रहा है?
आइए अब देखते हैं कि देश के प्रमुख क्वांट फंड्स ने पिछले तीन वर्षों में अपने निवेशकों को कैसा रिटर्न दिया है। इसे नीचे दी गई टेबल से आसानी से समझा जा सकता है:

फंड स्कीम का नाम सालाना रिटर्न (प्रतिशत में)
360 One Quant Fund 21.10%
Nippon India Quant Fund 17.14%
ICICI Pru Quant Fund 14.34%
Tata Quant Fund 14.04%
Axis Quant Fund 11.59%

इस टेबल को देखकर हम साफ समझ सकते हैं कि 360 वन क्वांट फंड ने सबसे ज्यादा 21.10 प्रतिशत का सालाना रिटर्न दिया है। इसके बाद निप्पॉन और आईसीआईसीआई के फंड आते हैं। इसका मतलब है कि मशीन ने भी लोगों को बाजार से एक अच्छा और बेहतरीन रिटर्न कमाकर दिया है।

देश के टॉप क्वांट फंड्स का एयूएम (AUM) कितना है?
एयूएम (AUM) का मतलब होता है कि कोई फंड लोगों का कुल कितना पैसा मैनेज कर रहा है। जिस फंड का एयूएम जितना ज्यादा होता है, लोगों का उस पर उतना ही भरोसा होता है:

टॉप फंड का नाम एयूएम (करोड़ रुपये में)
SBI Quant Fund 3051
ABSL Quant Fund 2026
UTI Quant Fund 1611
Axis Quant Fund 864
Kotak Quant Fund 505

इस टेबल से एकदम साफ है कि एसबीआई क्वांट फंड में लोगों ने सबसे ज्यादा 3051 करोड़ रुपये लगाए हैं। उसके बाद आदित्य बिड़ला (ABSL) और यूटीआई के क्वांट फंड का नंबर आता है। ये आंकड़े बताते हैं कि देश के बड़े और भरोसेमंद फंड हाउस पर लोग पैसा लगाने में आगे आ रहे हैं।

क्या आपको क्वांट फंड में अपना पैसा निवेश करना चाहिए?
यह सवाल हर निवेशक के मन में आता है। ऐसे निवेशक जो पहले से शेयर बाजार में पैसा लगा रहे हैं और अब कुछ अलग और नई रणनीतियों के साथ अपने निवेश को बांटना चाहते हैं, उनके लिए यह फंड काफी आकर्षक हो सकता है। लेकिन क्वांट फंड हर किसी के लिए बिल्कुल नहीं हैं। एक आम या अनपढ़ निवेशक के लिए मशीन के इस जटिल गणित को समझना बहुत टेढ़ी खीर है। अगर आप कम समय के लिए पैसा लगाना चाहते हैं या आप बिल्कुल भी जोखिम नहीं लेना चाहते, तो क्वांट फंड आपके लिए नहीं है। इसमें सिर्फ वही लोग निवेश करें, जो जोखिम ले सकते हैं और अपना पैसा 5 से 7 साल तक रोके रख सकते हैं।

अपने पोर्टफोलियो में क्वांट फंड्स को कितनी जगह देनी चाहिए?
अगर आप निवेश करने का मन बना चुके हैं, तो क्वांट फंड्स को कभी भी अपने मुख्य पोर्टफोलियो का आधार न बनाएं। इसे हमेशा एक सैटेलाइट पोर्टफोलियो यानी सिर्फ विविधता (अलग विकल्प) लाने के लिए रखें। समझदारी इसी में है कि अपने कुल शेयर बाजार के निवेश का सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा ही क्वांट फंड्स में लगाएं। भारत में क्वांट फंड अभी भी अपने शुरुआती दौर में हैं। आने वाले समय में एआई के और ज्यादा बढ़ने से इसकी लोकप्रियता जरूर बढ़ेगी, लेकिन निवेश करने से पहले खुद से यह जरूर पूछ लें कि क्या आप बाजार की उस अचानक होने वाली हलचल को सहने के लिए तैयार हैं, जो एक कंप्यूटर प्रोग्राम पैदा कर सकता है।

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