सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   SBI Report: Rs 3 Fuel Price Hike to Relieve OMCs, Direct Fiscal Impact Ruled Out

SBI Research: पेट्रोल-डीजल के दाम में ₹3 की बढ़ोतरी का राजकोषीय स्थिति पर सीधा असर नहीं, रिपोर्ट में दावा

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 18 May 2026 12:35 PM IST
विज्ञापन
सार

एसबीआई की हालिया रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तीन रुपये की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी, जबकि राजकोषीय स्थिति पर इसका कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। अर्थव्यवस्था और महंगाई पर इस फैसले के असर की पूरी जानकारी के लिए अभी विस्तृत खबर पढ़ें!

SBI Report: Rs 3 Fuel Price Hike to Relieve OMCs, Direct Fiscal Impact Ruled Out
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमतों के बीच तेल विपणन कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान को कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की रिसर्च रिपोर्ट इकोरैप के अनुसार, भले ही इस बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई (सीपीआई) में फौरी तौर पर उछाल देखने को मिले, लेकिन देश की राजकोषीय स्थिति पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। 

तेल कंपनियों को मिली राहत

केंद्रीय मंत्री के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि खुदरा कीमतें लंबे समय से स्थिर रहने के कारण तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को रोजाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जो सालाना स्तर पर करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये बैठता है। पेट्रोल-डीजल की मौजूदा कीमतों में 3 रुपये की वृद्धि से इन कंपनियों को अंडर-रिकवरी में 52,700 करोड़ रुपये की अहम राहत मिलेगी। यह राशि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में OMCs के कुल अनुमानित नुकसान का 15 फीसदी हिस्सा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

महंगाई और खपत पर तात्कालिक प्रभाव

महंगाई दर का संशोधित अनुमान: ईंधन के दाम बढ़ने से मई-जून 2026 में सीपीआई (CPI) महंगाई दर पर 15-20 बेसिस पॉइंट्स (bps) का तात्कालिक असर देखने को मिल सकता है। इसके चलते एसबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने महंगाई दर के पूर्वानुमान को संशोधित कर 4.7% कर दिया है। 

विज्ञापन
Trending Videos

खपत का ऐतिहासिक ट्रेंड: ऐतिहासिक आंकड़े दर्शाते हैं कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के ठीक बाद खपत में मामूली गिरावट आती है, लेकिन सालाना खपत के स्तर में कोई कमी दर्ज नहीं होती है और मांग तेजी से अपनी पुरानी स्थिति में लौट आती है।

एक्साइज ड्यूटी का गणित और राजकोषीय जोखिम

एसबीआई की रिपोर्ट ने टैक्स संरचना में किसी भी संभावित बदलाव के राजकोषीय परिणामों का भी विश्लेषण किया है। 

  • वर्तमान में 15 प्रतिशत ओएमसी नुकसान की भरपाई 3 रुपये की खुदरा मूल्य वृद्धि से हो रही है, जबकि उत्पाद शुल्क को शून्य किए जाने की स्थिति में 53 प्रतिशत नुकसान को कवर किया जा सकता है। 
  • हालांकि, यदि सरकार पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क को उनके मौजूदा स्तर (क्रमशः 11.9% और 7.8%) से घटाकर शून्य कर देती है, तो सरकारी राजस्व में भारी गिरावट आएगी। इससे सरकार को 1.9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा, जो OMCs के मुनाफे में तब्दील हो जाएगा।
  • चालू वित्त वर्ष में उत्पाद शुल्क में कटौती (मार्च में की गई 10 रुपये की ड्यूटी कटौती से हुए शुद्ध नुकसान सहित) से सरकार का कुल नुकसान पहले ही 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
  • यदि सरकार अपने खर्च में कटौती नहीं करती है, तो उत्पाद शुल्क को शून्य करने के इस कदम से देश का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 0.5% तक बढ़ सकता है।

राज्यों के राजस्व पर भी पड़ेगा असर

केंद्र सरकार के उत्पाद शुल्क घटाने का असर राज्यों के खजाने पर भी पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, यदि केंद्र अपना उत्पाद शुल्क शून्य कर देता है, तो राज्य सरकारों को कुल 0.8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा। हालांकि, कच्चे तेल की उच्च कीमतों के कारण राज्यों को 30,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ भी होगा। इस प्रकार उत्पाद शुल्क में कटौती का राज्यों के राजस्व पर कुल शुद्ध प्रभाव 50,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

कुल मिलाकर, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये का हालिया इजाफा तेल कंपनियों के वित्तीय संकट को टालने के लिए उठाया गया एक अहम कदम है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि केंद्र के पास एक्साइज ड्यूटी घटाने का विकल्प जरूर है, लेकिन यह राजकोषीय संतुलन और केंद्र-राज्य राजस्व संग्रह के मोर्चे पर भारी दबाव पैदा कर सकता है। फिलहाल, 3 रुपये की बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था के राजकोषीय मोर्चे पर कोई बड़ा जोखिम दिखाई नहीं दे रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed