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पेंशन अब म्यूचुअल फंड जितनी आसान: UPI से खुलेगा खाता, मिलेगा बुढ़ापे को डबल कवर
एस. रमन, चेयरमैन, पीएफआरडीए
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 11 May 2026 05:35 AM IST
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सार
पेंशन सिर्फ बचत नहीं, एक अनुशासन है। यह 40-50 साल की लंबी साझेदारी है। इसलिए अपनी वित्तीय योजना में म्यूचुअल फंड के साथ पेंशन को भी जरूर शामिल करें।
पेंशन प्रणाली के तहत एक नई पहल (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
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विस्तार
अब से ठीक 10 साल बाद यानी 2036 में भारत की तस्वीर बदल चुकी होगी। तब तक देश में बुजुर्गों की आबादी 20 करोड़ को पार कर जाएगी। साल 2011 की तुलना में यह दोगुनी होगी। परिवार छोटे हो रहे हैं और औसत उम्र बढ़ रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ आज की कमाई का नहीं, बल्कि उस वक्त की आर्थिक गरिमा का है, जब हाथ-पैर काम करना बंद कर देंगे। पेंशन म्यूचुअल फंड नहीं है। अक्सर हम इन दोनों को एक ही तराजू में तौलते हैं लेकिन पेंशन का मकसद एटीएम से पैसा निकालना नहीं, बल्कि एक सुरक्षित भविष्य के लिए लोहे की दीवार खड़ी करना है। एनपीएस को आम आदमी के लिए सरल व सुलभ बनाने के लिए पीएफआरडीए पेंशन क्षेत्र में बड़े बदलाव करने जा रहा है.
एनपीएस संचय बनेगा सरल निवेश विकल्प
एनपीएस संचय उन निवेशकों के लिए डिजाइन किया गया है जो फंड मैनेजर या एसेट एलोकेशन (इक्विटी, सरकारी बॉन्ड या कॉरपोरेट बॉन्ड) चुनने की जटिलता में नहीं पड़ना चाहते। यह योजना असंगठित क्षेत्र के लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसमें निवेश का एक निश्चित ढांचा होगा जैसा कि 2004 से सरकारी कर्मचारियों के लिए चल रहा है। यह स्कीम उन लोगों के लिए है जिन्हें एसेट एलोकेशन की समझ नहीं है लेकिन वे एक सुरक्षित उत्पाद चाहते हैं, जो अच्छा मार्केट रिटर्न दे सके। पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार इस ढांचे ने लगभग 9.5% का औसत वार्षिक रिटर्न दिया है, जो कई अन्य सरकारी बचत योजनाओं और बैंक एफडी से काफी अधिक है।
यूपीआई से खुलेगा खाता
पेंशन को उतना ही सरल बनाने की कोशिश की जा रही है, जितना सरल एक बैंक खाता खोलना या यूपीआई पेमेंट करना है। इसके लिए अगले 30 दिनों के भीतर दो बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च होने की उम्मीद है। भीम इंटरफेस पर यूपीआई के माध्यम से आप मात्र दो क्लिक में अपना एनपीएस खाता खोल सकेंगे। यदि आपका किसी बैंक (जैसे एसबीआई) में पहले से बचत खाता है, तो यूपीआई एप आपके बैंक के माध्यम से ही आपकी केवाईसी जानकारी प्राप्त कर लेगा। आपको अलग से कागजी कार्रवाई करने की जरूरत नहीं होगी। खाता खुलने के बाद आप यूपीआई के जरिये कभी भी और कितनी भी बार आसानी से पैसा जमा कर पाएंगे।
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स्टार एनपीएस से बढ़ेगी पहुंच
यह प्लेटफॉर्म बीएसई स्टार के साथ मिलकर बनाया गया है। इसके माध्यम से सभी गैर-बैंक डिस्ट्रीब्यूटर्स और यहां तक कि ग्रामीण स्तर पर काम करने वाली प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को भी पेंशन एजेंट बनाया जा सकेगा। इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ-साथ सुदूर गांवों तक एनपीएस की पहुंच आसान हो जाएगी।
यह भी पढ़ें: जीवन की तरह संपत्ति का भी बीमा: आपदाओं से मेहनत की कमाई बचाने के लिए क्यों जरूरी है होम इंश्योरेंस? जानिए
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
वर्तमान में म्यूचुअल फंड में कमीशन (ट्रेल कमीशन) लगभग 1.5% के करीब है, जबकि एनपीएस में यह बहुत कम है। डिजिटल वितरण से न केवल लागत कम होगी, बल्कि उन 50 करोड़ लोगों तक पहुंचना भी मुमकिन होगा, जो वर्तमान में किसी भी पेंशन दायरे से बाहर हैं।
पेंशन + स्वास्थ्य: बुढ़ापे का डबल कवर
पेंशन सेक्टर का सबसे क्रांतिकारी बदलाव 'पेंशन-स्वास्थ्य खाता होने वाला है। एक 'प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट' पर काम चल रहा है। इसमें आपके पेंशन फंड का एक हिस्सा स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होगा। यह एक टॉप-अप इंश्योरेंस की तरह काम करेगा। अस्पताल के खर्च का पहला हिस्सा आपके स्वास्थ्य खाते से जाएगा और बाकी का 5 लाख तक का कवर इंश्योरेंस कंपनी देगी। इसका प्रीमियम बहुत कम होगा क्योंकि यह एक ग्रुप पॉलिसी की तरह काम करेगा।
एनपीएस अब पहले से कहीं ज्यादा लचीला है
पहले 60% पैसा निकाल सकते थे और 40% की एन्युटी (पेंशन) लेना अनिवार्य था। अब इसे बदलकर 80-20 कर दिया गया है। यानी अब आप मैच्योरिटी पर अपनी जमा राशि का बड़ा हिस्सा अपने पास रख सकते हैं। यदि आपका कुल कॉर्पस 5 लाख रुपये तक है, तो आप इसे कभी भी निकाल सकते हैं। 15 साल के लॉक-इन का डर अब खत्म हो गया है। आप 75 साल की उम्र तक अपनी एन्युटी को टाल सकते हैं, तब तक आपका पैसा बाजार के रिटर्न के साथ बढ़ता रहेगा।
एनपीएस संचय बनेगा सरल निवेश विकल्प
एनपीएस संचय उन निवेशकों के लिए डिजाइन किया गया है जो फंड मैनेजर या एसेट एलोकेशन (इक्विटी, सरकारी बॉन्ड या कॉरपोरेट बॉन्ड) चुनने की जटिलता में नहीं पड़ना चाहते। यह योजना असंगठित क्षेत्र के लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसमें निवेश का एक निश्चित ढांचा होगा जैसा कि 2004 से सरकारी कर्मचारियों के लिए चल रहा है। यह स्कीम उन लोगों के लिए है जिन्हें एसेट एलोकेशन की समझ नहीं है लेकिन वे एक सुरक्षित उत्पाद चाहते हैं, जो अच्छा मार्केट रिटर्न दे सके। पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार इस ढांचे ने लगभग 9.5% का औसत वार्षिक रिटर्न दिया है, जो कई अन्य सरकारी बचत योजनाओं और बैंक एफडी से काफी अधिक है।
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यूपीआई से खुलेगा खाता
पेंशन को उतना ही सरल बनाने की कोशिश की जा रही है, जितना सरल एक बैंक खाता खोलना या यूपीआई पेमेंट करना है। इसके लिए अगले 30 दिनों के भीतर दो बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च होने की उम्मीद है। भीम इंटरफेस पर यूपीआई के माध्यम से आप मात्र दो क्लिक में अपना एनपीएस खाता खोल सकेंगे। यदि आपका किसी बैंक (जैसे एसबीआई) में पहले से बचत खाता है, तो यूपीआई एप आपके बैंक के माध्यम से ही आपकी केवाईसी जानकारी प्राप्त कर लेगा। आपको अलग से कागजी कार्रवाई करने की जरूरत नहीं होगी। खाता खुलने के बाद आप यूपीआई के जरिये कभी भी और कितनी भी बार आसानी से पैसा जमा कर पाएंगे।
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यह प्लेटफॉर्म बीएसई स्टार के साथ मिलकर बनाया गया है। इसके माध्यम से सभी गैर-बैंक डिस्ट्रीब्यूटर्स और यहां तक कि ग्रामीण स्तर पर काम करने वाली प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को भी पेंशन एजेंट बनाया जा सकेगा। इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ-साथ सुदूर गांवों तक एनपीएस की पहुंच आसान हो जाएगी।
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यह क्यों महत्वपूर्ण है?
वर्तमान में म्यूचुअल फंड में कमीशन (ट्रेल कमीशन) लगभग 1.5% के करीब है, जबकि एनपीएस में यह बहुत कम है। डिजिटल वितरण से न केवल लागत कम होगी, बल्कि उन 50 करोड़ लोगों तक पहुंचना भी मुमकिन होगा, जो वर्तमान में किसी भी पेंशन दायरे से बाहर हैं।
पेंशन + स्वास्थ्य: बुढ़ापे का डबल कवर
पेंशन सेक्टर का सबसे क्रांतिकारी बदलाव 'पेंशन-स्वास्थ्य खाता होने वाला है। एक 'प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट' पर काम चल रहा है। इसमें आपके पेंशन फंड का एक हिस्सा स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होगा। यह एक टॉप-अप इंश्योरेंस की तरह काम करेगा। अस्पताल के खर्च का पहला हिस्सा आपके स्वास्थ्य खाते से जाएगा और बाकी का 5 लाख तक का कवर इंश्योरेंस कंपनी देगी। इसका प्रीमियम बहुत कम होगा क्योंकि यह एक ग्रुप पॉलिसी की तरह काम करेगा।
एनपीएस अब पहले से कहीं ज्यादा लचीला है
पहले 60% पैसा निकाल सकते थे और 40% की एन्युटी (पेंशन) लेना अनिवार्य था। अब इसे बदलकर 80-20 कर दिया गया है। यानी अब आप मैच्योरिटी पर अपनी जमा राशि का बड़ा हिस्सा अपने पास रख सकते हैं। यदि आपका कुल कॉर्पस 5 लाख रुपये तक है, तो आप इसे कभी भी निकाल सकते हैं। 15 साल के लॉक-इन का डर अब खत्म हो गया है। आप 75 साल की उम्र तक अपनी एन्युटी को टाल सकते हैं, तब तक आपका पैसा बाजार के रिटर्न के साथ बढ़ता रहेगा।
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