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CUET से ग्लोबल यूनिवर्सिटीज तक: भारतीय छात्रों के लिए बदलते शिक्षा अवसर

नई दिल्ली Published by: Anil Vaishya Updated Fri, 20 Feb 2026 05:41 PM IST
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सीयूईटी - फोटो : amarujala.com
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भारतीय शिक्षा प्रणाली पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदल रही है। पहले जहां छात्रों के लिए मुख्य लक्ष्य केवल भारत के प्रतिष्ठित कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाना था, वहीं अब शिक्षा का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक विस्तृत हो चुका है। आज के छात्र केवल एक परीक्षा या एक डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे अपने करियर को वैश्विक अवसरों से जोड़कर देख रहे हैं।

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इस परिवर्तन का एक बड़ा उदाहरण है CUET (Common University Entrance Test), जिसने भारत में उच्च शिक्षा प्रवेश प्रक्रिया को अधिक संरचित बनाया है। वहीं दूसरी ओर, विदेशों में पढ़ाई की बढ़ती रुचि ने भारतीय छात्रों के सामने नई संभावनाएँ खोल दी हैं।
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CUET: भारत में उच्च शिक्षा का नया मार्ग
CUET के लागू होने के बाद से छात्रों के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालयों और कई अन्य संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी हो गई है। यह परीक्षा छात्रों को एक समान मंच प्रदान करती है, जिससे वे देशभर के शीर्ष संस्थानों में अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि CUET ने छात्रों को एक मजबूत अकादमिक आधार तैयार करने के लिए प्रेरित किया है। इसी के साथ अब छात्र केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आगे की शिक्षा और करियर की रणनीति भी बनाने लगे हैं।

वैश्विक शिक्षा की ओर बढ़ता भारत
आज भारतीय छात्र तेजी से ग्लोबल यूनिवर्सिटीज की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसके पीछे कई कारण हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा गुणवत्ता
  • वैश्विक करियर अवसर
  • मल्टीकल्चरल अनुभव
  • रिसर्च और इनोवेशन आधारित पाठ्यक्रम

यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और एशिया के कई देश भारतीय छात्रों के लिए लोकप्रिय बन चुके हैं।

Lucknow स्थित CampusKey Education जैसी संस्थाएं बताती हैं कि पिछले कुछ वर्षों में विदेश अध्ययन से जुड़े परामर्श की मांग तेजी से बढ़ी है। छात्र अब 12वीं के बाद ही नहीं, बल्कि CUET की तैयारी के साथ-साथ विदेश विकल्पों को भी समझने लगे हैं।

इंटीग्रेटेड तैयारी: भारत और विदेश दोनों के लिए
एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी है कि छात्र अब दो अलग-अलग रास्तों में नहीं सोचते। वे चाहते हैं कि उन्हें भारत में भी अच्छे विकल्प मिलें और विदेश में भी।

CampusKey Education का मॉडल इसी दिशा में काम करता है, जहाँ छात्र को CUET जैसी परीक्षाओं के लिए अकादमिक तैयारी के साथ-साथ Study Abroad के लिए प्रोफाइल बिल्डिंग, टेस्ट तैयारी (IELTS, SAT, GRE) और काउंसलिंग सपोर्ट भी मिलता है। यह एक समग्र दृष्टिकोण है, जो छात्रों को भविष्य के लिए अधिक तैयार बनाता है।

काउंसलिंग और सही मार्गदर्शन की भूमिका
विदेश में पढ़ाई का सपना आकर्षक जरूर है, लेकिन इसमें सही निर्णय लेना सबसे जरूरी है। कोर्स चयन, देश चयन, वीज़ा प्रक्रिया, स्कॉलरशिप, शिक्षा ऋण और प्री-डिपार्चर तैयारी जैसे कई चरण होते हैं।

CampusKey जैसी संस्थाएं इस प्रक्रिया में छात्रों को चरणबद्ध और पारदर्शी मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। उनके काउंसलर यह सुनिश्चित करते हैं कि छात्र केवल ट्रेंड के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी रुचि, क्षमता और करियर लक्ष्य के अनुसार सही विकल्प चुनें।

स्कॉलरशिप और फाइनेंशियल प्लानिंग
एक और बड़ा बदलाव यह है कि आज के छात्र और परिवार विदेश शिक्षा को लेकर वित्तीय रूप से अधिक जागरूक हो गए हैं। स्कॉलरशिप, एजुकेशन लोन और बजट प्लानिंग अब निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। CampusKey Education छात्रों को स्कॉलरशिप विंडोज़, SOP गाइडेंस और डॉक्युमेंटेशन में सहयोग देकर इस दिशा में मदद करता है।

भविष्य की दिशा
शिक्षा अब एक लोकल लक्ष्य नहीं, बल्कि वैश्विक पहचान बनाने का माध्यम बन चुकी है। 2026 और आगे के वर्षों में यह ट्रेंड और तेज होगा। सही तैयारी, सही मार्गदर्शन और नैतिक काउंसलिंग के साथ छात्र भारत और दुनिया दोनों में सफलता की राह बना सकते हैं। CampusKey Education जैसे प्लेटफॉर्म इस बदलते शिक्षा परिदृश्य में छात्रों को स्पष्टता, आत्मविश्वास और सही दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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