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Oil Crisis: होर्मुज खुलने के बाद भी जारी रहेगा तेल संकट, चार महीने में 1.15 अरब बैरल का हुआ नुकसान

Sat, 27 Jun 2026 05:54 AM IST
निर्मल कांत बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 27 Jun 2026 05:54 AM IST
सार

Oil Crisis: होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने के बावजूद वैश्विक तेल बाजार को तत्काल राहत नहीं मिलेगी, क्योंकि पिछले चार महीनों की आपूर्ति बाधा ने दुनिया के कच्चे तेल भंडार को गंभीर रूप से घटा दिया है। विशेषज्ञों ने क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-

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होर्मुज खुलने के बाद भी जारी रहेगा कीमतों पर दबाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट और अमेरिका-ईरान समझौते के बाद आखिरकार सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की उम्मीदें भले ही मजबूत हो रही हैं, लेकिन वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए यह राहत तात्कालिक है। पिछले लगभग चार महीनों से होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद रहने के कारण दुनिया की तेल आपूर्ति को ऐसा गहरा जख्म लगा है, जिसे भरने में महीनों नहीं, बल्कि सालभर से ज्यादा का समय लगेगा।
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विश्लेषकों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का साफ कहना है कि होर्मुज खुलने के बाद भी दुनिया भर के रणनीतिक और वाणिज्यिक तेल भंडार खाली ही रहेंगे, जिससे आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रहेगा।
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मांग पर पड़ेगा असर : कीमतों के इस ऊंचे स्तर का असर वैश्विक मांग पर भी दिखेगा। साल 2026 में वैश्विक तेल मांग में 2025 के मुकाबले 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन की गिरावट आने का अनुमान है। हालांकि, 2027 में व्यापार सामान्य होने पर मांग में दोबारा 2 से 2.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन के बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
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ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंचे दुनिया के तेल भंडार
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के ताजा आंकड़े बताते हैं कि युद्ध के दौरान मांग को पूरा करने के लिए सरकारों ने अपने आपातकालीन भंडारों को रिकॉर्ड गति से खाली किया है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक, विकसित देशों के समूह (ओईसीडी) का तेल भंडार गिरकर 1990 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। संकट की शुरुआत से अब तक इस बफर स्टॉक से 163 मिलियन बैरल तेल निकाला जा चुका है।

अमेरिकी ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका का आपातकालीन रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व गिरकर 340.3 मिलियन बैरल पर आ गया है, जो 1983 के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं ईआईए के मुताबिक, साल 2026 के अंत तक ओईसीडी देशों के पास केवल 50 दिनों की भावी मांग को पूरा करने का स्टॉक बचेगा, जो 2003 के बाद सबसे कम है।

एनालिटिक्स फर्म केप्लर और अन्य ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, फारस की खाड़ी से तेल का प्रवाह तुरंत युद्ध-पूर्व स्तर पर नहीं पहुंच पाएगा, जिसके तीन मुख्य कारण हैं:
  • बारूदी सुरंगें हटाने की चुनौती : युद्ध के दौरान जलमार्ग में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों को पूरी तरह साफ करने और नौवहन को सुरक्षित बनाने में कई हफ्तों का समय लगेगा।
  •  लॉजिस्टिक्स और टैंकरों की कमी : बंद के दौरान वैश्विक रूट से हटाए गए खाली तेल टैंकरों को वापस फारस की खाड़ी के क्षेत्र में लाने और उनके लिए बीमा बहाल करने में समय लगेगा।

बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान : ईरान, कुवैत व यूएई की कई ऑयल रिफाइनरियों और तेल प्रतिष्ठानों को युद्ध के दौरान भारी भौतिक नुकसान पहुंचा है, जिन्हें दोबारा पूरी क्षमता से शुरू करने में महीनों लगेंगे।


ये भी पढ़ें: कच्चे तेल में राहत से अर्थव्यवस्था को उम्मीद, कमजोर मानसून से महंगाई और ग्रामीण मांग पर खतरा

आगे क्या रहेगी कीमतों की दिशा?
यूएस एनर्जी इंफोर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक जब तक दुनिया के तेल भंडार दोबारा नहीं भर जाते, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। जैसे-जैसे होर्मुज से ट्रैफिक सामान्य होगा और मध्य पूर्व का बंद पड़ा उत्पादन धीरे-धीरे बाजार में लौटेगा, साल की चौथी तिमाही तक कीमतें घटने का अनुमान है। आईईए और ईआईए दोनों का अनुमान है कि साल 2027 की पहली तिमाही तक अधिकांश बंद उत्पादन पूरी तरह बहाल हो जाएगा। भंडार दोबारा भरने शुरू होंगे, जिससे साल 2027 में ब्रेंट क्रूड का औसत भाव गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ सकता है।
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