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Food Inflation: कमजोर मानसून से बिगड़ सकता है आम आदमी का बजट, इस साल 6 फीसदी रहेगी खाद्य महंगाई
Sat, 04 Jul 2026 06:57 AM IST
Devesh Tripathi
बोनस डेस्क, नई दिल्ली
बोनस डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 04 Jul 2026 06:57 AM IST
सार
केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मानसून के कारण चालू वित्त वर्ष में खाद्य महंगाई लगभग 6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वहीं, खुदरा महंगाई करीब 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जून में सामान्य से काफी कम वर्षा और जुलाई में भी औसत से कम बारिश की आशंका ने कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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खाद्य महंगाई
- फोटो : Agency
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विस्तार
इस साल आम आदमी की थाली का बजट और बिगड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में देश में औसत खाद्य महंगाई बढ़कर 6 फीसदी के आसपास रह सकती है, जबकि खुदरा महंगाई दर 5 फीसदी पर टिक सकती है। इस चिंता की बड़ी वजह मानसून की शुरुआत में हुई कम बारिश है, जिससे खेती-किसानी और फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक से 30 जून के बीच देश में सामान्य से 40 फीसदी कम बारिश हुई है। इस भारी कमी ने सरकार और आम आदमी दोनों की चिंता बढ़ा दी है। मई में पहले ही खाद्य तेल की महंगाई दर 9.5 फीसदी के उच्च स्तर पर थी। ऐसे में कमजोर मानसून खाद्य पदार्थों की कीमतों को और भड़का सकता है।
जुलाई में भी कम बारिश
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि जुलाई में मानूसन की बारिश लंबी अवधि के औसत के 94 फीसदी से कम हो सकती है। इससे कृषि उत्पादन एवं फसलों की पैदावार को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। भारत के कृषि क्षेत्र में सालाना होने वाली कुल बारिश का लगभग 70 फीसदी हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही आता है।
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जून सबसे सूखे महीनों में
भारत में 1901 के बाद से इस बार जून पांचवां सबसे सूखा महीना दर्ज किया गया है, जहां बारिश सामान्य से 40 फीसदी कम रही। मौसम विभाग ने पहले जून में मानसून की बारिश लंबी अवधि के औसत के 92 फीसदी से कम रहने की भविष्यवाणी की थी। आईएमडी के अनुसार, देश के मध्य, पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों के बड़े इलाकों में औसत से कम बारिश होने का अनुमान है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, एक से 30 जून के बीच देश में सामान्य से 40 फीसदी कम बारिश हुई है। इस भारी कमी ने सरकार और आम आदमी दोनों की चिंता बढ़ा दी है। मई में पहले ही खाद्य तेल की महंगाई दर 9.5 फीसदी के उच्च स्तर पर थी। ऐसे में कमजोर मानसून खाद्य पदार्थों की कीमतों को और भड़का सकता है।
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जुलाई में भी कम बारिश
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि जुलाई में मानूसन की बारिश लंबी अवधि के औसत के 94 फीसदी से कम हो सकती है। इससे कृषि उत्पादन एवं फसलों की पैदावार को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। भारत के कृषि क्षेत्र में सालाना होने वाली कुल बारिश का लगभग 70 फीसदी हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही आता है।
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जून सबसे सूखे महीनों में
भारत में 1901 के बाद से इस बार जून पांचवां सबसे सूखा महीना दर्ज किया गया है, जहां बारिश सामान्य से 40 फीसदी कम रही। मौसम विभाग ने पहले जून में मानसून की बारिश लंबी अवधि के औसत के 92 फीसदी से कम रहने की भविष्यवाणी की थी। आईएमडी के अनुसार, देश के मध्य, पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों के बड़े इलाकों में औसत से कम बारिश होने का अनुमान है।