सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   India News ›   8th Pay Commission Central Government Employees Pensioners Salary Hike 8th CPC AIDEF Old Pension Scheme

8th CPC: 50 लाख कर्मियों व 70 लाख पेंशनरों के वेतन-भत्ते क्या हों? आयोग की ओर से पूछे गए 18 सवालों के जवाब

Jitendra Bhardwaj Jitendra Bhardwaj
Updated Mon, 09 Mar 2026 08:30 PM IST
विज्ञापन
सार

आठवें वेतन आयोग (8th CPC) ने 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 70 लाख पेंशनरों के वेतन-भत्तों से जुड़े 18 अहम सवाल पूछे हैं। एआईडीईएफ के सी. श्रीकुमार की ओर से दिए गए जवाबों, वेतन वृद्धि और पुरानी पेंशन की बहाली से जुड़ी पूरी जानकारी के लिए यह विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें।

8th Pay Commission Central Government Employees Pensioners Salary Hike 8th CPC AIDEF Old Pension Scheme
आठवां वेतन आयोग - फोटो : amarujala.com
विज्ञापन

विस्तार

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग ने अपने वेबसाइट पर विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, कर्मचारी संगठनों और व्यक्तियों से 18 प्रश्नों के जवाब मांगे हैं। वेतन आयोग की तरफ से जो सवाल किए गए हैं, उनमें कर्मियों के वेतन भत्तों में वृद्धि से जुड़ी कई अहम बातें शामिल हैं। जैसे, वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन से आर्थिक परिदृश्य पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। इनमें से कुछ प्रभाव उपभोग और बचत को बढ़ावा देने के संदर्भ में सकारात्मक हैं, जबकि अन्य उच्च राजकोषीय घाटे, मुद्रास्फीति की संभावना और समग्र विकास एवं जन कल्याण जैसे अन्य व्ययों में कटौती के संदर्भ में नकारात्मक हैं। देश की आकांक्षाओं के आधार पर, 8वें वेतन आयोग के लिए समग्र दृष्टिकोण का आधार क्या हो। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव और स्टाफ साइड की जेसीएम के वरिष्ठ सदस्य सी. श्रीकुमार ने सभी 18 सवालों के जवाब दिए हैं। 

Trending Videos


प्रश्न 1. वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन से आर्थिक परिदृश्य पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। इनमें से कुछ प्रभाव उपभोग और बचत को बढ़ावा देने के संदर्भ में सकारात्मक हैं, जबकि अन्य उच्च राजकोषीय घाटे, मुद्रास्फीति की संभावना और समग्र विकास एवं जन कल्याण जैसे अन्य व्ययों में कटौती के संदर्भ में नकारात्मक हैं। अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और देश की आकांक्षाओं के आधार पर, 8वें वेतन आयोग के लिए समग्र दृष्टिकोण का आधार क्या हो? 
विज्ञापन
विज्ञापन

उत्तर: सीपीसी का मार्गदर्शक सिद्धांत समानता, पारदर्शिता और निष्पक्षता होना चाहिए। सरकारी कर्मचारी लोक सेवा वितरण की रीढ़ हैं। उद्देश्य यह होना चाहिए कि कर्मचारियों और उनके परिवारों को आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं के अनुरूप आर्थिक रूप से पर्याप्त सुविधा प्रदान की जाए। कर्मचारियों को बोझ नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भागीदार के रूप में देखा जाए। कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि, सरकार के लिए केवल व्यय नहीं है, बल्कि मानव पूंजी में निवेश है जो उपभोग, बचत और आर्थिक विकास को गति प्रदान करता है। 2027 तक भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। जीडीपी 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होगी।  राजकोषीय घाटा जीडीपी के लगभग 4.3% पर नियंत्रित है। 2016 से राजस्व संग्रह दोगुने से अधिक है, ऐसे में 8वें वेतन आयोग से आग्रह है कि किसी भी तरह से कर्मचारियों की वास्तविक आय में कमी न आए।

प्रश्न 2. आठवें सीपीसी को सरकारी और निजी क्षेत्र में वेतन/भत्तों के बीच सापेक्षता का मूल्यांकन कैसे करना चाहिए? 
उत्तर: सरकारी और निजी क्षेत्र के वेतनमान की तुलना करना कठिन और अव्यवहारिक है, क्योंकि दोनों सेवाओं के उद्देश्य मूल रूप से भिन्न हैं। लोक सेवा का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं है, जबकि निजी क्षेत्र का उद्देश्य अपने लाभ को अधिकतम करना है। केंद्रीय कर्मचारी मुख्य रूप से लोक सेवा वितरण, नीति कार्यान्वयन और नियामक कार्यों में लगे रहते हैं, जबकि रेलवे और रक्षा क्षेत्र के औद्योगिक कर्मचारी उत्पादन और परिचालन गतिविधियों में शामिल होते हैं। इनमें बहुत जोखिम और खतरे होते हैं। उनकी भूमिकाओं के लिए व्यापक प्रशासनिक क्षमता, नीतिगत समझ, समन्वित योजना और कार्यान्वयन की आवश्यकता होती है। संप्रभु जिम्मेदारियों, राष्ट्रव्यापी जवाबदेही, हस्तांतरणीय सेवा शर्तों, आचार संहिता आदि को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय कर्मचारी कहीं अधिक बेहतर वेतनमान और भत्तों के हकदार हैं। 

प्रश्न 3. क्या आठवें सीपीसी को सभी सरकारी विभागों में एकसमान क्षैतिज सापेक्षता पर विचार करना चाहिए, या क्या उसे क्षेत्र-विशिष्ट बेंचमार्किंग पर विचार करना चाहिए, जहां सरकारी कार्यों की तुलना उनके संबंधित उद्योग समकक्षों से की जाए। उदाहरण के लिए, क्या सरकारी इंजीनियरों के वेतन की तुलना निजी क्षेत्र की इंजीनियरिंग फर्मों से, वित्तीय अधिकारियों के वेतन की तुलना बीएफएसआई क्षेत्र से और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की तुलना निजी स्वास्थ्य सेवा से की जानी चाहिए? 

उत्तर: सीपीसी को केंद्र सरकार के कार्यों की तुलना निजी क्षेत्र से क्षेत्र-विशिष्ट बेंचमार्किंग के आधार पर नहीं करनी चाहिए। केंद्रीय कर्मचारियों के कर्तव्य, जवाबदेही और सेवा शर्तें मौलिक रूप से भिन्न हैं। केंद्रीय कर्मचारी कड़े संवैधानिक, प्रशासनिक और वित्तीय नियमों के अधीन कार्य करते हैं। उनके सभी कार्य और निर्णय आचार संहिता, संसदीय जांच, सतर्कता निगरानी और सूचना अधिकार प्रावधानों के अधीन होते हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और निजी क्षेत्र अलग-अलग प्रदर्शन मापदंडों और व्यावसायिक उद्देश्यों, जिनमें लाभ कमाना भी शामिल है, के तहत कार्य करते हैं। इसके विपरीत, केंद्र सरकार के कर्मचारी राष्ट्रीय नीतियों को लागू करते हैं, सार्वजनिक निधियों का प्रबंधन करते हैं और पूरे देश में सुशासन सुनिश्चित करते हैं। सभी सरकारी विभागों में एकसमान क्षैतिज सापेक्षता बनाए रखी जानी चाहिए। क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर सापेक्षता का सिद्धांत यह हो कि समान श्रेणी के पदों का वेतन समान हो और ऊर्ध्वाधर सापेक्षता बनी रहे। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए वेतनमान तदनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए। 

प्रश्न 4: सरकारी नौकरियों में कार्यकाल की सुरक्षा, प्रशिक्षण व्यवस्था, आवास, अवकाश का नकदीकरण, नियमित वेतन वृद्धि, चिकित्सा कवरेज, समयबद्ध पदोन्नति, मुद्रास्फीति-अनुक्रमित वेतन और सेवानिवृत्ति लाभ जैसी विशेषताएं पाई जाती हैं। निजी क्षेत्र के सापेक्ष वेतन निर्धारण और मुआवजा मैट्रिक्स तैयार करते समय इन विशेषताओं को किस प्रकार ध्यान में रखा जाना चाहिए?

उत्तर: सरकारी सुविधाएं महज अतिरिक्त लाभ नहीं हैं। ये कर्मचारियों की सुरक्षा और गरिमा के आधार स्तंभ हैं। नौकरी की सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा, आवास और नियमित वेतन वृद्धि सरकारी सेवा को आकर्षक बनाती हैं, विशेषकर उन लोगों के लिए, जो लोक सेवा के प्रति समर्पित हैं। ये सुविधाएं निजी क्षेत्र में मिलने वाली त्वरित पदोन्नति की कमी, सुनिश्चित पदोन्नति के लिए आवधिक कैडर पुनर्गठन आदि और लचीलेपन की भरपाई करती हैं। ऐसे में इन सुविधाओं का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों की तुलना के लिए नहीं किया जाना चाहिए। एक आदर्श नियोक्ता के रूप में, सरकार यह सुनिश्चित करे कि उसके कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को ऐसी सुविधाएं और लाभ प्राप्त हों जो सरकारी सेवा से जुड़ी गरिमा, स्थिरता और सार्वजनिक जवाबदेही को दर्शाते हों। सभी भत्तों के सूचकांक को जीवन यापन की लागत और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़कर वार्षिक वेतन वृद्धि, नौकरी की सुरक्षा, चिकित्सा देखभाल और सेवानिवृत्ति लाभों को मजबूत बनाए रखना आवश्यक है।

प्रश्न 5. सरकारी रोजगार संगठित क्षेत्र का हिस्सा है। रोजगार बल का एक बहुत बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र और गिग अर्थव्यवस्था में कार्यरत है। आपके विचार से सरकार द्वारा लागू किए गए प्रवेश स्तर के वेतनमानों का अनौपचारिक या गिग क्षेत्र में वेतन प्रथाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: सामान्यतः, सरकारी कर्मचारियों का प्रारंभिक वेतन देश के लिए एक आदर्श मानदंड निर्धारित करता है। यद्यपि इसका अनौपचारिक या अस्थायी क्षेत्र पर सीधा प्रभाव न पड़े, फिर भी यह दर्शाता है कि समाज, ईमानदारी से किए गए कार्य के लिए उचित और जीवन निर्वाह योग्य वेतन किसे मानता है। सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि होने पर, अन्य क्षेत्रों को भी अपने मानकों में सुधार करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है, भले ही यह चरणबद्ध तरीके से हो। एक आदर्श नियोक्ता के रूप में सरकार को एक सम्मानजनक और प्रतिस्पर्धी वेतन संरचना प्रदान करनी चाहिए ताकि कठोर, योग्यता-आधारित प्रक्रियाओं के माध्यम से भर्ती की गई प्रतिभाओं को आकर्षित और बनाए रखा जा सके। निजी क्षेत्र के वेतन से कोई भी सीधी तुलना भ्रामक होगी, क्योंकि निजी क्षेत्रों का मुआवजा विभिन्न उद्योगों में व्यापक रूप से भिन्न होता है। वह उनकी व्यावसायिक लाभप्रदता से जुड़ा होता है। सरकारी कर्मचारियों का वेतन इतना हो कि जिससे उनकी गरिमा सुनिश्चित हो सके। 

प्रश्न 6. सरकारी वेतन में सेवा अवधि के लिए मुआवजा (आमतौर पर वार्षिक वेतनवृद्धि), महंगाई/जीवन निर्वाह लागत में बदलाव के लिए क्षतिपूर्ति (महंगाई भत्ता) और वरिष्ठता/योग्यता के आधार पर उच्च जिम्मेदारियों के लिए वेतन (पदोन्नति पर वेतनमान) जैसे तत्व स्पष्ट रूप से शामिल होते हैं। इस संदर्भ में, आपके विचार से वेतन आयोगों द्वारा अपनाए गए "उपयुक्तता कारक" का क्या अर्थ होना चाहिए? ऐसे उपयुक्तता कारक का मुख्य उद्देश्य क्या हो?

उत्तर: सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भत्ते विशेषाधिकार नहीं हैं, बल्कि ये वास्तविक आय को बनाए रखने और बदलती आर्थिक परिस्थितियों में वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाते हैं। कई सरकारी विभागों में ग्रुप सी और बी कर्मचारियों की नियमित पदोन्नति में देरी होती है। इससे कर्मचारियों को आवश्यक कौशल, अनुभव प्राप्त करने और निर्धारित निवास अवधि पूरी करने के बावजूद उचित करियर प्रगति और उचित वेतन संशोधन से वंचित होना पड़ता है। इसे सुनिश्चित करने के लिए, एआईडीईएफ समयबद्ध तरीके से पदोन्नति पदानुक्रम में 30 वर्षों की सेवा अवधि में न्यूनतम 5 गारंटीकृत पदोन्नति की मांग कर रहा है। ऐसे फिटमेंट फैक्टर का समर्थन करते हैं जो परिवार की इकाइयों को तीन के बजाए पांच रखे। मध्यम रैंकों के लिए वेतन में सार्थक सुधार प्रदान करे। सभी भत्तों को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ा जाना चाहिए। कर्मचारी अपनी मेहनत को केवल वार्षिक वेतन वृद्धि में ही नहीं, बल्कि अपने वेतन में भी प्रतिबिंबित होते देखना चाहते हैं। 

प्रश्न 7. केंद्र सरकार में सचिव का वेतन आमतौर पर उच्चतम स्तर का होता है। इसे निर्धारित करने का सिद्धांत क्या होना चाहिए?

उत्तर: सर्वोच्च पद वाले व्यक्ति पर अत्यधिक उत्तरदायित्वों का भार होता है, जिसमें राष्ट्रीय नीतियों के मूल्यांकन और प्रतिपादन तथा उनके सफल कार्यान्वयन में योगदान देना शामिल है। उसे उच्च स्तर की जवाबदेही के अधीन रहते हुए न्यासी उत्तरदायित्व का निर्वाह करना होता है। राजनीतिक तटस्थता बनाए रखनी होती है। सरकारी सेवा सुव्यवस्थित है, जिसमें कर्तव्यों को संहिताबद्ध किया गया है। लेखापरीक्षा, सतर्कता और संसदीय निरीक्षण के माध्यम से उनकी निगरानी की जाती है। वाणिज्यिक संगठनों के विपरीत, व्यक्तिगत या समूह प्रदर्शन को मापने के लिए कोई वस्तुनिष्ठ या एकसमान मानदंड नहीं है।इसलिए, यह प्रस्ताव देते हैं कि सचिव की एंट्री सेलरी, न्यूनतम वेतन के 10 गुना से अधिक नहीं हो। 

प्रश्न 8. 'ग्रुप ए' की सभी सेवाओं के लिए वेतनमान कैसे निर्धारित हों, ताकि अपेक्षित योग्यता वाले उम्मीदवारों को आकर्षित किया जा सके? क्या वेतनमान प्रवेश स्तर पर अधिक आकर्षक होने चाहिए या कुछ वर्षों की सेवा के बाद? 

उत्तर: आज के युवा, पेशेवर सरकारी नौकरियों की तुलना आकर्षक निजी नौकरियों से करते हैं। शुरुआती वेतन बहुत कम है, तो सरकार प्रतिभा खो देती है। शुरुआती वेतन को आकर्षक बनाना जरुरी है ताकि प्रतिभाशाली युवा, पहले दिन से ही खुद को मूल्यवान और प्रेरित महसूस करें। सरकार में बने रहने और अच्छा प्रदर्शन करने वालों के लिए स्पष्ट और निष्पक्ष पदोन्नति होनी चाहिए। मध्य-करियर और वरिष्ठ पदों पर वेतन निष्ठा, अनुभव और योग्यता को पुरस्कृत करना चाहिए। ये नए उम्मीदवारों की उपेक्षा की कीमत पर नहीं हो। 8वें सीपीसी द्वारा उच्च शुरुआती वेतन, नियमित वेतन वृद्धि और समय-सीमा के अनुसार पदोन्नति की सिफारिश करके एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। हालांकि निजी क्षेत्र की तरह वेतन न तो संभव है और न ही वांछनीय। आठवां वेतन आयोग यह सुनिश्चित करे कि सरकारी सेवा के आकर्षण को बनाए रखने के लिए इस असमानता को दूर किया जाए। 

प्रश्न 9. विभिन्न वेतनमानों के संबंध में वेतन वृद्धि की दरें और आवृत्ति कैसे निर्धारित की जानी चाहिए? क्या ये एकसमान होनी चाहिए या सेवा के दौरान वेतनमानों/समय अवधियों में भिन्न हों? 

उत्तर: वेतन वृद्धि की आवृत्ति वार्षिक होनी चाहिए। वर्तमान वार्षिक वेतन वृद्धि दर 3% है, जिसे संशोधित करके 6% करने की आवश्यकता है। वजह, आज सरकारी कर्मचारियों को निरंतर अपने कौशल को उन्नत करना, नवीनतम तकनीक और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाना, अनुभव प्राप्त करना और समय के साथ अपनी दक्षता बढ़ाना आवश्यक है। उच्च वेतन वृद्धि दर बेहतर दक्षता, उत्पादकता और लोक प्रशासन में योगदान को बेहतर ढंग से दर्शाएगी। मनोबल और दक्षता बनाए रखने के लिए पदोन्नति के रास्तों को संरक्षित और मजबूत किया जाना चाहिए। 

प्रश्न 10. समय के साथ, कार्य की विशिष्ट प्रकृति, यात्रा जैसे व्यय, तैनाती स्थल से जुड़ी कठिनाई/जोखिम/विविधताओं के लिए मुआवजे आदि के आधार पर कई भत्ते शुरू किए गए हैं। इनमें से अधिकांश आंशिक रूप से मुद्रास्फीति अनुक्रमित हैं। एक वैकल्पिक दृष्टिकोण केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) द्वारा अपनाई गई कैफेटीरिया पद्धति है, जिसमें कुछ भत्तों को छोड़कर, अधिकारी मूल वेतन की समग्र सीमा के अधीन, सुविधाओं और भत्तों के एक समूह में से चुनते हैं। आपकी राय में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए कौन सा दृष्टिकोण अधिक उपयुक्त है?

उत्तर: केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में कैफेटेरिया प्रणाली अपनाई जाती है। यह केंद्रीय सरकारी सेवाओं के लिए उपयुक्त विकल्प नहीं है, क्योंकि पारंपरिक भत्ते समानता सुनिश्चित करते हैं और जोखिम भरे व खतरनाक कार्यों, कठिन स्थानों, उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों या विशिष्ट कठिनाइयों का सामना कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा करते हैं। वर्तमान प्रणाली में आवास भत्ता, यात्रा भत्ता, जोखिम एवं कठिनाई भत्ता, रात्रि ड्यूटी भत्ता, नर्सिंग भत्ता, रोगी देखभाल भत्ता, अवकाश यात्रा भत्ता और चिकित्सा सुविधाएं जैसे सभी भत्ते सुनिश्चित हैं और इन्हें जारी रखा जाना चाहिए। इनकी दरों में तीन गुना वृद्धि की जा जाए। 

प्रश्न 11. सातवें वेतन आयोग ने जनवरी 2014 में आकलन किया था कि केंद्रीय सरकार में लगभग 47 लाख सेवारत कर्मचारी थे। इनमें सीएपीएफ, रेलवे और रक्षा बल शामिल थे। पेंशनभोगियों की संख्या लगभग 52 लाख थी। 2025-26 में केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों की संख्या लगभग 50 लाख है, जबकि पेंशनभोगियों की संख्या लगभग 70 लाख है। पेंशनभोगियों की संख्या में वृद्धि से सरकार के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। पेंशनभोगियों की उचित अपेक्षाओं को पूरा करने के साथ-साथ राजकोषीय प्रभाव को नियंत्रणीय सीमा के भीतर रखने के लिए कौन से उपाय सहायक हो सकते हैं?

उत्तर: पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए जीवन रेखा है। सर्वोच्च न्यायालय ने लगातार यह माना है कि "पेंशन नियोक्ता की मनमानी पर दिया जाने वाला कोई उपहार नहीं है, बल्कि लंबी और समर्पित सेवा के लिए मुआवजे का एक आस्थगित हिस्सा है।" सेवानिवृत्ति लाभ भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आजीविका के अधिकार का हिस्सा हैं। इसलिए पेंशन लाभों का भुगतान न होना या अपर्याप्त सुरक्षा गंभीर संवैधानिक चिंताएं पैदा करती है। पेंशन एक सामाजिक कल्याणकारी उपाय है जिसका उद्देश्य वृद्धावस्था में गरिमा और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दशकों की सार्वजनिक सेवा के बाद पेंशनभोगियों को सेवानिवृत्ति के बाद एक सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जीने में सक्षम होना चाहिए। पेंशन पर होने वाला व्यय, कुल राजस्व व्यय का लगभग 4% होने का अनुमान है। ऐसे में पेंशन संबंधी देनदारियां नियंत्रण में रहेंगी। पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने बाबत सीपीसी विचार करे। 

प्रश्न 12. सातवें वेतन आयोग का गठन 2014 में हुआ और यह 1.1.2016 से लागू हुआ। तब से अब तक मुद्रास्फीति की दर पिछले दशकों की तुलना में कम रही है। यह अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) में भी परिलक्षित होता है, जिसका उपयोग महंगाई भत्ता की गणना के लिए किया जाता है। क्या आठवें वेतन आयोग को एक मिश्रित सूचकांक प्रणाली अपनानी चाहिए, जिसमें मुद्रास्फीति से सुरक्षा और औपचारिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि दोनों को ध्यान में रखा जाए? प्रत्येक घटक के लिए उचित अनुपात क्या होगा और कार्यान्वयन में किन बातों का ध्यान रखना होगा? अगले 10 वर्षों में मुद्रास्फीति/कमीशन सूचकांक में वृद्धि के संबंध में आपकी क्या अपेक्षाएं हैं?

उत्तर: महंगाई भत्ता कर्मचारियों के लिए जीवन रेखा है, जो उनकी वास्तविक आय को मुद्रास्फीति से कुछ हद तक सुरक्षित रखता है। महंगाई भत्ता (एआईसीपीआई) (औद्योगिक श्रमिक सूचकांक) जिसका उपयोग वर्तमान में महंगाई भत्ता गणना के लिए किया जाता है, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों द्वारा सामना की जाने वाली वास्तविक मुद्रास्फीति को सटीक रूप से प्रतिबिंबित नहीं करता है। सीपीआई बास्केट में कई वस्तुओं का मूल्य रियायती या राशन (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) दरों पर निर्धारित किया जाता है, जबकि कर्मचारी और पेंशनभोगी खुले खुदरा बाजार में काफी अधिक कीमतों पर सामान खरीदते हैं। कोविड-19 महामारी के बाद मुद्रास्फीति में तेजी से वृद्धि हुई है, विशेष रूप से आवास, परिवहन और चिकित्सा खर्चों में। चौथे और छठे केंद्रीय वेतन आयोग ने सरकारी कर्मचारियों के उपभोग पैटर्न को दर्शाने वाले एक अलग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बनाने की सिफारिश की थी। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को वास्तविक मजदूरी की सुरक्षा और आय में कमी को रोकने के लिए केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक अलग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की सिफारिश करनी चाहिए।

प्रश्न 13. केंद्र सरकार के लगभग 70% कर्मचारी रेलवे, सीएपीएफ और रक्षा बलों में कार्यरत होते हैं। उनके वेतन और भत्तों का निर्धारण करते समय किन विशेष मौद्रिक या गैर-मौद्रिक कारकों को ध्यान में रखा जाना चाहिए?

उत्तर: रक्षा विभाग के वर्दीधारी कर्मियों और नागरिक कर्मचारियों, रेलवे कर्मचारियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को अद्वितीय जोखिमों, कठिनाइयों और जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ता है। उनके वेतन और भत्ते इन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने चाहिए। भारतीय सशस्त्र बल (सेना, नौसेना और वायुसेना) और सीएपीएफ हमारे देश की सुरक्षा में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रक्षा विभाग के नागरिक कर्मचारी हमारे देश की रक्षा के लिए सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। रेलवे कर्मचारी प्रतिदिन 2 करोड़ यात्रियों के परिवहन के अलावा, पूरे देश में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने के लिए चौबीसों घंटे सातों दिन कार्यरत हैं। ये वेतन, भत्ते और पेंशन में बेहतर व्यवहार के हकदार हैं।

प्रश्न 14. वैज्ञानिक अंतरिक्ष विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग आदि जैसे विशिष्ट विभागों/क्षेत्रों में काम करते हैं। उनके वेतनमान तय करते समय किन उचित मापदंडों को ध्यान में रखा जाना चाहिए?

उत्तर: वैज्ञानिकों का वेतन प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और आजीवन सीखने को प्रोत्साहित करने वाला होना चाहिए। इससे भारत अपने अंतरिक्ष, परमाणु, रक्षा अनुसंधान एवं विकास, जल संसाधन, मौसम विज्ञान, भूविज्ञान, कृषि मिशन आदि के लिए विश्व स्तरीय प्रतिभाओं को आकर्षित करने और बनाए रखने में सक्षम होगा। उनके कार्य के महत्व को देखते हुए, उनका वेतन पैकेज इतना आकर्षक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी होना चाहिए कि देश की सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक प्रतिभाओं को आकर्षित कर सके, जिसमें विदेश में कार्यरत अनिवासी भारतीय (एनआरआई) पेशेवर और शोधकर्ता भी शामिल हैं। 

प्रश्न 15. सशस्त्र बलों के कर्मियों को वर्तमान में सैन्य सेवा वेतन दिया जाता है। यह उनके कर्तव्यों की विशेष प्रकृति को ध्यान में रखते हुए किया गया था। इस संदर्भ में और उनके कार्यों की बदलती प्रकृति को देखते हुए, सैनिकों, नौसैनिकों और वायुसेना कर्मियों का वेतन कैसे निर्धारित किया जाना चाहिए? यह सरकारी नौकरी के शुरुआती वेतन या सीएपीएफ/पुलिस में कांस्टेबल के वेतन से किस प्रकार संबंधित होना चाहिए?

उत्तर: सशस्त्र बलों के कर्मियों को उनके जोखिम, तत्परता, सतर्कता और बलिदानों के अनुरूप वेतन मिलना चाहिए। हम स्थिर सैन्य सेवा वेतन को गतिशील जोखिम एवं तत्परता प्रीमियम से बदलने का समर्थन करते हैं, जो सीएपीएफ/पुलिस और नागरिक प्रवेश स्तरों से कम से कम 25% अधिक होना चाहिए। अग्निवीर के नाम पर सशस्त्र बलों में निश्चित अवधि के रोजगार को समाप्त किया जाए। अग्निवीर के रूप में चयनित और नियुक्त सभी कार्मिक नियमित  हों। उनका प्रवेश वेतन आकर्षक होना चाहिए, जिसमें स्पष्ट वेतन वृद्धि और आवास, राशन आदि जैसे मजबूत गैर-मौद्रिक लाभ शामिल हों। सीआरपीएफ कर्मियों को सीमा ड्यूटी पर तैनात सैन्य कर्मियों के समान उचित लाभ मिलने चाहिएं। देश में आंतरिक और बाह्य सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार होने के नाते वे बेहतर वेतन/भत्ते के भी हकदार हैं।

प्रश्न 16. देश में सेवारत सैन्य कर्मियों की तुलना में सैन्य पेंशनभोगियों की संख्या कहीं अधिक है। 2025-26 में रक्षा पेंशन पर होने वाला व्यय रक्षा वेतन और भत्तों पर होने वाले व्यय से अधिक होने की संभावना है। अनुमानों के अनुरूप समग्र रक्षा पेंशन बिल में वृद्धि होने से, उपकरण और शस्त्रों की खरीद, उनके रखरखाव और रक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। रक्षा जनशक्ति लागत और पेंशन बिल में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए आप क्या बदलाव सुझाएंगे?

उत्तर: रक्षा कर्मियों ने राष्ट्र के लिए अपना यौवन और स्वास्थ्य न्योछावर कर दिया है। किसी भी सुधार का उद्देश्य उनके बलिदान का सम्मान करना और सेवानिवृत्ति के बाद उनके सम्मान को सुनिश्चित करना होना चाहिए। सशस्त्र बलों के लिए परिभाषित गैर-अंशदायी वृद्धावस्था पेंशन योजना जारी रहनी चाहिए। राष्ट्र की सुरक्षा प्रेरित और सम्मानित कर्मियों पर निर्भर करती है। लागत में कटौती से इस भरोसे को कभी भी कमज़ोर नहीं किया जाना चाहिए। वित्तीय वर्ष 2025-26 में रक्षा पेंशन के लिए ₹1,60,795 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो ₹6,81,210.27 करोड़ के कुल रक्षा बजट का लगभग 23.60% है। यह आवंटन राष्ट्र की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में सेवा करने वालों के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। रक्षा कर्मी असाधारण बलिदान देते हैं। वित्तीय बाधाएं या धन की कमी, कभी भी देश के सशस्त्र बलों के कर्मियों और पूर्व सैनिकों के प्रति उसके दायित्व को कमजोर नहीं करनी चाहिए। 

प्रश्न 17. उत्पादकता से जुड़ा बोनस (पीएलबी) कुछ सरकारी कर्मचारियों जैसे रेलवे और डाक कर्मचारियों को दिया जाता है। इन बोनस में सशस्त्र बलों के कुछ कर्मचारी भी शामिल हैं। उत्पादकता और प्रदर्शन में उत्कृष्टता को पुरस्कृत करने के लिए बोनस संरचना को किस प्रकार पुनर्परिभाषित किया जा सकता है? क्या पीएलबी/तदर्थ बोनस एक समान आधार पर (जैसे सभी के लिए 60 दिनों का वेतन) दिया जाना जारी रहना चाहिए या व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर इसमें अंतर किया जाना चाहिए?

उत्तर: सरकारी तंत्र में व्यक्तिगत प्रदर्शन पर बोनस की कोई अवधारणा संभव नहीं है। यह सभी कर्मचारियों का सामूहिक कार्य है, चाहे वह रेलवे जैसे औद्योगिक प्रतिष्ठान हों या रक्षा उत्पादन और अन्य इकाइयां। कर्मचारी बोनस नियमित वेतन के अतिरिक्त भुगतान होते हैं, जिनका उद्देश्य प्रदर्शन को पुरस्कृत करना, मनोबल बढ़ाना और उत्पादकता में सुधार करना है। पीएलबी योजना में न्यूनतम 30 दिनों के वेतन के बराबर गारंटीकृत बोनस होना चाहिए। बोनस का भुगतान कर्मचारियों के वास्तविक मूल वेतन + महंगाई भत्ता (डीए) पर किया जाए। 

प्रश्न 18. पिछले कुछ वर्षों में पार्श्व प्रवेश के रूप में संविदात्मक नियुक्तियों का प्रयास किया गया है। क्या आपको लगता है कि इसे विस्तारित किया जाना चाहिए। अंशकालिक कार्य, लचीला समय आदि जैसी अन्य प्रथाओं को सरकार में मध्य/उच्च स्तरों पर लागू किया जाना चाहिए ताकि अधिक प्रतिभा का लाभ उठाया जा सके? ऐसा करने के क्या लाभ और हानियां हो सकती हैं?

उत्तर:  एआईडीईएफ का दृढ़ मत है कि सरकारी विभागों में स्थायी, चिरस्थायी और मुख्य प्रकृति के कार्यों को आउटसोर्स या ठेके पर नहीं दिया जाना चाहिए। सरकारी विभागों में निश्चित अवधि के रोजगार भी उचित नहीं हैं, क्योंकि ये सभी प्रकार की नियुक्तियाँ शोषणकारी प्रकृति की हैं। निरंतर, संप्रभु, कौशल और अनुभव की आवश्यकता वाले कार्य सरकार के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण में रहने चाहिए, ताकि जवाबदेही, पारदर्शिता और संस्थागत निरंतरता सुनिश्चित हो सके। संविदात्मक और निश्चित अवधि के रोजगार आदि कर्मचारियों के मनोबल, नौकरी की सुरक्षा, सुरक्षा और सार्वजनिक सेवा वितरण की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। मुख्य सेवा क्षेत्रों के अंधाधुंध निगमीकरण और निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed