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Oil Tanker Reach Mumbai: ईरान में तनाव के बीच होर्मुज पार कर मुंबई पहुंचा तेल टैंकर, भारतीय कैप्टन के हाथ कमान

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Thu, 12 Mar 2026 01:18 PM IST
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सार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आया लाइबेरियाई ध्वज वाला टैंकर ईरान की अनुमति से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सुरक्षित रूप से मुंबई पोर्ट पहुंच गया। भारत सरकार क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखे हुए है।

Amid West Asia tensions, this country's oil tanker crosses Hormuz to reach Mumbai, know everything
शेनलोंग सुएजमैक्स - फोटो : ANI
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विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक लाइबेरियाई ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर, जिसकी कमान एक भारतीय कप्तान के हाथ में थी, रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर सुरक्षित रूप से मुंबई बंदरगाह पहुंच गया। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार यह टैंकर सऊदी अरब के रास तनुरा बंदरगाह से कच्चा तेल लेकर आया था।

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कैसे भारत पहुंचा यह टैंकर?

मैरिटाइम ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस टैंकर ने 1 मार्च को सऊदी अरब के रास तनुरा पोर्ट से कच्चा तेल लोड किया था और 3 मार्च को वहां से रवाना हुआ। 8 मार्च को जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रैक किया गया, जिसके बाद यह कुछ समय के लिए ट्रैकिंग सिस्टम से गायब हो गया था।

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रिपोर्ट के मुताबिक जहाज ने जोखिम भरे समुद्री क्षेत्र से गुजरते समय अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रांसपोंडर बंद कर दिया था। यह प्रणाली जहाज की पहचान, स्थिति, गति और दिशा की जानकारी प्रसारित करती है, जिससे समुद्री यातायात को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

जहाज में कितना तेल है मौजूद?

टैंकर बुधवार दोपहर करीब 1 बजे मुंबई पोर्ट पहुंचा और शाम 6:06 बजे जवाहर द्वीप टर्मिनल पर बर्थ किया गया। जहाज में लगभग 1,35,335 मीट्रिक टन सऊदी कच्चा तेल है, जिसे पूर्वी मुंबई के माहुल स्थित रिफाइनरियों को आपूर्ति किया जाएगा। तेल उतारने की प्रक्रिया करीब 36 घंटे तक चलने की संभावना है। टैंकर पर कुल 29 चालक दल के सदस्य हैं, जिनमें भारतीय, पाकिस्तानी और फिलीपीनी नागरिक शामिल हैं।

ईरान की अनुमति के बाद जलडमरूमध्य से गुजरा टैंकर

अधिकारियों के अनुसार टैंकर ने सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया, जो फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। हाल के सैन्य घटनाक्रमों के बाद इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं, ऐसे में टैंकर का सुरक्षित गुजरना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जहाजों पर ईरान की सख्त निगरानी

ईरान ने हाल के दिनों में इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर निगरानी और प्रतिबंध कड़े कर दिए हैं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार अब जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने से पहले तेहरान से अनुमति लेना आवश्यक है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल अलीरेजा तंगसीरी ने चेतावनी दी है कि निर्देशों की अनदेखी करने वाले जहाजों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने दावा किया कि चेतावनी की अनदेखी करने पर एक्सप्रेस रोम और मयूरी नारी नामक जहाजों को निशाना बनाया गया।

ईरानी अधिकारियों का यह भी कहना है कि अमेरिका और इजराइल के हितों से जुड़े जहाजों को छोड़कर अन्य जहाजों को सुरक्षित पारगमन की अनुमति दी जा सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल इस रास्ते से होकर गुजरता है, जो वैश्विक दैनिक तेल खपत का करीब पांचवां हिस्सा है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक चौथाई हिस्सा भी इसी मार्ग से होता है।

इसके अलावा दुनिया के बड़े हिस्से का तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) व्यापार भी इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा का असर तुरंत वैश्विक ऊर्जा बाजार, सप्लाई चेन और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर सरकार की नजर

वर्तमान स्थिति को देखते हुए भारत का शिपिंग मंत्रालय फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए है।मंत्रालय के अनुसार इस क्षेत्र में इस समय 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज संचालित हो रहे हैं। इनमें से 24 जहाजों पर 677 भारतीय नाविक होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में हैं, जबकि चार जहाजों पर 101 भारतीय क्रू सदस्य जलडमरूमध्य के पूर्व में तैनात हैं। स्थिति पर निगरानी के लिए शिपिंग मंत्रालय और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने 28 फरवरी से 24 घंटे का कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है।

दूतावासों और समुद्री एजेंसियों से समन्वय

अधिकारियों के अनुसार भारतीय प्राधिकरण, शिप मैनेजमेंट कंपनियां और भर्ती एजेंसियां क्षेत्र में मौजूद भारतीय दूतावासों तथा स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही हैं, ताकि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सरकार का कहना है कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारत के समुद्री हितों और भारतीय नाविकों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
 

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