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LPG: रोटी-डोसा रेस्तरां के मेन्यू से गायब, चाय की जगह नींबू पानी; रसोई तक कैसे पहुंचा पश्चिम एशिया का तनाव?

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Thu, 12 Mar 2026 02:28 PM IST
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सार

पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण भारत में एलपीजी रसोई गैस की किल्लत चर्चा में है। हालांकि, सरकार ने दावा किया है कि ऐसी कोई बात नहीं है और अब भी ढाई दिनों के भीतर घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस सिलिंडर मिले, इसे सुनिश्चित किया जा रहा है। हालांकि, होटलों और रेस्तरां की बात करें तो जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। कई शहरों के रेस्तरां के मेन्यू से रोटी-डोसा जैसी बुनियादी चीजें गायब होने की खबर है। आइए इस हालात को समझने की कोशिश करते हैं।

LPG shortage in India cooking gas crisis West Asia conflict impact restaurant menus News and Business Updates
एलपीजी संकट की आशंका से दुविधा - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

अगर आप आज अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट में गर्मागर्म डोसा, पूरी या अपनी पसंद की चाय पीने जा रहे हैं, तो शायद ऐसा करने में देश के कुछ हिस्सों में  आपको निराशा हाथ लग सकती है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने भारत में वाणिज्यिक रसोई गैस का भारी संकट पैदा कर दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि मुंबई्, बंगलूरू, चेन्नई और दिल्ली-एनसीआर में बड़े पैमाने पर होटल और रेस्तरा कमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति प्रभावित होने से संकट में हैं। कई जगहों पर मेन्यू छोटे किए जा रहे हैं। खाना पकाने वाली गैस की सप्लाई घटने से राशनिंग की नौबत आ गई है। आइए एक आम उपभोक्ता के नजरिए से समझते हैं खाड़ी में चल रहा यह युद्ध हमारी थाली अब कैसे प्रभावित करने लगा है?

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आखिर रेस्टोरेंट, कैंटीन और हॉस्टल में चल क्या रहा है?
जवाब: गैस बचाने के लिए कुक अब ऐसा खाना बना रहे हैं जिसमें कम ईंधन की खपत हो ताकि गैस का स्टॉक लंबे समय तक चल सके।

  • मेन्यू में बदलाव: चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में रेस्टोरेंट ने डोसा और पूरी जैसे ज्यादा गैस खपत वाले व्यंजन बनाना बंद कर दिया है। नई दिल्ली के एक ढाबे के बाहर तो बकायदा बोर्ड लगा दिया गया कि 'आज सिर्फ दाल-चावल मिलेंगे'। 
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  • चाय-कॉफी पर संकट: गुजरात की एक ऑटोमोबाइल फैक्ट्री की कैंटीन ने तली हुई चीज बंद कर दी हैं और चाय की जगह नींबू पानी और गर्म सूप की जगह छाछ देना शुरू कर दिया है।
  • हॉस्टल और पीजी:  हैदराबाद के आईटी कॉरिडोर में हॉस्टल वालों ने राजमा और छोले जैसी चीजें बनानी बंद कर दी हैं, जिससे उत्तर भारतीयों को खासी परेशानी हो रही है। दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन में भी मुख्य भोजन हटाकर केवल सैंडविच, सलाद और फ्रूट चाट दिए गए।

भारत में इस रसोई गैस संकट की असली वजह क्या है?
जवाब:
इस संकट की जड़ें पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से जुड़ी हैं। 

  • युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र से होने वाले व्यापारिक जहाज़ों की आवाजाही पर रोक लग गई है।
  • इससे ऊर्जा और परिवहन लागत बढ़ गई है और मध्य पूर्व से तेल व गैस का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
  • दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक होने के नाते भारत पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ा है।

इस संकट से छोटे कारोबारियों और टूरिज्म पर क्या असर पड़ रहा है?
जवाब:
इस गैस किल्लत से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और छोटे व्यवसायों पर दोहरी मार पड़ी है:

  • रेस्तरां बंदी: पुणे का मशहूर 'मॉडर्न कैफे' गैस खत्म होने के कारण लगातार दो दिन बंद रहा।
  • पर्यटन पर खतरा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और गोवा जैसे पर्यटन राज्यों में होटल मालिक डरे हुए हैं। धर्मशाला होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी बाम्बा के मुताबिक, गैस की अनिश्चितता के कारण होटल वाले एडवांस बुकिंग लेने से कतरा रहे हैं।
  • फूड डिलीवरी: एलारा सिक्योरिटीज के विश्लेषक करण तौरानी का मानना है कि इस ईंधन संकट से रेस्टोरेंट की क्षमता घटेगी और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर भी असर पड़ेगा। लोग अब इलेक्ट्रिक ओवन और फ्रायर का इस्तेमाल करने वाले 'क्विक सर्विस चेन' की तरफ रुख कर सकते हैं।

हालात से निपटने के लिए क्या जुगाड़ और विकल्प अपनाए जा रहे हैं?
जवाब:
संकट से बचने के लिए कारोबारी और सरकार अलग-अलग तरह के विकल्प आजमा रहे हैं:

  • इलेक्ट्रिक और माइक्रोवेव: आईआरसीटीसी ने रेलवे स्टेशनों पर अपनी कैटरिंग यूनिट्स को इंडक्शन और माइक्रोवेव का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है।
  • लकड़ी और कोयला: भुवनेश्वर नगर निगम ने सड़क किनारे के ढाबों के लिए कोयले और जलाऊ लकड़ी पर लगा प्रतिबंध फिलहाल हटा लिया है। वहीं मुंबई की बेकरियां भी अपने पुराने लकड़ी वाले ओवन फिर से चालू करने की अनुमति मांग रही हैं।
  • बायोगैस का उपयोग: बेंगलुरु की 'एम्पायर रेस्टोरेंट चेन' ने बायोगैस प्लांट के ईंधन से काम चलाना शुरू कर दिया है। इसके सीईओ शाकिर हक का कहना है कि भविष्य के लिए डुअल-फ्यूल (दोहरे ईंधन) सिस्टम पर विचार किया जा रहा है।
  • और क्या उपाय हो रहे? यूपी में मिट्टी के तेल (केरोसिन) को आपातकालीन विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जबकि महाराष्ट्र नेचुरल गैस लिमिटेड पुणे के रेस्टोरेंट्स को पाइप्ड गैस कनेक्शन देने की पेशकश कर रही है। इसके अलावा, सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के आपातकालीन आदेश भी दिए हैं।

आगे क्या होने वाला है?
जवाब: स्थिति अभी चुनौतीपूर्ण है। बेंगलुरु पीजी ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुणकुमार डीटी के अनुसार, पीजी के पास मुश्किल से 4-5 दिन का गैस स्टॉक बचा है। कम ऊर्जा वाले व्यंजन बनाकर इसे दो दिन और खींचा जा सकता है। जब तक गैस की आपूर्ति स्थिर नहीं हो जाती, तब तक सामान्य मेन्यू पर वापस आना मुश्किल है।

पश्चिम एशिया के इस भू-राजनीतिक संकट ने यह साबित कर दिया है कि हमारी रसोई भी ग्लोबल सप्लाई चेन से गहराई से जुड़ी है। जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक आम आदमी को बाहर खाने में सीमित विकल्पों से ही काम चलाना पड़ेगा। यह स्थिति रेस्तरां और कारोबारियों के लिए एक बड़ा सबक है कि किसी एक तरह के ईंधन पर निर्भर रहना कितना जोखिम भरा हो सकता है।

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