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Hormuz: ईरान ने भारतीय जहाजों के लिए खोला रास्ता, क्या यह बारूदी सुरंग बने होर्मुज में हमारा कूटनीतिक पंच है?

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Thu, 12 Mar 2026 11:25 AM IST
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सार

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान-इस्राइल युद्ध के बीच एस जयशंकर की कूटनीति से भारतीय जहाजों को मिला सुरक्षित रास्ता। पढ़ें कैसे ईरान ने अमेरिका को रोककर भारत को दी इजाजत। पूरा मामला सवाल-जवाब के जरिए समझें।

S Jaishankar diplomacy Strait of Hormuz Iran Israel war Indian oil tankers crude oil prices India Iran
Hormuz Strait - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध के बीच पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई लाइन खतरे में है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पश्चिमी देशों के विदेशी जहाजों के लिए लगभग 'नो-गो जोन' बन चुका है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में, ईरान  की ओर से भारतीय जहाजों को होर्मुज से गुजरने देने की बात कही गई। हालांकि कई रिपोर्ट्स में ईरानी सूत्रों के हवाले इन रिपोर्ट्स को खारिज भी किया जा रहा है। इस बीच इस खबर पर पूरी दुनिया की नजर इस पर बनी हुई है। निश्चित तौर पर अगर भारतीय जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत मिली है तो इससे देश में ऊर्जा संकट की संभावित आशंका को दूर करने में मदद मिलेगी।

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देश के लिए यह महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की एक कॉल ने वह कर दिखाया है जो पश्चिमी देशों के जंगी बेड़े नहीं कर सके। आइए आसान सवाल-जवाब से समझते हैं भारत की इस बड़ी कूटनीतिक जीत के मायने:

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सवाल: अचानक होर्मुज में क्या हुआ और भारत को यह कूटनीतिक कामयाबी कैसे मिली?

जवाब: ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे भीषण युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव चरम पर है। विदेशी जहाजों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसी बीच, भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच एक उच्च-स्तरीय कूटनीतिक वार्ता हुई। इस बातचीत का सीधा और त्वरित असर यह हुआ कि ईरान ने 'भारत के झंडे वाले' टैंकरों को इस क्षेत्र से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी। 

सवाल: इस कूटनीतिक समझौते का जमीनी असर क्या देखने को मिला?

जवाब: कूटनीतिक सहमति बनते ही इसके नतीजे समुद्र में दिखने लगे। समझौते के तुरंत बाद दो भारतीय तेल टैंकर, 'पुष्पक' और 'परिमल', इस संवेदनशील जलडमरूमध्य से बिल्कुल सुरक्षित गुजरते हुए देखे गए। यह ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका, यूरोप और इस्राइल के जहाज अब भी प्रतिबंधों और हमलों के गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं।

सवाल: ईरान की रणनीति क्या है और वह दूसरे देशों के जहाजों को क्यों रोक रहा है?

जवाब: ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। ईरान ने खुली चेतावनी दी है कि वह 'अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक लीटर तेल भी यहां से नहीं गुजरने देगा'। उसका मुख्य मकसद इस महत्वपूर्ण चोकपॉइंट को नियंत्रित करके दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था को झकझोरना और पश्चिमी देशों पर दबाव बनाना है। 

सवाल: भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस कामयाबी के क्या मायने हैं?

जवाब: होर्मुज का रास्ता कच्चे तेल की सप्लाई के लिए दुनिया की जीवनरेखा है। युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने के डर से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में, जब दुनिया भर के टैंकर निशाने पर हैं, केवल भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलने से देश की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला मजबूत बनी रहेगी। इससे भारत में तेल की किल्लत और महंगाई का खतरा काफी हद तक कम हो गया है।

यह घटना साबित करती है कि युद्ध के चरम दौर में भी भारत की स्वतंत्र कूटनीति कितनी प्रभावी है। जहां एक ओर पश्चिम एशिया में स्थिति लगातार बिगड़ रही है, वहीं भारत ने बिना किसी टकराव के, सिर्फ बातचीत से अपने आर्थिक हितों और ऊर्जा सप्लाई को सुरक्षित कर लिया है।

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