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शख्सियत: एपल के नए सीईओ जॉन टर्नस, हार्डवेयर इंजीनियरिंग जगत में 'मशीनों के जादूगर' ने कैसे रचा इतिहास

अमर उजाला Published by: Shubham Kumar Updated Mon, 27 Apr 2026 11:19 AM IST
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सार

काम को आदर्श ढंग से करने का ऐसा जुनून कि सूक्ष्म से सूक्ष्म पेंच की डिजाइन भी खुद ही तय करते हैं। तभी तो, इन्हें मशीनों का जादूगर और इंजीनियरों का इंजीनियर कहा जाता है। तीन दशकों से भी ज्यादा समय बाद अगर एक हार्डवेयर इंजीनियर एपल का सीईओ बना है, तो इनमें कुछ तो बात होगी।

Apple New CEO John Ternus How the Wizard of Machines Made History in the World of Hardware Engineering
जॉन टर्नस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

नब्बे का दशक था और जगह थी पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी का कैंपस। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पढ़ने वाले एक छात्र ने ऐसी मशीन बनाई, जिसकी मदद से वे लोग अपने हाथों का इस्तेमाल किए बिना खाना खा सकें, जो शारीरिक रूप से अक्षम थे। मशीन का नाम था-मैकेनिकल फीडिंग आर्म। यह मशीन सिर की हलचल से नियंत्रित होती थी। कुछ साल बाद, जब वह एक बड़ी टेक कंपनी में बतौर जूनियर इंजीनियर शामिल हुआ, तो उसे एक कंप्यूटर मॉनिटर के पिछले हिस्से का स्कू डिजाइन करने का छोटा-सा काम मिला।

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एक बार वह इंजीनियर आधी रात के बाद भी जगा हुआ था। यह काम को आदर्श ढंग से यानी परफेक्शन के साथ निपटाने का उसका जुनून ही था, जो वह मैग्नीफाइंग ग्लास को हाथ में लेकर आधी रात को पेंच की लकीरें गिन रहा था। उसकी सादगी ऐसी कि प्रमोशन के बाद मिले आलीशान प्राइवेट केबिन के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया। उसने कहा कि वह अपने साथियों के साथ ही काम करेगा। यह वही शख्स था, जिसने एपल आईपैड की हर पीढ़ी, एयरपॉड्स की दुनिया और आईफोन के क्रांतिकारी बदलावों को अपनी देखरेख में मुकम्मल किया।
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उसकी इंजीनियरिंग की समझ इतनी गहरी थी कि सहकर्मी उसे 'इंजीनियरों का इंजीनियर' कहने लगे। वर्षों तक पर्दे के पीछे रहकर आईफोन और मैक जैसे उत्पादों को तराशने वाला जॉन टर्नस आज पूरी दुनिया की सुर्खियों में है। जॉन टर्नस के आज चर्चा में होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि एपल ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि टिम कुक के पद छोड़ने के बाद, एक सितंबर, 2026 से टर्नस कंपनी के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में कमान संभालेंगे। टर्नस, तीन दशकों से भी ज्यादा समय में एपल के पहले ऐसे सीईओ होंगे, जो हार्डवेयर पृष्ठभूमि से आए हैं।

हार्डवेयर के दिग्गज
टर्नस केवल एक हार्डवेयर विशेषज्ञ ही नहीं हैं, बल्कि उनके पास इस बात का गहरा विजन है कि सॉफ्टवेयर को हार्डवेयर की सेवा कैसे करनी चाहिए। वह आईओएस से अलग आईपैडओएस बनाने के शुरुआती समर्थकों में से एक थे। उन्होंने एपल के सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग प्रमुख क्रेग फेडेरिधी से इस बात की पैरवी की थी कि आईपैड का शक्तिशाली हार्डवेयर मोबाइल फोन ऑपरेटिंग सिस्टम के कारण अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहा है, और इसे अपनी पहचान बनाने के लिए एक अलग प्लेटफॉर्म की जरूरत है।

शुरुआती कदम
जॉन टर्नस का जन्म 1975 में कैलिफोर्निया, अमेरिका में हुआ था। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया से 1997 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। टर्नस के कॅरिअर की शुरुआत वर्चुअल रिसर्च सिस्टम्स में एक मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में हुई, जहां उन्होंने वर्चुअल रियलिटी हेडसेट्स पर काम किया। उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 2001 में आया, जब उन्होंने एपल कंपनी जॉइन की। एपल में उनका सफर एक प्रोडक्ट डिजाइन' टीम के सदस्य के रूप में शुरू हुआ। अपनी तकनीकी समझ और नेतृत्व क्षमता के कारण वे धीरे-धीरे ऊंचाइयों पर चढ़ते गए। 2013 में उन्हें हार्डवेयर इंजीनियरिंग का उपाध्यक्ष बनाया गया और 2021 में वह सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के पद पर आसीन हुए।

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बेजोड़ तैराक
टर्नस कॉलेज के दिनों में एक शानदार एथलीट थे। वह एक प्रतिस्पर्धी तैराक थे और उन्होंने एक प्रतियोगिता में 50 मीटर फ्रीस्टाइल और 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले, दोनों में जीत हासिल की थी। उन्हें कॉलेज की पुरुषों की तैराकी टीम के लिए 'ऑल-टाइम लेटर विनर (शीर्ष खिलाड़ी) नामित किया गया था। टर्नस एक शौकिया रैली कार रेसर है। वह अपने सहयोगियों को वाशिंगटन के ऊपरी इलाकों में रेसिंग के लिए भी ले जा चुके हैं।

अजीबोगरीब उपनाम
जॉन टर्नस को स्कूबा डाइविंग का भी शौक है। उन्हें पानी के अंदर वीडियो और फोटो लेना बेहद पसंद है। वह साइकिल चलाने के शौकीन माने जाते हैं। जॉन टर्नस ने विश्वविद्यालय में रखी एकमात्र सीएनसी मिलिंग मशीन को एक प्रोजेक्ट बनाने के दौरान तोड़ दिया था। उसी कारण लोग उन्हें 'क्रैश' उपनाम से पुकारने लगे। जॉन टर्नस स्टीव जॉब्स और टिम कुक को अपना मार्गदर्शक मानते हैं। टर्नस को त्वरित और निर्णायक सोच के लिए जाना जाता है। उनकी अद्भुत इंजीनियरिंग सूझबूझ और जटिल समस्याओं के सरल समाधान खोजने की कला के कारण उन्हें मशीनों का जादूगर भी कहा जाता है।

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