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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Beware of These Home Loan Mistakes: 6 Tips to Avoid Financial Pitfalls While Buying a House on EMI

होम लोन की ईएमआई से कट रही है जेब?: घर खरीदने से पहले इन छह गलतियों से बचें, वरना हो जाएगा लाखों का नुकसान

Sat, 27 Jun 2026 07:29 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 27 Jun 2026 07:29 PM IST
सार

ईएमआई पर सपनों का घर खरीदने प्लान है? तो होम लोन लेते समय होने वाली इन आम गलतियों को जरूर जान लें, वरना लाखों का नुकसान हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें!

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Beware of These Home Loan Mistakes: 6 Tips to Avoid Financial Pitfalls While Buying a House on EMI
ईएमआई पर घर खरीदने से पहले बरतें यह सावधानी। - फोटो : amarujala.com

विस्तार

होम लोन एक लंबी अवधि की वित्तीय जिम्मेदारी है, और इस प्रक्रिया के दौरान की गई छोटी सी गलती भी समय के साथ लोन की कुल लागत को काफी बढ़ा सकती है। सपनों का घर खरीदने की जल्दबाजी या आधी-अधूरी जानकारी के कारण लोग अक्सर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका खामियाजा उन्हें पूरी जिंदगी भारी ईएमआई और अतिरिक्त खर्च के रूप में चुकाना पड़ता है।

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आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ईएमआई पर घर लेते समय आपको कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।

क्या आप भी सिर्फ ब्याज दर देखकर बैंक चुनते हैं?

ज्यादातर लोग होम लोन लेते समय सिर्फ सबसे कम ब्याज दर देखकर बैंक चुन लेते हैं, लेकिन यह सही तरीका नहीं है। मान लीजिए, एक बैंक की ब्याज दर 0.25 प्रतिशत कम है, लेकिन अगर उसकी प्रोसेसिंग फीस 25,000 से 40,000 रुपये ज्यादा है, तो कम ब्याज का सारा फायदा खत्म हो जाता है। इसलिए, हमेशा 'कुल खर्च' की तुलना करें, जिसमें ब्याज, प्रोसेसिंग फीस, लीगल चार्ज और इंश्योरेंस प्रीमियम शामिल हों।

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ईएमआई कम रखने के लिए सबसे लंबी अवधि चुनना कितना सही है?

लोन चुकाने की अवधि जितनी लंबी होगी, आपकी मासिक ईएमआई उतनी ही कम होगी, लेकिन कुल ब्याज का बोझ उतना ही बढ़ जाएगा। उदाहरण के लिए, 8.5% ब्याज पर 45 लाख रुपये के लोन की अवधि अगर 15 की जगह 20 साल कर दी जाए, तो ईएमआई लगभग 5,200 रुपये कम हो जाएगी, लेकिन आपको कुल ब्याज के रूप में लगभग 14 लाख रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर का उपयोग करें और कोशिश करें कि ऐसी अवधि चुनें जो आपकी जेब पर भारी न पड़े और ब्याज भी बचाए।

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क्या आपने घर खोजने से पहले अपनी लोन एलिजिबिलिटी चेक की है?

कई खरीदार पहले प्रॉपर्टी फाइनल कर लेते हैं और कीमत तय करने के बाद लोन के लिए आवेदन करते हैं। यदि बैंक से उम्मीद से कम लोन पास होता है, तो खरीदार पर आर्थिक दबाव बढ़ता है या डील रद्द भी हो सकती है। इसलिए, घर खोजना शुरू करने से पहले हाउसिंग लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर के जरिए जांच लें कि आपकी आय के आधार पर आपको कितना लोन मिल सकता है। 

बैंक ने प्रॉपर्टी पास कर दी, तो क्या वह 100% सुरक्षित है?

बैंक प्रॉपर्टी की जांच सिर्फ अपने जोखिम (मालिकाना हक और निर्माण की गुणवत्ता) को कम करने के लिए करते हैं। कई खरीदार मानते हैं कि बैंक ने लोन दे दिया तो प्रॉपर्टी पूरी तरह सुरक्षित है, जो कि गलत है। कानूनी विवाद, मालिकाना हक का इतिहास या अनधिकृत निर्माण जैसी समस्याएं बाद में सामने आ सकती हैं। प्रॉपर्टी के टाइटल की स्वतंत्र कानूनी जांच करवाएं और निर्माणाधीन प्रोजेक्ट का रेरा रजिस्ट्रेशन जरूर चेक करें।

डाउन पेमेंट के अलावा किन छिपे हुए खर्चों की तैयारी जरूरी है?

घर खरीदते समय केवल डाउन पेमेंट ही इकलौता बड़ा खर्च नहीं होता। प्रॉपर्टी की कीमत का चार से आठ फीसदी हिस्सा स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन में चला जाता है, जिसका भुगतान नकद करना होता है। अगर आप 70 लाख रुपये का घर ले रहे हैं, तो सिर्फ स्टांप ड्यूटी ही 3.5 से 5.5 लाख रुपये तक हो सकती है। इसके अलावा प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी, लीगल वेरिफिकेशन और इंटीरियर के खर्चे के लिए चार से सात लाख रुपये का अतिरिक्त बजट बनाकर चलें।

फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट में से क्या चुनें और लोन की समीक्षा क्यों जरूरी है?

लोन एग्रीमेंट साइन करने से पहले फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट के अंतर को समझना जरूरी है। फिक्स्ड रेट में ईएमआई पूरे समय समान रहती है, जबकि फ्लोटिंग रेट में बाजार के अनुसार बदलाव होता है। इसके अलावा, लोन लेने के बाद भी इसे लावारिस न छोड़ें। दो साल बाद क्रेडिट स्कोर सुधरने पर बैंक से ब्याज दर कम करने का अनुरोध करें और बोनस या अतिरिक्त फंड मिलने पर पार्ट-प्रीपेमेंट करें।

कैसी हो लोन पर घर खरीदने की रणनीति?

होम लोन की गलतियां काफी महंगी साबित होती हैं क्योंकि उनका असर 15-20 वर्षों तक रहता है। ब्याज दर के साथ-साथ कुल लागत पर ध्यान देना, सही अवधि चुनना, संपत्ति की कानूनी जांच और सभी खर्चों का सही बजट बनाना जरूरी है। लोन लेने से पहले इन सावधानियों को अपनाना और साल में कम से कम एक बार अपने लोन की समीक्षा करना आपको भविष्य में होने वाले बड़े वित्तीय नुकसान से बचा सकता है।

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