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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   SEBI: Changes to enhance price discovery and transparency in commodity ETFs to come into effect from Sept 1

SEBI: कमोडिटी ईटीएफ में प्राइस डिस्कवरी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 1 सितंबर से लागू होगा बदलाव; पढ़ें नियम

Mon, 29 Jun 2026 06:58 AM IST
Pavan अजय केडिया, डायरेक्टर, केडिया एडवाइजरी
अजय केडिया, डायरेक्टर, केडिया एडवाइजरी Published by: Pavan Updated Mon, 29 Jun 2026 06:58 AM IST
सार

1 सितंबर 2026 से सेबी गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ समेत कई ईटीएफ श्रेणियों में नई ट्रेडिंग व्यवस्था लागू करेगा। इसके तहत प्री-ओपन कॉल ऑक्शन और डायनेमिक प्राइस बैंड लागू होंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर भारतीय बाजार में अधिक सटीक रूप से दिखेगा। नई व्यवस्था से बेहतर मूल्य पारदर्शिता, अधिक तरलता और ईटीएफ की कीमतों व एनएवी के बीच बेहतर तालमेल मिलेगा।

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SEBI: Changes to enhance price discovery and transparency in commodity ETFs to come into effect from Sept 1
अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अगर आप भी अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के लिए सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में पैसा लगाते हैं, तो आगामी 1 सितंबर 2026 से ट्रेडिंग के नियम पूरी तरह बदलने जा रहे हैं। अब तक अक्सर देखा जाता था कि जब अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में रात के समय बड़ी उठापटक होती थी, तो भारतीय ईटीएफ बाजार अगले दिन तुरंत उस बदलाव को सही तरीके से नहीं दिखा पाते थे। इसी विसंगति को दूर करने और निवेशकों को हकीकत के करीब लाने के लिए बाजार नियामक सेबी प्री-ओपन कॉल ऑक्शन मैकेनिज्म और डायनेमिक प्राइस बैंड का नया फॉर्मूला लेकर आया है।  
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क्या है सेबी का नया फॉर्मूला और यह कैसे काम करेगा?
  • नए नियमों के तहत कमोडिटी ईटीएफ (खासकर गोल्ड और सिल्वर फंड्स) के लिए ट्रेडिंग की शुरुआत प्लस/माइनस 6% के शुरुआती प्राइस बैंड के साथ होगी।
  • यदि बाजार में उतार-चढ़ाव बहुत तेज होता है, तो एक निश्चित कूलिंग-ऑफ पीरियड के बाद इस प्राइस बैंड को 3-3 फीसदी के दायरे में और आगे बढ़ाया जा सकेगा।
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  • मौजूदा सिस्टम के विपरीत, अब नए नियमों में इस बात की कोई ऊपरी सीमा नहीं होगी कि एक ही ट्रेडिंग सेशन के दौरान इस बैंड को कितनी बार चौड़ा किया जा सकता है। इससे कीमतों में होने वाले वैश्विक उतार-चढ़ाव को तुरंत भारतीय बाजारों में एडजस्ट किया जा सकेगा।
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आधार कीमत भी होगी नए तरीके से तय
सेबी ने ईटीएफ की आधार कीमत तय करने के तरीके में भी सुधार किया है। सितंबर 2026 से, पिछले कारोबारी दिन के आखिरी 30 मिनट के क्लोजिंग प्राइस को ही संदर्भ मूल्य माना जाएगा। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान अचानक से दिखने वाले भारी प्रीमियम या डिस्काउंट को कम करने में मदद मिलेगी।

निवेशकों को फायदे?
  • इसका सबसे बड़ा फायदा बेहतर मूल्य पारदर्शिता और निष्पक्ष निष्पादन होगा।
  • यह नया तंत्र बाजार सहभागियों को नियमित कारोबार शुरू होने से पहले अधिक सटीक शुरुआती कीमत खोजने की अनुमति देगा।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में रातों-रात जो भी उतार-चढ़ाव होगा, वह अगले दिन सुबह भारतीय ईटीएफ निवेशकों को अधिक सटीक रूप से दिखाई देगा।
  • नया प्राइसिंग मैकेनिज्म और प्री-ओपन ऑक्शन सिस्टम मार्केट में कृत्रिम रूप से बढ़ने या घटने वाले प्रीमियम/डिस्काउंट को रोकेगा, जिससे आम निवेशकों को सही कीमत पर यूनिट्स मिलेंगी।
  • डायनेमिक बैंड होने से बड़े संस्थागत निवेशकों और मार्केट मेकर्स को ट्रेडिंग करने में आसानी होगी, जिससे बाजार में तरलता बढ़ेगी।
  • निवेशकों को कम मूल्य विस्थापन, बेहतर तरलता, ईटीएफ कीमतों और एनएवी के बीच बेहतर तालमेल, और तर्कहीन कीमतों पर घबराहट के कारण होने वाली खरीद या बिक्री की कम संभावनाओं के माध्यम से लाभ होने की उम्मीद।

नई बनाम पुरानी व्यवस्था
ईटीएफ श्रेणी मौजूदा व्यवस्था नई व्यवस्था (1 सितंबर 2026 से लागू)
कमोडिटी ईटीएफ (गोल्ड और सिल्वर) फिक्स्ड ±5% से 10% बैंड प्री-ओपन ऑक्शन + डायनेमिक बैंड। शुरुआत ±6% से होगी, इसके बाद 3% के स्टेप्स में बैंड बढ़ेगा। ऊपरी सीमा नहीं होगी।
इक्विटी ईटीएफ फिक्स्ड ±10% बैंड डायनेमिक बैंड व्यवस्था। शुरुआत ±10% से होगी, कूलिंग-ऑफ के बाद ±20% तक विस्तार संभव।
डेट ईटीएफ फिक्स्ड ±10% बैंड इक्विटी ईटीएफ की तरह डायनेमिक बैंड व्यवस्था लागू होगी।
लिक्विड ईटीएफ फिक्स्ड ±5% बैंड कोई बदलाव नहीं, ±5% बैंड यथावत रहेगा।
करेंसी/ओवरनाइट ईटीएफ फिक्स्ड ±5% बैंड बैंड ±5% ही रहेगा, लेकिन क्लोज-आउट नियमों में संशोधन किया जाएगा।


सिल्वर ईटीएफ में क्या हो अब रणनीति?
हालिया सुधार को मुख्य रूप से मुनाफावसूली और बदलती व्यापक आर्थिक उम्मीदों के संयोजन के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि एक संरचनात्मक मंदी की शुरुआत के रूप में।
  • चांदी का उपयोग सोलर पैनलों, इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है, जिससे संरचनात्मक मांग को समर्थन मिलता है। सोना-चांदी अनुपात, जो 100 से ऊपर से गिरकर लगभग 66 पर आ गया है, चांदी के हालिया बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। चांदी की आपूर्ति सीमित बनी हुई है और मांग का आउटलुक मजबूत है। 2 से 5 साल के नजरिये से चांदी अधिक आकर्षक दिखाई देती है।
  • मौजूदा निवेशकों के लिए, यह घबराहट में बिकवाली करने का चरण नहीं है। दीर्घकालिक निवेशक अपनी पोजीशन बनाए रख सकते हैं, जबकि एसआईपी निवेशकों को अपना व्यवस्थित निवेश जारी रखना चाहिए। नए निवेशक एकमुश्त निवेश के बजाय धीरे-धीरे खरीदारी करने पर विचार कर सकते हैं।

नोट: सेबी ने लिक्विड और ओवरनाइट ईटीएफ के लिए क्लोज-आउट मानदंडों को भी विशेष रूप से संशोधित किया है, ताकि बाजार की विसंगतियों को कम करके सेटलमेंट की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जा सके।
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