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क्या आपका बचत खाता जरूरत के हिसाब से सही है?: आपकी जेब और बचत पर भारी पड़ेगा आलस्य, आदत के हिसाब से करें चुनाव
Mon, 29 Jun 2026 06:47 AM IST
Pavan
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Mon, 29 Jun 2026 06:47 AM IST
सार
बचत खाता खुलवाते समय केवल सुविधा नहीं, बल्कि अपनी बैंकिंग जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। खाते का चुनाव सैलरी, खर्च, ब्याज दर और बैंक नेटवर्क के आधार पर करें। न्यूनतम बैलेंस, डेबिट कार्ड, एसएमएस और अन्य छिपे शुल्कों पर नजर रखें। बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए अधिकतम दो खाते रखें और उनके उपयोग का उद्देश्य पहले से तय करें।
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क्या आपका बचत खाता जरूरत के हिसाब से सही है?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
नया बचत खाता खुलवाना अक्सर एक बेहद साधारण काम लगता है। हम में से ज्यादातर लोग नौकरी शुरू करते वक्त एक खाता खुलवा लेते हैं, हर महीने उसमें सैलरी आती है और हम कभी मुड़कर नहीं देखते कि उस खाते के नियम-शर्तें क्या हैं... ...लेकिन हकीकत यह है कि आपका यही आलस्य आपकी जेब और बचत पर भारी पड़ता है।
बैंकिंग आदतों के हिसाब से चुनें खाता
बचत खाता चुनते समय सबसे पहले अपनी मुख्य जरूरतों को पहचानें। सभी बचत खाते एक ही तरह से काम नहीं करते।
छुप-छुप कर कटने वाले शुल्क
बैंक अक्सर वह शुल्क नहीं बताते, जो आपके खाते से अचानक कट जाते हैं।
बहुत ज्यादा कैश न रखें
बचत खाता निवेश का साधन नहीं है। यह सिर्फ शॉर्ट-टर्म खर्चों, बिलों, ईएमआई और इमरजेंसी कैश के लिए है। अपने लाखों रुपए 3% वाले सेविंग्स अकाउंट में लावारिस छोड़ देना वित्तीय नुकसान है। प्राइमरी खाते में सिर्फ 1 से 2 महीने का खर्च रखें। बाकी का 3 से 6 महीने का इमरजेंसी फंड किसी हाई-इंटरेस्ट सेविंग्स अकाउंट या लिक्विड म्यूचुअल फंड में डालें, जहां बेहतर रिटर्न भी मिले और 24 घंटे में पैसा वापस भी निकाला जा सके।
जरूरी सलाह
ज्यादा खातों के बजाय अधिकतम दो खाते रखें, जिसका निश्चित लक्ष्य हो। प्राइमरी अकाउंट में आपकी सैलरी आती हो और जिससे आपके खर्च, ईएमआई और एसआईपी ऑटो-डेबिट होते हों। सेकेंडरी अकाउंट में पैसा आप केवल इमरजेंसी फंड या छोटी अवधि के लक्ष्यों के लिए रखें और जहां ब्याज दर ज्यादा मिले। अगर पति-पत्नी मिलकर घर का खर्च (किराया, राशन, बिजली बिल) चलाते हैं, तो एक ज्वाइंट अकाउंट रखें ताकि पर्सनल सेविंग्स अलग रहे।
डिस्क्लेमर: ये विचार, राय और निवेश संबंधी सुझाव अलग-अलग विशेषज्ञों, ब्रोकर फर्मों या रिसर्च संस्थानों के हैं। इनसे अखबार या उसके प्रबंधन की सहमति जरूरी नहीं है। कृपया किसी भी तरह का निवेश फैसला लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी अखबार या उसके प्रबंधन की नहीं होगी।
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बैंकिंग आदतों के हिसाब से चुनें खाता
बचत खाता चुनते समय सबसे पहले अपनी मुख्य जरूरतों को पहचानें। सभी बचत खाते एक ही तरह से काम नहीं करते।
- अगर आपका मुख्य उद्देश्य हर महीने सैलरी आना और रोजाना के बिल पेमेंट, ईएमआई या यूपीआई करना है, तो एक स्टैंडर्ड सैलरी अकाउंट या लो-मिनिमम बैलेंस खाता सबसे मुफीद है।
- अगर आप खाते में बड़ी रकम जमा रखते हैं, तो उन स्मॉल फाइनेंस या चुनिंदा प्राइवेट बैंकों को देखें जो डेली बैलेंस पर 6 से 7 फीसदी तक का ऊंचा ब्याज दे रहे हैं।
- यदि आपको बार-बार नकद जमा करने, डिमांड ड्राफ्ट बनवाने या बैंक जाकर काम कराने की जरूरत पड़ती है, तो मजबूत शाखा और एटीएम नेटवर्क वाले बैंक को प्राथमिकता दें।
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छुप-छुप कर कटने वाले शुल्क
बैंक अक्सर वह शुल्क नहीं बताते, जो आपके खाते से अचानक कट जाते हैं।
- सबसे आम और बड़ा शुल्क न्यूनतम बैलेंस मेंटेन न करने का है।
- फ्री विड्रॉल सीमा के बाद हर ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगता है।
- डेबिट कार्ड की सालाना फीस, एसएमएस अलर्ट चार्ज और फ्री लिमिट के बाद चेकबुक के लिए लगने वाली फीस पर नजर रखें।
बहुत ज्यादा कैश न रखें
बचत खाता निवेश का साधन नहीं है। यह सिर्फ शॉर्ट-टर्म खर्चों, बिलों, ईएमआई और इमरजेंसी कैश के लिए है। अपने लाखों रुपए 3% वाले सेविंग्स अकाउंट में लावारिस छोड़ देना वित्तीय नुकसान है। प्राइमरी खाते में सिर्फ 1 से 2 महीने का खर्च रखें। बाकी का 3 से 6 महीने का इमरजेंसी फंड किसी हाई-इंटरेस्ट सेविंग्स अकाउंट या लिक्विड म्यूचुअल फंड में डालें, जहां बेहतर रिटर्न भी मिले और 24 घंटे में पैसा वापस भी निकाला जा सके।
जरूरी सलाह
ज्यादा खातों के बजाय अधिकतम दो खाते रखें, जिसका निश्चित लक्ष्य हो। प्राइमरी अकाउंट में आपकी सैलरी आती हो और जिससे आपके खर्च, ईएमआई और एसआईपी ऑटो-डेबिट होते हों। सेकेंडरी अकाउंट में पैसा आप केवल इमरजेंसी फंड या छोटी अवधि के लक्ष्यों के लिए रखें और जहां ब्याज दर ज्यादा मिले। अगर पति-पत्नी मिलकर घर का खर्च (किराया, राशन, बिजली बिल) चलाते हैं, तो एक ज्वाइंट अकाउंट रखें ताकि पर्सनल सेविंग्स अलग रहे।
डिस्क्लेमर: ये विचार, राय और निवेश संबंधी सुझाव अलग-अलग विशेषज्ञों, ब्रोकर फर्मों या रिसर्च संस्थानों के हैं। इनसे अखबार या उसके प्रबंधन की सहमति जरूरी नहीं है। कृपया किसी भी तरह का निवेश फैसला लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी अखबार या उसके प्रबंधन की नहीं होगी।