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डिग्री पर भारी हुनर: भारतीय ब्लू-कॉलर जॉब मार्केट में दिख रहा बड़ा बदलाव, अब '10वीं पास' नहीं होने पर भी काम

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 15 Jan 2026 04:52 PM IST
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सार

Report on Blue Collar Jobs: ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत के ब्लू-कॉलर भर्ती क्षेत्र में औपचारिक डिग्री की तुलना में व्यावहारिक कौशल को प्राथमिकता दी जा रही है। '10वीं से कम' शिक्षा अब सबसे पसंदीदा योग्यता बन गई है, जो देश के श्रम बाजार में एक बड़े बदलाव का संकेत है। रिपोर्ट में और क्या खास है? विस्तार से जानें।

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ब्लू कॉलर - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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भारत के ब्लू-कॉलर और ग्रे-कॉलर भर्ती क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। अब नियोक्ता औपचारिक शिक्षा या डिग्री के बजाय व्यावहारिक कौशल, काम करने की तत्परता और ऑन-फील्ड अनुभव को अधिक तरजीह दे रहे हैं। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रमुख क्षेत्रों में अब बिना किसी शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। ब्लू और ग्रे-कॉलर भर्ती प्लेटफॉर्म 'वर्कइंडिया' की रिपोर्ट 'द एसेंडेंस ऑफ स्किल्स इन इंडियन ब्लू-कॉलर हायरिंग' में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि अब नौकरी के विज्ञापनों में '10वीं से कम' शिक्षा सबसे पसंदीदा योग्यता बनकर उभरी है। यह पारंपरिक शिक्षा पर आधारित फिल्टर से हटकर कौशल पर आधारित भर्ती की ओर बढ़ने जैसा है। 

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देश के श्रम बाजार कैसे बदल रहा?

भारत का श्रम बाजार एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। वर्कइंडिया के सह-संस्थापक और सीईओ नीलेश डूंगरवाल के अनुसार, नियोक्ता अब औपचारिक डिग्री की जगह पर कौशल, विश्वसनीयता और 'जॉब रेडीनेस' को प्राथमिकता दे रहे हैं। डूंगरवाल ने इस बदलाव के बारे में बताते हुए कहा, "यह परिवर्तन ब्लू-कॉलर भर्ती को कहीं अधिक समावेशी बना रहा है, इससे उन लाखों भारतीयों के लिए सार्थक अवसर पैदा हो रहे हैं जिनके पास औपचारिक शिक्षा नहीं है, लेकिन वे देश के आर्थिक इंजन को शक्ति देने के लिए आवश्यक कौशल जानते हैं"।

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भर्ती के मामले में महानगरों और छोटे शहरों की क्या भूमिका?

भर्ती के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि ब्लू-कॉलर नौकरियों का सृजन अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है। वर्तमान में दिल्ली 26 प्रतिशत के साथ नौकरी के विज्ञापनों में सबसे आगे है, लेकिन मांग अब तेजी से टियर-II और टियर-III शहरों की ओर बढ़ रही है। यह विकेंद्रीकरण (डीसेंट्रलाइजेशन) इस बात का प्रमाण है कि ब्लू-कॉलर नौकरियों के अवसर अब पूरे देश के श्रमिकों के लिए अधिक सुलभ है और छोटे शहरों में स्थानीय स्तर पर भी लोगों को काम के मौके मिल रहे हैं। यह रिपोर्ट 2025 के दौरान प्लेटफॉर्म पर मौजूद 9,92,213 नियोक्ताओं और 1,01,76,783 कर्मचारियों के डेटा और इनपुट के आधार पर तैयार किया गया है। 

रिपोर्ट में क्षेत्रीय रुझान और आधी आबादी के बारे में क्या?

रिपोर्ट में विभिन्न क्षेत्रों में लिंग-आधारित भर्ती पैटर्न पर भी महत्वपूर्ण डेटा साझा किया गया है-

  • डिलीवरी सेक्टर: इस क्षेत्र में पुरुष उम्मीदवारों के लिए सबसे अधिक प्राथमिकता बनी हुई है।
  • टेलीकॉलिंग: महिला उम्मीदवारों की भर्ती के मामले में टेलीकॉलिंग सेक्टर सबसे आगे है।

यह साफ है कि हाई-वॉल्यूम और फ्रंटलाइन क्षेत्रों में परिचालन कौशल ही भर्ती का मुख्य आधार बन गए हैं।

2026 में रोजगार के मोर्चे पर क्या बदलेगा?

वर्कइंडिया का अनुमान है कि 2026 में कंपनियां जैसे-जैसे अपने व्यवसाय परिचालन का विस्तार करेंगे, उनका ध्यान गति, दक्षता और कार्यबल के लचीलेपन पर केंद्रित होगा। भारत में ब्लू-कॉलर भर्ती का यह नया मॉडल न केवल रोजगार के पारंपरिक पैमानों को तोड़ रहा है, बल्कि कुशल कार्यबल के लिए नए रास्ते भी खोल रहा है। औपचारिक शिक्षा की बाधा हटने से देश की एक बड़ी आबादी को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में शामिल होने का मौका मिल रहा है।


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