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Budget: F&O शेयर की ट्रेडिंग पड़ेगी महंगी, STT बढ़ाकर सरकार ने ट्रेडर्स को दिया झटका; जाने कितना पड़ेगा असर

Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Sun, 01 Feb 2026 03:37 PM IST
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Budget: F and O share trading to become more expensive, govt shocks traders by increasing STT
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला/एजेंसी
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केंद्रीय बजट 2026-27 से शेयर बाजार को बड़ी राहत नहीं मिली है। बजट में शेयर बाजार से जुड़े निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए एक घोषणा की गई है।इससे ट्रेडर्स-निवेशकों को झटका लगा है। बजट प्रस्तावों के तहत फ्यूचर और ऑप्शन दोनों पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाने का फैसला लिया गया है। यानी अब ट्रेडर्स को शेयर बाजार के सौदे पर पहले के मुकाबले पर दोगुना से ज्यादा टैक्स देना होगा
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट प्रस्तावों के अनुसार फ्यूचर्स पर एसटीटी की दर में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। अब फ्यूचर्स पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है, यानी अब ट्रेडर्स को पहले के मुकाबले डेढ़ गुना टैक्स देना होगा। वहीं वित्त मंत्री ने ऑप्शंस पर भी टैक्स बढ़ाया गया है। ऑप्शन पर एसटीटी की दर 0.1 प्रतिशत से बढ़कर 0.15 प्रतिशत कर दी गई है। इस फैसले का असर सीधे बाजार पर नजर आया है। बजट के बाद बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
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बाजार विशेषज्ञों का कहना है, इंडेक्स फ्यूचर और ऑप्शन पर एसटीटी बढ़ने से डेरिवेटिव ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी। जब लेनदेन की लागत बढ़ती है तो ट्रेडिंग वॉल्यूम पर इसका सीधा असर पड़ता है। इसी आशंका के चलते निवेशकों ने सबसे पहले एक्सचेंज और ब्रोकिंग कंपनियों के शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे इन सेक्टरों में दबाव देखने को मिला है। वित्त मंत्री का यह फैसला एक्सचेंज कंपनियों के लिए नकारात्मक माना जा रहा है। बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के लिए यह नकारात्मक माना जा रहा है। क्योंकि इन दोनों एक्सचेंज की कमाई सीधे ट्रेडिंग वॉल्यूम पर निर्भर करती है, इसलिए एसटीटी बढ़ने से इन पर असर पड़ने की आशंका है। इस घोषणा के बाद कई बड़ी वेल्थ मैनेजमेंट और ब्रोकिंग कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट आई। एसटीटी बढ़ने से एफएंडओ सेगमेंट की की एक्टिविटी पर असर पड़ सकता है। अगर वॉल्यूम घटता है, तो एक्सचेंज और ब्रोकर की कमाई भी घटेगी। यही चिंता आज बाजार में दिखी तेज बिकवाली की बड़ी वजह मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने ऑप्शन ट्रेडिंग पर एसटीटी को धीरे-धीरे बढ़ाया है। बाजार में नए निवेशकों और ट्रेडर्स की संख्या बढ़ने के कारण इसका असर शॉर्ट टर्म में जरूर दिख सकता है। हालांकि,लॉन्ग टर्म में इसका खास असर नहीं पड़ेगा। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद बाजार खुद को एडजस्ट कर लेगा और धीरे-धीरे स्थिर हो जाएगा।

दरअसल, पिछले कुछ समय से शेयर बाजार में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान आम निवेशकों को हुआ है। खास तौर पर फ्यूचर और ऑप्शन सेगमेंट में नुकसान का आंकड़ा कहीं अधिक रहा है, जिसका असर पूरे बाजार पर भी पड़ता है। सरकार का मानना है कि डेरिवेटिव सेगमेंट में जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी बाजार की अस्थिरता बढ़ती है। इसी वजह से इन पर सख्ती का मकसद अटकलों पर लगाम लगाना और बाजार को ज्यादा स्थिर बनाना है।

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क्या होता STT, भारत में कब हुआ लागू
सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) वह टैक्स है जो शेयर बाजार में होने वाले हर सौदे पर लगाया जाता है। यह टैक्स इक्विटी शेयर, इक्विटी म्यूचुअल फंड, फ्यूचर और ऑप्शन के लेनदेन पर लागू होता है। इसमें मुनाफा हो या नुकसान, हर ट्रांजैक्शन पर एटीटी देना जरूरी होता है। भारत में एसटीटी को 1 अक्टूबर 2004 से लागू किया गया था। उस समय इसका मकसद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की जगह लेना, टैक्स चोरी रोकना और टैक्स वसूली की प्रक्रिया को आसान बनाना था। हालांकि, साल 2018 के बजट में सरकार ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स दोबारा लागू कर दिया, लेकिन STT को जारी रखा गया।

बायबैक टैक्स भी लगेगा
बजट में निवेशकों के लिए बायबैक से जुड़ी एक और अहम खबर सामने आई है। अब तक कंपनियों के शेयर बायबैक पर टैक्स के नियम अलग थे, लेकिन सरकार ने इसमें बदलाव कर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि अब शेयर बायबैक से होने वाली कमाई को सभी शेयरधारकों के लिए कैपिटल गेंस माना जाएगा। यानी बायबैक से मिलने वाले मुनाफे पर अब आपकी शेयर होल्डिंग की अवधि के अनुसार शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा। इससे बायबैक पर टैक्स व्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा साफ और एक जैसी हो जाएगी।


 
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