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Budget 2026: विदेश की यात्रा से लेकर पढ़ाई और इलाज सस्ता, बजट में कम हुआ TDS और TCS

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Sun, 01 Feb 2026 04:12 PM IST
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सार

बजट 2026-27 में टैक्स में भी कुछ बदलाव देखने को मिल रहा है। TDS और TCS को भी इसमें कम करने की बात की गई है। इसके साथ ही विदेश यात्रा, शिक्षा, मेडिकल ट्रीटमेंट भी सस्ता होगा। 

Budget 2026 Foreign travel, education, and medical treatment cheaper TDS and TCS reduced
बजट 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Budget 2026: यूनियन बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम लोगों को विदेश से जुड़े खर्चों में बड़ी राहत दी है. बजट में कई टैक्स संबंधी बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जो विदेश यात्रा, शिक्षा, मेडिकल ट्रीटमेंट और विदेशी एसेट्स को आसान और सस्ता बनाएंगे.

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विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए यह प्रस्ताव

सबसे बड़ा ऐलान क्लाउड सर्विसेज सेक्टर के लिए है. इसके तहत किसी भी ग्लोबल कंपनी को भारतीय डेटा सेंटर्स का इस्तेमाल करके वैश्विक स्तर पर क्लाउड सर्विसेज देने पर 2047 तक टैक्स हॉलिडे मिलेगा. हालांकि, भारतीय ग्राहकों को सर्विस देने के लिए भारतीय रिसेलर एंटिटी के जरिए काम करना होगा. यह कदम भारत को ग्लोबल डेटा हब बनाने और एआई, आईटी में निवेश आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, खासकर जब वैश्विक क्लाउड मार्केट में भारत की हिस्सेदारी बढ़ रही है.

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फॉरेन एसेट डिस्क्लोजर स्कीम की घोषणा

छोटे टैक्सपेयर्स जैसे स्टूडेंट्स, टेक प्रोफेशनल्स और रिलोकेटेड एनआरआई के लिए 6 महीने की ‘फॉरेन एसेट डिस्क्लोजर स्कीम’ शुरू की गई है. यह स्कीम उन लोगों के लिए है, जिन्होंने विदेशी इनकम या एसेट्स को पहले डिस्क्लोज नहीं किया या इनकम डिस्क्लोज की लेकिन एसेट नहीं. इस योजना के तहत पेनल्टी देकर अघोषित आय और संपत्ति के मामले में मुकदमे से बचा जा सकेगा. यह स्कीम ब्लैक मनी एक्ट के तहत पारदर्शिता बढ़ाएगी और अनुपालन को आसान बनाएगी.

टीसीएस और टीडीएस हो गया इतना कम

इसके अलावा टीसीएस (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) में बड़ी कटौती की गई है, जो लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत विदेशी रेमिटेंस पर लागू होती है. ओवरसीज टूर पैकेज पर टीसीएस अब 5 फीसदी और 20 फीसदी (10 लाख रुपए से ज्यादा पर) की जगह फ्लैट 2 फीसदी होगा, बिना किसी अमाउंट लिमिट के. एजुकेशन और मेडिकल पर्पस के लिए एलआरएस रेमिटेंस पर टीसीएस 5 फीसदी से घटकर 2 फीसदी हो गया है. इससे विदेश में पढ़ाई या इलाज के लिए पैसे भेजना सस्ता पड़ेगा.

इसके अलावा, सप्लाई ऑफ मैनपावर सर्विसेज को स्पष्ट रूप से कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट्स के दायरे में लाया गया है, ताकि अस्पष्टता दूर हो. अब इन सर्विसेज पर टीडीएस सिर्फ 1 फीसदी या 2 फीसदी होगा. ये बदलाव विदेश यात्रा और रेमिटेंस को प्रोत्साहित करेंगे. साथ ही भारत को विदेशी निवेश के लिए आकर्षक बनाएंगे.

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