{"_id":"6a3f40f60b9ca1a87708bcac","slug":"business-updates-of-27-june-business-news-anil-ambani-crude-oil-share-market-news-in-hindi-2026-06-27","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"BIZ Updates: कोटक महिंद्रा बैंक के CEO वासवानी पद छोड़ेंगे; अनिल अंबानी व रिलायंस इंफ्रा को सेबी से झटका","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
BIZ Updates: कोटक महिंद्रा बैंक के CEO वासवानी पद छोड़ेंगे; अनिल अंबानी व रिलायंस इंफ्रा को सेबी से झटका
Sat, 27 Jun 2026 08:48 AM IST
Pavan
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
Published by: Pavan
Updated Sat, 27 Jun 2026 08:48 AM IST
विज्ञापन
शेयर बाजार, कारोबार और वाणिज्य जगत की अहम खबरें
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोटक महिंद्रा बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक अशोक वासवाणी ने व्यक्तिगत कारणों से 31 दिसंबर, 2026 को अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पद छोड़ने का फैसला लिया है। इसके बाद भारत के चौथे सबसे बड़े निजी ऋणदाता बैंक के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो गई है। वासवाणी ने 1 जनवरी, 2024 को मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पदभार संभाला था। रॉयटर्स के मुताबिक इस मामले में नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के कार्यकारी निदेशक आनंद दामा ने कहा कि वासवाणी का इस्तीफा प्रबंधन से जुड़ी अनिश्चितता बढ़ाएगा। इससे बैंक के शेयर में गिरावट आ सकती है।
अनिल अंबानी व रिलायंस इंफ्रा को SEBI से झटका
पूंजी बाजार नियामक सेबी ने उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की उस सेटलमेंट अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी के करीब 6,526 करोड़ के कथित दुरुपयोग मामले को निपटाने की मांग की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, यस बैंक निवेश मामले के बाद यह दूसरा मौका है, जब सेबी ने अनिल अंबानी की अर्जी खारिज की है। सेबी ने सितंबर 2025 में जारी अंतरिम आदेश में कहा था कि रिलायंस इंफ्रा के धन का उपयोग कुछ इस तरह किया गया कि अनिल अंबानी से जुड़े पक्षों को लाभ पहुंचने की आशंका है। रिलायंस इंफ्रा ने इंजीनियरिंग फर्म सीएलई प्राइवेट लि. के लिए लगभग 6,526 करोड़ के एक्सपोजर की जानकारी दी थी और उसे स्वतंत्र कंपनी बताया था। सेबी का आरोप है कि 2024 तक रिलायंस इंफ्रा ने कुल 17,670 करोड़ रुपये सीएलई को ट्रांसफर किए। बाद में सीएलई ने करीब 11,200 करोड़ अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों में निवेश किए।
विज्ञापन
अनिल अंबानी व रिलायंस इंफ्रा को SEBI से झटका
पूंजी बाजार नियामक सेबी ने उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की उस सेटलमेंट अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी के करीब 6,526 करोड़ के कथित दुरुपयोग मामले को निपटाने की मांग की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, यस बैंक निवेश मामले के बाद यह दूसरा मौका है, जब सेबी ने अनिल अंबानी की अर्जी खारिज की है। सेबी ने सितंबर 2025 में जारी अंतरिम आदेश में कहा था कि रिलायंस इंफ्रा के धन का उपयोग कुछ इस तरह किया गया कि अनिल अंबानी से जुड़े पक्षों को लाभ पहुंचने की आशंका है। रिलायंस इंफ्रा ने इंजीनियरिंग फर्म सीएलई प्राइवेट लि. के लिए लगभग 6,526 करोड़ के एक्सपोजर की जानकारी दी थी और उसे स्वतंत्र कंपनी बताया था। सेबी का आरोप है कि 2024 तक रिलायंस इंफ्रा ने कुल 17,670 करोड़ रुपये सीएलई को ट्रांसफर किए। बाद में सीएलई ने करीब 11,200 करोड़ अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों में निवेश किए।
विज्ञापन
विदेशी मुद्रा भंडार 96.3 करोड़ डॉलर बढ़ा
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार 19 जून को समाप्त सप्ताह में 96.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 672.58 अरब डॉलर हो गया। पिछले सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार में 9.98 अरब डॉलर की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद यह 671.62 अरब डॉलर पर आ गया था। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां घटकर 541.21 अरब डॉलर रह गईं। बीते सप्ताह स्वर्ण भंडार में तेज बढ़त हुई। इसका मूल्य 4.11 अरब डॉलर बढ़कर 107.93 अरब डॉलर हो गया।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार 19 जून को समाप्त सप्ताह में 96.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 672.58 अरब डॉलर हो गया। पिछले सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार में 9.98 अरब डॉलर की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद यह 671.62 अरब डॉलर पर आ गया था। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां घटकर 541.21 अरब डॉलर रह गईं। बीते सप्ताह स्वर्ण भंडार में तेज बढ़त हुई। इसका मूल्य 4.11 अरब डॉलर बढ़कर 107.93 अरब डॉलर हो गया।
कच्चा तेल 10 फीसदी साप्ताहिक गिरावट के करीब
होर्मुज में टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने पर मंडरा रहे नए खतरों के बीच शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 3 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों बेंचमार्क इस सप्ताह लगभग 10 फीसदी की साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ते दिखे। ब्रेंट क्रूड 2.58 डॉलर यानी 3.43 फीसदी गिरकर 72.68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि डब्ल्यूटीआई का भाव 2.50 डॉलर यानी 3.48 फीसदी टूटकर 69.42 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
होर्मुज में टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने पर मंडरा रहे नए खतरों के बीच शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 3 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों बेंचमार्क इस सप्ताह लगभग 10 फीसदी की साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ते दिखे। ब्रेंट क्रूड 2.58 डॉलर यानी 3.43 फीसदी गिरकर 72.68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि डब्ल्यूटीआई का भाव 2.50 डॉलर यानी 3.48 फीसदी टूटकर 69.42 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
फॉक्सवैगन में एक लाख कर्मियों की छंटनी की तैयारी
यूरोप की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन लागत कम करने और प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने के लिए करीब एक लाख कर्मचारियों की छंटनी करने और जर्मनी में चार उत्पादन संयंत्र बंद करने की योजना पर काम कर रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ओलिवर ब्लूम ने प्रबंधन बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव रखा। इसे अगले महीने कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड के सामने चर्चा के लिए रखा जाएगा। वर्तमान में फॉक्सवैगन समूह में करीब 6.57 लाख कर्मचारी हैं। पुनर्गठन योजना के तहत कंपनी इस दशक के अंत तक 11 अरब यूरो (करीब 12.5 अरब डॉलर) की अतिरिक्त लागत घटाना चाहती है। इसके अलावा जर्मनी के नेकारसुल्म स्थित ऑडी संयंत्र तथा फॉक्सवैगन के हनोवर, ज्विकाउ और एमडेन संयंत्रों को बंद करने पर भी विचार किया जा रहा है। कंपनी अपने कंपोनेंट्स कारोबार और फॉक्सवैगन ब्रांड के ढांचे में भी बदलाव कर सकती है।
यूरोप की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन लागत कम करने और प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने के लिए करीब एक लाख कर्मचारियों की छंटनी करने और जर्मनी में चार उत्पादन संयंत्र बंद करने की योजना पर काम कर रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ओलिवर ब्लूम ने प्रबंधन बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव रखा। इसे अगले महीने कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड के सामने चर्चा के लिए रखा जाएगा। वर्तमान में फॉक्सवैगन समूह में करीब 6.57 लाख कर्मचारी हैं। पुनर्गठन योजना के तहत कंपनी इस दशक के अंत तक 11 अरब यूरो (करीब 12.5 अरब डॉलर) की अतिरिक्त लागत घटाना चाहती है। इसके अलावा जर्मनी के नेकारसुल्म स्थित ऑडी संयंत्र तथा फॉक्सवैगन के हनोवर, ज्विकाउ और एमडेन संयंत्रों को बंद करने पर भी विचार किया जा रहा है। कंपनी अपने कंपोनेंट्स कारोबार और फॉक्सवैगन ब्रांड के ढांचे में भी बदलाव कर सकती है।
पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात शुल्क घटने की संभावना
पश्चिम एशिया संकट थमने और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बढ़ने से अब इन पर लगे निर्यात शुल्कों में बदलाव हो सकता है। सरकार स्थिति की समीक्षा कर रही है। पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क की मौजूदा दरें 30 जून तक लागू हैं। एक जुलाई को नई दरें घोषित होंगी। वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व विभाग ने डीजल निर्यात पर अब 14 रुपये प्रति लीटर और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगा रखा है। यह शुल्क लगाया है, ताकि इनका निर्यात कम हो और घरेलू जरूरतों को पूरी करने के लिए इनकी उपलब्धता बनी रहे। केंद्र सरकार ने अमेरिका और ईरान जंग शुरू होने के महीने भर बाद पेट्रोल-डीजल और एटीएफ के निर्यात पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क तथा सड़क एवं अवसंरचना उपकर लागू किया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल-डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों व देश में इनकी उपलब्धता के आधार पर शुल्क की दरें तय होती हैं।
पश्चिम एशिया संकट थमने और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बढ़ने से अब इन पर लगे निर्यात शुल्कों में बदलाव हो सकता है। सरकार स्थिति की समीक्षा कर रही है। पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क की मौजूदा दरें 30 जून तक लागू हैं। एक जुलाई को नई दरें घोषित होंगी। वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व विभाग ने डीजल निर्यात पर अब 14 रुपये प्रति लीटर और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगा रखा है। यह शुल्क लगाया है, ताकि इनका निर्यात कम हो और घरेलू जरूरतों को पूरी करने के लिए इनकी उपलब्धता बनी रहे। केंद्र सरकार ने अमेरिका और ईरान जंग शुरू होने के महीने भर बाद पेट्रोल-डीजल और एटीएफ के निर्यात पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क तथा सड़क एवं अवसंरचना उपकर लागू किया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल-डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों व देश में इनकी उपलब्धता के आधार पर शुल्क की दरें तय होती हैं।