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Budget: कैपेक्स का खर्चा बरकरार, राजकोषीय घाटे में कटौती पर जोर; गोल्डमैन सैक्स ने बताया बजट में किस पर फोकस

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Mon, 02 Feb 2026 04:59 PM IST
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सार

गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2027 बजट में सरकार ने विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन रखा है। पूंजीगत खर्च जारी रखने, राजकोषीय घाटा घटाने और सार्वजनिक कर्ज को नियंत्रित करने की प्रतिबद्धता से मध्यम अवधि में अर्थव्यवस्था और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है। आइए विस्तार से जानते हैं। 

Capex spending remains intact, fiscal deficit reduction is emphasized; Goldman Sachs reveals the budget
बजट 2026 - फोटो : ANI
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विस्तार
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गोल्डमैन सैक्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 के लिए केंद्रीय बजट भारत के मध्यम-अवधि के मैक्रोइकॉनॉमिक आउटलुक को सहारा देता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में निरंतरता बनाए रखते हुए फिस्कल ड्रैग को नरम किया है, जिससे वृद्धि के लिए अनुकूल माहौल बनता है।
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रिपोर्ट में वित्त मंत्री द्वारा केंद्रीय सरकार के सार्वजनिक ऋण को जीडीपी के अनुपात में घटाने की प्रतिबद्धता दोहराए जाने को अहम संकेत बताया गया है। लक्ष्य है कि वित्त वर्ष 2031 तक ऋण-जीडीपी अनुपात को 50% (+/-1%) तक लाने का है, जो वित्त वर्ष 2027 के 55.6% के लक्ष्य से कम है। गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, उभरते बाजारों के कई साथियों की तुलना में भारत का सार्वजनिक ऋण बोझ अपेक्षाकृत ऊंचा है, ऐसे में यह प्रतिबद्धता भरोसा बढ़ाती है।
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वित्तीय अनुशासन पर सरकार के रुख का जिक्र करते हुए रिपोर्ट ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 में राजकोषीय घाटा 10 आधार अंक घटाकर जीडीपी का 4.3% करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि पर फिस्कल ड्रैग का शुद्ध असर वित्त वर्ष 2026 की तुलना में कम रहने की उम्मीद जताई गई है।

विकास समर्थन के मोर्चे पर, सार्वजनिक कैपेक्स लक्ष्य को जीडीपी के 3.1% पर बरकरार रखा गया है। आवंटन का झुकाव इंफ्रास्ट्रक्चर-लिंक्ड क्षेत्रों की ओर है रक्षा, रेलवे और सड़कों के लिए मजबूत प्रावधान किए गए हैं। गोल्डमैन सैक्स ने इसे इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को बनाए रखने का रचनात्मक संकेत बताया, हालांकि हाल के वर्षों में निष्पादन बजटीय लक्ष्यों से कुछ कम रहा है।
 

विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्चस्तरीय समिति से निवेश बाधाएं सुलझाने की उम्मीद

इसी बीच, आईसीआरए ने कहा कि बजट 2026 के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्चस्तरीय समिति को प्रमोटरों की ओनरशिप स्ट्रक्चर और वोटिंग राइट्स जैसे अहम मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। ICRA के मुताबिक, ये मुद्दे निजी क्षेत्र और विदेशी निवेशकों की भागीदारी को अब भी प्रभावित करते हैं।

एजेंसी ने यह भी रेखांकित किया कि 2020 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय के बाद बैंकिंग सेक्टर में उल्लेखनीय समेकन हुआ है, लेकिन बैंक निजीकरण में ठोस प्रगति नहीं दिखी है। वित्त मंत्री के अनुसार, यह समिति बैंकिंग सेक्टर की समग्र समीक्षा करेगी और वित्तीय स्थिरता, समावेशन व उपभोक्ता संरक्षण को सुनिश्चित करने पर फोकस करेगी।


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