सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Consumers Brace for 5-6% Hike in Edible Oil Prices Amid Surging Freight and Crude Costs

क्या रसोई का बजट फिर बिगड़ेगा: 5-6% तक महंगे होने वाले हैं खाने के तेल, जानिए आपकी जेब पर कैसे पड़ेगा असर

बिजनेस न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Thu, 30 Apr 2026 04:51 PM IST
विज्ञापन
सार

आम आदमी की रसोई पर महंगाई की मार! कच्चे तेल में उछाल और आयात लागत बढ़ने से पाम, सोयाबीन और सरसों जैसे खाने के तेल 5-6% तक महंगे होने वाले हैं। कारण और असर समझने के लिए पढ़ें पूरी बिजनेस न्यूज।

Consumers Brace for 5-6% Hike in Edible Oil Prices Amid Surging Freight and Crude Costs
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
विज्ञापन

विस्तार

आम आदमी की जेब पर एक बार फिर महंगाई की बड़ी मार पड़ने वाली है। खाने का तेल बनाने वाली कंपनियां जल्द ही कीमतों में 5 से 6 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने की तैयारी में हैं। इसका सीधा असर हर घर की रसोई के बजट पर पड़ेगा।  जानकारों के अनुसार, पिछले ही महीने (मार्च) एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस, इमामी एग्रोटेक और पतंजलि फूड्स जैसी प्रमुख कंपनियों ने तेल के दाम बढ़ाए थे, और अब लगातार बढ़ रही लागत के कारण आम उपभोक्ताओं को एक और झटके का सामना करना पड़ सकता है।

Trending Videos


आखिर क्यों लगातार महंगे हो रहे हैं खाने के तेल?
इस बढ़ती महंगाई के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक संकट और आयात से जुड़ी कुछ प्रमुख वजहें हैं:

  • कच्चे तेल में भारी उछाल: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, खाने के तेल की कीमतें अक्सर कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय रुझान को फॉलो करती हैं।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • आयात और ढुलाई का बढ़ता खर्च: भारत अपनी खाने के तेल की कुल खपत का लगभग 57 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात करता है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक बी.वी. मेहता के मुताबिक, बढ़ा हुआ माल-भाड़ा (फ्रेट), बीमा लागत और रुपये की कमजोरी ने खाने के तेल को महंगा कर दिया है।
  • घरेलू कारण: घरेलू बाजार में भी तिलहन (ऑयलसीड) की कीमतों में मजबूती आई है, जिसके चलते तेल उत्पादक कंपनियों के मार्जिन (मुनाफे) पर भारी दबाव पड़ रहा है। 

आंकड़ों में समझिए कितना बढ़ा है बोझ?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले एक साल के भीतर आयात लागत में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है। पाम ऑयल 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,270 डॉलर प्रति टन, सोयाबीन ऑयल 20 प्रतिशत बढ़कर 1,335 डॉलर प्रति टन और सूरजमुखी (सनफ्लावर) ऑयल 17 फीसदी महंगा होकर 1,425 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है। 

खुदरा बाजार में भी आम आदमी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले सरसों के तेल की कीमत 11 फीसदी बढ़कर 189 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसी तरह सोयाबीन तेल 158 रुपये (8% वृद्धि) और सनफ्लावर ऑयल 184 रुपये प्रति लीटर (14% वृद्धि) के स्तर पर पहुंच चुका है। 

आगे क्या है उम्मीद?
फॉर्च्यून ब्रांड की मालिकाना कंपनी AWL एग्री बिजनेस के एमडी एवं सीईओ श्रीकांत कान्हेरे ने स्पष्ट किया है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और भू-राजनीतिक जोखिम जारी रहते हैं, तो खाद्य तेलों की कीमतों में और बढ़ोतरी होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। 

उद्योग जगत का स्पष्ट मानना है कि बढ़ी हुई आयात लागत का बोझ अंततः खुदरा कीमतों में जोड़ना उनकी मजबूरी है। ऐसे में आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल कोई फौरी राहत नजर नहीं आ रही है; जब तक वैश्विक स्तर पर माल-भाड़े में कमी नहीं आती या तिलहन की कीमतों में नरमी नहीं देखी जाती, तब तक रसोई का बजट बिगड़ा रहने की आशंका है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed