US Inflation: अमेरिका को भारी पड़ रहा ईरान युद्ध, महंगाई ने तोड़ा तीन साल का रिकॉर्ड, जानिए कहां फंसे ट्रंप
ईरान युद्ध से गैस की कीमतों में उछाल, अमेरिका में महंगाई 3 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह स्थिति असहज करने वाली साबित हो सकती है। फेड रिजर्व की ब्याज दर और अर्थव्यवस्था पर इसका पूरा असर जानने के लिए पढ़ें।
विस्तार
ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में मचे हाहाकार का सीधा असर अब महंगाई के रूप में दिखने लगा है। अमेरिका में गैस की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को पिछले तीन वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इस झटके के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें भी फिलहाल टलती नजर आ रही हैं। अमेरिका में महंगाई के ताजा आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि ईरान के साथ जंग शुरू करना राष्ट्रपति ट्रंप को अब भारी पड़ रहा है। आइए, सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं कि इन ताजा आंकड़ों का अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा।
सवाल: अमेरिका में महंगाई के ताजा आंकड़े क्या बता रहे हैं?
जवाब: वाणिज्य विभाग द्वारा जारी की गई नई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में महंगाई दर मार्च महीने में फरवरी के मुकाबले 0.7 प्रतिशत बढ़ गई है। वहीं, अगर सालाना आधार पर देखें, तो कीमतों में 3.5 प्रतिशत का भारी उछाल आया है, जो पिछले लगभग तीन वर्षों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।
सवाल: इस अचानक बढ़ी महंगाई के पीछे मुख्य कारण क्या है?
जवाब: इस बेतहाशा महंगाई का मुख्य कारण ईरान युद्ध है, जिसने वैश्विक स्तर पर गैस की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले मार्च महीने में गैस की कीमतों में पिछले महीने की तुलना में लगभग 21 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया है।
सवाल: ऊर्जा और खाद्य कीमतों को हटा दें, तो 'कोर महंगाई' की क्या स्थिति है?
जवाब: 'कोर इन्फ्लेशन' यानी ऐसी महंगाई जिसमें खाद्य और ऊर्जा जैसे अधिक उतार-चढ़ाव वाले क्षेत्रों को शामिल नहीं किया जाता, उसमें भी चिंताजनक वृद्धि हुई है। मार्च में कोर महंगाई दर मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत बढ़ी है और सालाना आधार पर यह 3.2 प्रतिशत अधिक रही, जो फरवरी के 3 प्रतिशत के आंकड़े से ज्यादा है। नीतिगत फैसले लेने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व मुख्य रूप से इसी कोर महंगाई पर नज़र रखता है।
सवाल: इस बढ़ती महंगाई पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व का क्या रुख है?
जवाब: गैस की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी दूर कर दिया है। इसी वजह से फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख अल्पकालिक ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है। फेड के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने भी इस स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा है, "हम अच्छी तरह से वाकिफ हैं कि देश भर में लोग गैस की ऊंची कीमतों का सामना कर रहे हैं, और इससे उन्हें परेशानी हो रही है"।
सवाल: इन सबके बीच उपभोक्ताओं के खर्च पर कैसा असर दिखा है?
जवाब: महंगाई की मार के बावजूद उपभोक्ताओं का खर्च बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने उपभोक्ता खर्च में 0.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा ऊंची कीमतों के कारण है, लेकिन महंगाई समायोजित होने के बावजूद खर्च में यह बढ़ोतरी अमेरिकी उपभोक्ताओं के लचीलेपन को दर्शाती है।
फेडरल रिजर्व अब इस बात पर कड़ी नजर रख रहा है कि ऊर्जा की ये उच्च लागत कोर महंगाई को कितना प्रभावित करती है। जब तक गैस की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, फेड द्वारा ब्याज दरों में किसी भी प्रकार की कटौती की संभावना बेहद कम है, जो वैश्विक बाजारों और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत है।
