{"_id":"69f83e6957f4bb0cca0ff6be","slug":"india-manufacturing-activity-remains-strong-pmi-54-7-in-april-2026-05-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंकड़े: प. एशिया में तनाव के बावजूद भारत में विनिर्माण गतिविधियों में तेजी जारी, अप्रैल में 54.7 पर पहुंचा PMI","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
आंकड़े: प. एशिया में तनाव के बावजूद भारत में विनिर्माण गतिविधियों में तेजी जारी, अप्रैल में 54.7 पर पहुंचा PMI
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 04 May 2026 12:06 PM IST
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सार
अप्रैल में भारत का विनिर्माण सूचकांक बढ़कर 54.7 पर पहुंचा, जिसे नए ऑर्डर, निर्यात और रोजगार में सुधार का समर्थन मिला। इस क्षेत्र की गतिविधियां मजबूत रहीं। हालांकि परिचालन सुधार की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही। वहीं, पश्चिम एशिया तनाव के चलते लागत और कीमतों पर दबाव बढ़ा। पढ़िए रिपोर्ट-
विनिर्माण क्षेत्र (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
भारत में विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) अप्रैल में 54.7 रहा, जो मार्च में 53.9 था। यह वृद्धि नए ऑर्डर (निर्यात सहित) और रोजगार के अवसर बढ़ने के कारण हुई। यह जानकारी एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई के आंकड़ों में सोमवार को दी गई।
अप्रैल के आंकड़े दिखाते हैं कि भारत के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और नए व्यवसायों में तेजी जारी है। वहीं, निर्यात एक सकारात्मक बिंदु बना हुआ है और वृद्धि दर पिछले सितंबर के बाद सबसे तेज रही है।
रिपोर्ट में कंपनियों ने संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण महंगाई के दबाव में वृद्धि हुई है। कच्चे माल की लागत और उत्पाद कीमतों दोनों में क्रमशः 44 महीनों और छह महीनों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री ने क्या कहा?
एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी ने कहा, पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव अब और स्पष्ट होते जा रहे हैं, विशेष रूप से महंगाई के रूप में, जिससे उत्पादन लागत अगस्त 2022 के बाद से सबसे तेज गति से बढ़ी है और उत्पाद कीमतें छह महीनों में सबसे तेज दर से बढ़ी हैं।
विनिर्माण पीएमआई क्या है?
मार्च में 53.9 से बढ़कर अप्रैल में 54.7 होने के बावजूद मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) ने लगभग चार वर्षों में समग्र परिचालन स्थितियों में दूसरी सबसे धीमी सुधार का संकेत दिया। पीएमआई नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार, आपूर्तिकर्ता आपूर्ति समय और खरीद स्टॉक के आधार पर समग्र परिस्थितियों को मापता है।
ये भी पढ़ें: पांच राज्यों के चुनावी नतीजों से पहले बाजार में बहार; सेंसेक्स 800 अंक उछला, निफ्टी 24240 के पार
संभावनाओं को लेकर आशावादी बने रहे भारतीय निर्माता
सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने संकेत दिया कि विज्ञापन और मांग में स्थिरता ने बिक्री और उत्पादन को समर्थन दिया। लेकिन प्रतिस्पर्धी माहौल, पश्चिम एशिया में युद्ध और ग्राहकों द्वारा लंबित कोटेशन को मंजूरी देने में अनिच्छा के कारण विकास बाधित हुआ। भारतीय निर्माता विकास की संभावनाओं को लेकर आशावादी बने रहे। सकारात्मक भावना का समग्र स्तर मार्च से थोड़ा कम हुआ। हालांकि, यह नवंबर 2024 के बाद से अपने दूसरे उच्चतम स्तर पर था।
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अप्रैल के आंकड़े दिखाते हैं कि भारत के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और नए व्यवसायों में तेजी जारी है। वहीं, निर्यात एक सकारात्मक बिंदु बना हुआ है और वृद्धि दर पिछले सितंबर के बाद सबसे तेज रही है।
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रिपोर्ट में कंपनियों ने संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण महंगाई के दबाव में वृद्धि हुई है। कच्चे माल की लागत और उत्पाद कीमतों दोनों में क्रमशः 44 महीनों और छह महीनों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री ने क्या कहा?
एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी ने कहा, पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव अब और स्पष्ट होते जा रहे हैं, विशेष रूप से महंगाई के रूप में, जिससे उत्पादन लागत अगस्त 2022 के बाद से सबसे तेज गति से बढ़ी है और उत्पाद कीमतें छह महीनों में सबसे तेज दर से बढ़ी हैं।
विनिर्माण पीएमआई क्या है?
मार्च में 53.9 से बढ़कर अप्रैल में 54.7 होने के बावजूद मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) ने लगभग चार वर्षों में समग्र परिचालन स्थितियों में दूसरी सबसे धीमी सुधार का संकेत दिया। पीएमआई नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार, आपूर्तिकर्ता आपूर्ति समय और खरीद स्टॉक के आधार पर समग्र परिस्थितियों को मापता है।
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संभावनाओं को लेकर आशावादी बने रहे भारतीय निर्माता
सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने संकेत दिया कि विज्ञापन और मांग में स्थिरता ने बिक्री और उत्पादन को समर्थन दिया। लेकिन प्रतिस्पर्धी माहौल, पश्चिम एशिया में युद्ध और ग्राहकों द्वारा लंबित कोटेशन को मंजूरी देने में अनिच्छा के कारण विकास बाधित हुआ। भारतीय निर्माता विकास की संभावनाओं को लेकर आशावादी बने रहे। सकारात्मक भावना का समग्र स्तर मार्च से थोड़ा कम हुआ। हालांकि, यह नवंबर 2024 के बाद से अपने दूसरे उच्चतम स्तर पर था।
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