सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   direct vs regular mutual fund difference expense ratio investment guide

Mutual Funds: डायरेक्ट या रेगुलर फंड, किसे चुनना सही? निवेश से पहले समझें खर्च और मुनाफे का पूरा गणित

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Mon, 11 May 2026 05:03 AM IST
विज्ञापन
सार

म्यूचुअल फंड में निवेश के दो मुख्य विकल्प होते हैं, डायरेक्ट और रेगुलर। दोनों का पोर्टफोलियो और मैनेजर समान होते हैं, लेकिन मुख्य अंतर लागत का है। डायरेक्ट फंड में आप सीधे कंपनी से जुड़ते हैं जिससे कमीशन बचता है और लंबे समय में अधिक रिटर्न मिलता है। वहीं, रेगुलर फंड में एजेंट का कमीशन शामिल होता है। समझिए पूरा फंडा...
 

direct vs regular mutual fund difference expense ratio investment guide
म्यूचुअल फंड निवेश (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार

म्यूचुअल फंड की दुनिया में जब कोई निवेशक कदम रखता है, तो अक्सर उसके सामने एक ही योजना के दो अलग-अलग विकल्प आते हैं- एक है डायरेक्ट और दूसरा रेगुलर। पहली नजर में ये दोनों बिल्कुल जुड़वां भाइयों जैसे दिखते हैं। इनका निवेश पोर्टफोलियो एक होता है, फंड मैनेजर भी वही होता है और बाजार की चाल के साथ इनके बढ़ने या घटने की रणनीति भी एक जैसी होती है। लेकिन, इन दोनों के बीच एक ऐसा बारीक अंतर छिपा है, जो लंबे समय में आपके मुनाफे की पूरी तस्वीर बदल सकता है।


खर्च और कमीशन का गणित
इन दोनों विकल्पों के बीच बुनियादी अंतर केवल निवेश करने की प्रक्रिया और उससे जुड़ी लागत का है।

डायरेक्ट फंड:  जब आप किसी डायरेक्ट फंड में निवेश करते हैं, तो आप सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी से जुड़ते हैं। इसमें बीच में किसी बिचौलिये, एजेंट या वितरक की कोई भूमिका नहीं होती।
विज्ञापन
विज्ञापन


रेगुलर फंड: रेगुलर फंड में एजेंट को कमीशन देना पड़ता है, इसलिए इसका एक्सपेंस रेशियो थोड़ा अधिक होता है।

सुनने में यह अंतर बहुत मामूली लग सकता है- शायद आधा या एक फीसदी- लेकिन जब आप 15 से 20 साल के निवेश की बात करते हैं, तो चक्रवृद्धि ब्याज के कारण यह छोटा-सा अंतर लाखों रुपये के मुनाफे का अंतर पैदा कर देता है। यही कारण है कि डायरेक्ट फंड में रिटर्न हमेशा रेगुलर फंड से थोड़ा बेहतर दिखाई देता है।
विज्ञापन
Trending Videos


यह भी पढ़ें: जनता पर महंगाई की मार: जेब पर भारी पड़ेगा एफएमसीजी संकट, साबुन-बिस्कुट और राशन के दाम बढ़ने के आसार

सिर्फ बचत नहीं, व्यवहार भी है जरूरी
अगर डायरेक्ट फंड सस्ता है, तो रेगुलर फंड का अस्तित्व क्यों है? इसका जवाब निवेशक के व्यवहार में छिपा है। एक अच्छा सलाहकार आपकी जरूरतों और लक्ष्यों के हिसाब से सही योजना चुनने में मदद करता है। सबसे महत्वपूर्ण जब बाजार में उतार-चढ़ाव आता है और घबराहट बढ़ती है, तब सलाहकार आपको जल्दबाजी में गलत फैसले लेने से रोकता है। म्यूचुअल फंड में अक्सर लोग रिटर्न से ज्यादा अपने व्यवहार के कारण नुकसान उठाते हैं। बार-बार फंड बदलना या बाजार गिरते ही पैसा निकाल लेना ऐसी गलतियां हैं, जो किसी भी अतिरिक्त शुल्क से कहीं ज्यादा भारी पड़ती हैं।

आप कहां खड़े हैं?
चुनाव इस पर निर्भर करता है कि आप निवेश को लेकर कितने सक्रिय हैं।

डायरेक्ट फंड उनके लिए है: जिन्हें बाजार की बुनियादी समझ है, खुद रिसर्च कर सकते हैं, योजनाओं की निगरानी करने का समय है और बाजार की उथल-पुथल में शांत रहकर फैसले ले सकते हैं।

रेगुलर फंड उनके लिए है: जो निवेश की दुनिया में नए हैं, बाजार को ट्रैक करने का समय नहीं है या चाहते हैं कि कोई विशेषज्ञ आपके निवेश की निगरानी करे और मुश्किल समय में सही दिशा दिखाए।

डिस्क्लेमर: विचार, राय और निवेश संबंधी सुझाव अलग-अलग विशेषज्ञों, ब्रोकर फर्मों या रिसर्च संस्थानों के हैं। संस्थान या उसके प्रबंधन की सहमति जरूरी नहीं है। कृपया किसी भी तरह का निवेश फैसला लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी अमर उजाला या उसके प्रबंधन की नहीं होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed