SEBI: ऋण बाजार को मजबूत करने के लिए सेबी-आरबीआई की बड़ी पहल, कॉर्पोरेट बॉन्ड सूचकांक डेरिवेटिव्स होंगे लॉन्च
सेबी और आरबीआई मिलकर कॉर्पोरेट बॉन्ड सूचकांक डेरिवेटिव्स पेश कर रहे हैं। इसका उद्देश्य भारत के ऋण बाजार में तरलता, मूल्य खोज और वैश्विक पूंजी की पहुंच बढ़ाना है। विदेशी निवेशकों के लिए भी प्रक्रियाएं सरल की जा रही हैं।
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शेयर बाजार के नियामक सेबी के प्रमुख तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को एक बड़ा एलान किया। प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन पांडे ने कहा कि नियामक भारतीय रिजर्व बैंक के मिलकर कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स के लिए डेरिवेटिव्स की शुरुआत करने की योजना पर काम कर रहा है। इस कवायद का मकसद तरलता बढ़ाना, मूल्य निर्धारण और भारतीय ऋण बाजार में विदेशी पूजी की पहुंच सुनिश्चित करना है। आईसीआईसीआई इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान अपने संबोधन में सेबी प्रमुख ने कहा, "सेबी और आरबीआई इस दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं।" उन्होंने इस योजना को कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के व्यापक सुधारों से भी जोड़ा।
इलेक्ट्रॉनिक बुक प्रदाता प्लेटफॉर्म का विस्तार पहले ही REITs और InvITs की ओर से जारी किए गए बॉन्डों को शामिल करने के लिए किया जा चुका है, इससे पारदर्शिता और दक्षता में सुधार हुआ है। एक कार्य समूह कॉरपोरेट बॉन्डों में तरलता बढ़ाने के लिए एक मार्केट-मेकिंग फ्रेमवर्क शुरू करने के लिए परिचालन संबंधी विवरणों को भी अंतिम रूप दे रहा है।
आरबीआई नए दिशा-निर्देशों को दे रहा अंतिम रूप
भारतीय रिजर्व बैंक ने पहले ही इस दिशा में आधार तैयार कर लिया है। पांडे ने बताया कि आरबीआई ने फरवरी में कुल प्रतिफल स्वैप और कॉर्पोरेट बॉन्ड सूचकांक डेरिवेटिव्स पर मसौदा दिशानिर्देश दिए थे। अब आरबीआई इन दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दे रहा है। दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद, एक्सचेंज इन डेरिवेटिव उत्पादों को बॉन्ड सूचकांकों पर लॉन्च करेंगे। सेबी और आरबीआई का यह संयुक्त प्रयास भारत के बॉन्ड बाजार को घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिए अधिक निवेश योग्य बनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।
सेबी ने एफपीआई के लिए नियामकीय ढील का किया एलान
विदेशी निवेशकों की पहुंच पर पांडे ने कहा कि सेबी ने एफपीआई के लिए नियामक आवश्यकताओं में ढील दी है। सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले एफपीआई के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। इसमें मानकीकृत प्रपत्र, डिजिटल हस्ताक्षर-आधारित दस्तावेज जमा करना और ट्रैकिंग तंत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि एफपीआई पंजीकरण और ऑनबोर्डिंग के लिए समय-सीमा में पर्याप्त कमी लाने हेतु कस्टोडियन बैंकों और आरबीआई के साथ काम किया जा रहा है। निधियों के शुद्ध निपटान जैसे उपायों से परिचालन दक्षता में सुधार होगा, जिससे लागत और घर्षण कम होगा।
सेबी प्रमुख ने पूंजी प्रवाह बढ़ाने वाले कदमों के बारे में बताया
नीतिगत उपाय बाजार संरचना सुधारों के पूरक हैं। पांडे ने एफपीआई के लिए सरकारी प्रतिभूतियों पर नवीनतम कर छूटों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कॉरपोरेट ऋण में कुछ निवेश सीमाओं को हटाने को भी पूंजी प्रवाह को सुगम बनाने वाले कदम बताया। समापन नीलामी और ब्लॉक डील ढांचे में संवर्द्धन से मूल्य खोज और तरलता में सुधार हुआ है। यह विशेष रूप से एफपीआई की चिंताओं को पूरा करता है।
वृद्धि और विश्वास का निर्माण
वित्त वर्ष 26 में कॉर्पोरेट बॉन्ड का आकार 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। बाजार पूंजीकरण सकल घरेलू उत्पाद का 128 फीसदी है। उन्होंने कहा कि बॉन्ड सूचकांकों पर डेरिवेटिव्स निवेशकों को बचाव और आवंटन के लिए बेहतर उपकरण देंगे। स्टॉकब्रोकर, वैकल्पिक निवेश कोष और म्यूचुअल फंड के लिए सुधारों के साथ, बॉन्ड सूचकांक डेरिवेटिव्स पर सेबी-आरबीआई सहयोग का उद्देश्य घर्षण को कम करना और विश्वास का निर्माण करना है। इससे वृद्धि तभी निवेश योग्य बनती है जब पहुंच सरल हो, प्रक्रियाएं अनुमानित हों और बाजार सुचारू रूप से कार्य करें।