Report: पश्चिम एशिया संघर्ष के बावजूद देश में एफएमसीजी की मांग मजबूत, कंपनियों ने बढ़ाई कीमतें
पश्चिम एशिया संघर्ष और बढ़ती लागत के बावजूद भारत के तेजी से बिकने वाले उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र में मांग मजबूत बनी हुई है। आनंद राठी की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों ने लाभ मार्जिन बचाने के लिए 3 से 10 फीसदी तक कीमतें बढ़ाई हैं, जबकि मानसून संबंधी जोखिम भविष्य की चिंताएं बढ़ा रहे हैं।
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विस्तार
भारत में तेजी से बिकने वाले उपभोक्ता उत्पाद (एफएमसीजी) क्षेत्र में मांग मजबूत बनी हुई है। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण बढ़ती उत्पादन लागत के बावजूद यह स्थिति है। कई कंपनियों ने अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचाने के लिए उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं। कीमतों में यह वृद्धि तीन से फीसदी से 10 फीसदी तक रही है। आनंद राठी ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र ने अच्छा राजस्व प्रदर्शन किया। मांग में सुधार, चुनिंदा मूल्य वृद्धि और प्रीमियम उत्पादों पर लगातार जोर से इसे समर्थन मिला। चौथी तिमाही में राजस्व वृद्धि 11 फीसदी दर्ज की गई। पूरे वित्त वर्ष 26 में यह वृद्धि 8 फीसदी रही थी। विभिन्न कंपनियों में वृद्धि अलग-अलग रही। यह श्रेणी-विशिष्ट चुनौतियों और मौसम संबंधी बाधाओं के कारण था। हालांकि, अधिकांश कंपनियों ने सकारात्मक शीर्ष-पंक्ति विस्तार दर्ज किया। रिपोर्ट ने कहा कि उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद मांग बनी हुई है।
वृद्धि के प्रमुख कारण
इस वृद्धि का श्रेय बिक्री मात्रा में सुधार को दिया गया है। जीएसटी कटौती से भी इसे मदद मिली है। वितरण नेटवर्क का विस्तार और उत्पाद नवाचार पहल भी सहायक रहे हैं। इन सभी कारकों ने मिलकर क्षेत्र की वृद्धि को गति दी है। उपभोक्ता वस्तुओं की उपलब्धता और नए उत्पादों ने बाजार को बढ़ावा दिया है।
बढ़ती लागत और मूल्य वृद्धि
स्वस्थ मांग के बावजूद, यह क्षेत्र बढ़ती वस्तु कीमतों से नए दबाव का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण चुनिंदा वस्तुओं की महंगाई फिर से उभरी। इससे कई उपभोक्ता उत्पाद कंपनियों को मूल्य वृद्धि करनी पड़ी। उन्होंने अपनी लाभप्रदता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया। यह मूल्य वृद्धि 3 फीसदी से 10 फीसदी के बीच रही है।
मौसम संबंधी जोखिम और भविष्य की चिंताएं
आनंद राठी ने निकट भविष्य में मौसम संबंधी जोखिमों को भी महत्वपूर्ण कारक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, मानसून के मौसम में अल नीनो की स्थिति विकसित होने की उम्मीद है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 2026 में सामान्य से कम मानसून का अनुमान लगाया है। बारिश दीर्घकालिक औसत से 10 फीसदी कम रहने की संभावना है। कमजोर बारिश ग्रामीण आय और मांग को प्रभावित कर सकती है। ग्रामीण मांग उपभोक्ता उत्पाद खपत के लिए महत्वपूर्ण है।