Report: 300 अरब डॉलर का होगा ई-कॉमर्स बाजार, जानें खरीदारी करने के तरीके में कैसे आया बदलाव
बोस्टान कंस्ल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय ई-कॉमर्स बाजार चार वर्षों में बढ़कर 280-300 अरब डॉलर के बीच पहुंच सकता है। इसमें कहा गया है कि उपभोक्ताओं के खरीदारी पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहा है। 10 में से पांच ऑफलाइन खरीदार खरीदारी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन चैनलों का उपयोग करते हैं।
विस्तार
घरेलू ई-कॉमर्स बाजार का आकार 2030 तक करीब 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। बोस्टान कंस्ल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
ई-कॉमर्स के चलन के बावजूद ऑफलाइन मार्केट है मजबूत
- रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-कॉमर्स की तेज वृद्धि के बावजूद ऑफलाइन रिटेल मार्केट मजबूत बना हुआ है।
- यह पिछले चार वर्षों में 13-14 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा है।
- बाजार ऑनलाइन और ऑफलाइन रिटेल के बीच सह-अस्तित्व के चरण में प्रवेश कर रहा है।
- इसमें मल्टी-चैनल खरीदारी करने वालों के लिए एक सामान्य बात बन गई है।
- 10 में से पांच ऑफलाइन खरीदार खरीदारी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन चैनलों का उपयोग करते हैं।
भारत में कितने लोग ऑनलाइन करते हैं खरीदारी?
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत में वर्तमान में लगभग 30 करोड़ ऑनलाइन खरीदार हैं, जिनके 2030 तक 44 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिनमें से लगभग 30 प्रतिशत ऑनलाइन खरीदार ग्रामीण भारत से हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ई-कॉमर्स में ई-रिटेल और ई-सेवाएं शामिल हैं। इनका अनुमानित मूल्य क्रमशः 75-85 अरब डॉलर और 45-55 अरब डॉलर है। ई-सेवाओं की वृद्धि दर 20-22 प्रतिशत रहेगी, जबकि ई-रिटेल की वृद्धि दर 16-18 प्रतिशत रहेगी।
उपभोक्ताओं की खरीदारी का पैटर्न बदला
विभिन्न क्षेत्रों के 12,000 से अधिक उपभोक्ताओं के सर्वेक्षण पर आधारित रिपोर्ट में कहा गया है कि आजकल खरीदार सुविधा, विश्वास और आवश्यकता के आधार पर स्क्रीन और स्टोर के बीच सहजता से आवागमन करते हैं, ऑनलाइन खोज करते हैं, ऑफलाइन खरीदारी करते हैं और ऑफलाइन खरीदारी करते हैं।
महिलाएं ऑनलाइन खरीदारी को अधिक सुरक्षित मानती हैं
लगभग दो-तिहाई महिला खरीदारों का कहना है कि वे ऑनलाइन खरीदारी को अधिक सुरक्षित मानती हैं। इसका कारण गोपनीयता, सुगम पहुंच और किसी भी समय स्वतंत्र रूप से खरीदारी करने की क्षमता है।
खरीदार हुए अधिक विविधतापूर्ण
बीसीजी की पार्टनर और डायरेक्टर कनिका सांघी ने कहा कि भारत के खरीदार अधिक विविधतापूर्ण होते जा रहे हैं।
- उपभोक्ता अपनी आवश्यकताओं और परिपक्वता के अनुसार विभिन्न प्रारूपों का उपयोग कर रहे हैं। ऑनलाइन खरीदारों का जनसांख्यिकीय मिश्रण अधिक लोकतांत्रिक होता जा रहा है।
- इसलिए प्लेटफॉर्म और ब्रांडों को सभी टचपॉइंट्स पर सरल, सुरक्षित और अधिक सहज अनुभव प्रदान करने होंगे।
ऑनलाइन ब्रांडों के वार्षिक राजस्व का लक्ष्य
क्विक कॉमर्स में 100 प्रतिशत से अधिक की सीएजीआर वृद्धि हुई है, जिससे तत्काल और टॉप-अप खरीदारी मुख्यधारा बन गई है और खरीदारी की आवृत्ति में वृद्धि हुई है, जबकि सोशल और चैट कॉमर्स में 40-45 प्रतिशत की सीएजीआर वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में कहा गया कि ऑनलाइन ब्रांडों को 100 करोड़ रुपए के वार्षिक राजस्व तक पहुंचने में लगने वाला समय लगभग 11 साल से घटकर लगभग 7 साल हो गया है।