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IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड: 24 घंटे में वापस आए हरियाणा सरकार के 556 करोड़ रुपये, कर्मचारी जांच के घेरे में
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 24 Feb 2026 04:45 PM IST
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सार
हरियाणा के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुए 590 करोड़ के संदिग्ध फ्रॉड मामले में सीएम नायब सिंह सैनी ने 24 घंटे के भीतर 556 करोड़ रुपये की रिकवरी की जानकारी दी है। आसान भाषा में पढ़ें पूरी खबर और जांच के अहम बिंदु।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
- फोटो : संवाद
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विस्तार
हरियाणा के चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की एक शाखा में हुए 590 करोड़ रुपये के संदिग्ध घोटाले में राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बड़ी रिकवरी की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने साफ किया है कि सरकारी खातों से निकाली गई 556 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को 24 घंटे के भीतर ही रिकवर कर लिया गया है।
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विभागीय ऑडिट में बैंक स्टेटमेंट में गड़बड़ी पाए जाने के बाद सरकार ने तुरंत एक्शन लिया। इस पूरे मामले के अहम तथ्य इस प्रकार हैं:
ब्याज सहित वापसी: मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि वापस आई 556 करोड़ रुपये की रकम में 22 करोड़ रुपये का ब्याज भी शामिल है।
कर्मचारियों की मिलीभगत:अब तक की जांच में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के चार से पांच कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है।
एफआईआर और सख्त कार्रवाई: स्टेट विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।
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बैंक पर सरकारी एक्शन: मुख्यमंत्री ने बताया कि बैंक द्वारा 21 फरवरी को औपचारिक सूचना देने से पहले ही, सरकार ने 18 फरवरी को IDFC फर्स्ट बैंक को अपने पैनल से हटा दिया था और सारा सरकारी फंड ब्याज समेत एक राष्ट्रीयकृत बैंक में ट्रांसफर कर दिया था।
बैंक ने क्या कहा है?
दूसरी ओर, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने मंगलवार को बताया कि उसने चंडीगढ़ शाखा में हुए धोखाधड़ी के मामले में हरियाणा सरकार को पूरी राशि वापस कर दी है। बैंक ने अपने ग्राहक-प्रथम सिद्धांतों और पेशेवर, सिद्धांत-आधारित बैंकिंग के प्रति प्रतिबद्धता का हवाला दिया है। बैंक ने साफ किया कि उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को मूलधन और ब्याज सहित 100% राशि का भुगतान कर दिया है, जो कुल मिलाकर ₹583 करोड़ है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने धोखाधड़ी के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और बकाया राशि की वसूली के लिए हरियाणा सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग करने की अपनी निरंतर प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया।
दूसरी ओर, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने शेयर बाजार और सेबी को दी गई अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में इस धोखाधड़ी की बात स्वीकार की है। बैंक ने यह भी बताया है कि घटना में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री सैनी ने सदन को आश्वस्त किया है कि राज्य का वित्तीय प्रबंधन मजबूत है और प्रदेश के 2.8 करोड़ नागरिकों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित है।
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