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GDP: भारत का जीडीपी मापने का तरीका बदलेगा; नया बेस ईयर 2022-23 होगा, 27 फरवरी को आएंगे नए आंकड़े

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 24 Feb 2026 03:59 PM IST
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सार

भारत सरकार 27 फरवरी से GDP गणना का नया तरीका लागू कर रही है। बेस ईयर 2022-23 होगा और सटीकता के लिए 'डबल डिफ्लेशन' और 500-600 आइटम्स का इस्तेमाल होगा। आसान भाषा में पूरी बिजनेस न्यूज पढ़ें।

India GDP calculation overhaul, new GDP base year 2022-23, real GDP calculation methodology
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार

महंगाई के बाद अब भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक वृद्धि यानी रियल जीडीपी को मापने के तरीके में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार इस हफ्ते जीडीपी की गणना के लिए एक नई और अधिक सटीक प्रणाली पेश करने वाली है, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता और अधिक बढ़ जाएगी। 

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क्या है नया बदलाव?
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने बताया कि अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर पेश करने के लिए अब कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) और पुराने होलसेल प्राइस इंडेक्स (डब्ल्यूपीआई) से लगभग 500-600 आइटम्स का इस्तेमाल किया जाएगा। पहले महंगाई का असर घटाकर रियल जीडीपी निकालने के लिए सिर्फ 180 आइटम का ही इस्तेमाल किया जाता था। 
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बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
पुरानी और कमजोर व्यवस्था: अर्थशास्त्रियों ने लंबे समय से यह चिंता जताई थी कि जीडीपी मापने का पुराना तरीका आउटडेटेड हो चुका है क्योंकि यह आम लोगों से जुड़े कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के बजाय मुख्य रूप से थोक महंगाई (WPI) पर ज्यादा निर्भर था। 
आईएमएफ की चेतावनी: पिछले साल नवंबर में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी भारत की जीडीपी गणना प्रणाली की कमजोरियों पर सवाल उठाए थे। आईएमएफ ने पुराने 2011-12 के बेस ईयर और 'सिंगल डिफ्लेशन' तरीके के ज्यादा इस्तेमाल के कारण इस फ्रेमवर्क को 'सी' रेटिंग दी थी। पुराने तरीके में कम थोक महंगाई होने पर रियल ग्रोथ रेट असलियत से ज्यादा दिखने लगती थी।

डबल डिफ्लेशन से मिलेगी असली तस्वीर
इस पूरे बदलाव का सबसे अहम हिस्सा 'डबल डिफ्लेशन' तकनीक को अपनाना है। इस तकनीक में इनपुट (लागत) और आउटपुट (तैयार माल) दोनों की कीमतों में होने वाले बदलावों को अलग-अलग एडजस्ट किया जाता है। सौरभ गर्ग के मुताबिक, इससे खास तौर पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के आंकड़ों की सटीकता में भारी सुधार आएगा, जो पुराने तरीके में इनपुट और आउटपुट की कीमतों में अंतर के कारण सही नहीं आ पाते थे।

नए आंकड़े कब आएंगे?
सरकार 27 फरवरी को 2022-23 के नए बेस ईयर के साथ जीडीपी की नई सीरीज जारी करेगी। इसके साथ ही पिछले चार वर्षों का बैक-सीरीज डेटा भी जारी किया जाएगा, ताकि पुरानी और नई ग्रोथ का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सके। 

वर्तमान आर्थिक स्थिति
पुराने मानकों के अनुसार, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक, भारत के 2025-26 में 7.4% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में विकास दर 6.5% थी। चालू वर्ष में करेंट मार्केट प्राइस पर नॉमिनल जीडीपी 8.0% बढ़ने का अनुमान है।

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