{"_id":"699d6a3fb489b4162f06fc89","slug":"india-gdp-growth-q3-fy26-sbi-economic-report-domestic-demand-in-india-moody-s-analytics-2026-02-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Report: मजबूत घरेलू मांग के कारण तीसरी तिमाही में 8.1% रह सकती है वृद्धि दर, नए टैरिफ नियमों से बाजार में हलचल","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Report: मजबूत घरेलू मांग के कारण तीसरी तिमाही में 8.1% रह सकती है वृद्धि दर, नए टैरिफ नियमों से बाजार में हलचल
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 24 Feb 2026 02:37 PM IST
विज्ञापन
सार
एसबीआई रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 8.1% रहने का अनुमान है। वहीं मूडीज ने ट्रंप के 15% टैरिफ से एशिया और भारत के व्यापार पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण किया है। पूरी बिजनेस न्यूज पढ़ें।
Economy
- फोटो : Adobestock
विज्ञापन
विस्तार
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी व्यापार नीतियों में हो रहे बड़े बदलावों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था अपने मजबूत घरेलू आधार के दम पर मजबूती से खड़ी है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (FY26) की तीसरी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 8.1 प्रतिशत के करीब रहने का अनुमान है। वहीं, दूसरी ओर मूडीज एनालिटिक्स की एक रिपोर्ट यह संकेत देती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 15 प्रतिशत के एकमुश्त टैरिफ से ग्लोबल ट्रेड और विशेष रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के व्यापारिक समीकरणों में बड़े बदलाव आ सकते हैं।
Trending Videos
घरेलू खपत से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिली रफ्तार
एसबीआई की रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि भारत की आर्थिक वृद्धि का मुख्य इंजन उसकी घरेलू मांग है।
खपत में वृद्धि: कृषि और गैर-कृषि दोनों क्षेत्रों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों के कारण ग्रामीण खपत मजबूत बनी हुई है। इसके साथ ही, पिछले त्योहारी सीजन के खर्च और राजकोषीय प्रोत्साहन से शहरी खपत में भी निरंतर सुधार देखने को मिला है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जीडीपी अनुमान: पहली अग्रिम रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए भारत की कुल जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
बेस ईयर में बदलाव: भारत अपने जीडीपी का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर रहा है, जिसके नए आंकड़े 27 फरवरी 2026 को जारी होंगे। यह नया बेस ईयर डिजिटल कॉमर्स और सर्विस सेक्टर के बढ़ते प्रभाव को बेहतर ढंग से दर्शाएगा।
महंगाई दर का लक्ष्य: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का बेस ईयर भी 2024 कर दिया गया है। आरबीआई (RBI) गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, इसके आधार पर अप्रैल की मौद्रिक नीति में महंगाई दर के लक्ष्यों के संशोधित ढांचे की समीक्षा की जाएगी।
अमेरिकी टैरिफ नीति और वैश्विक व्यापार पर असर: मूडीज
जहां भारत का घरेलू बाजार मजबूत है, वहीं विदेशी मोर्चे पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने ट्रंप प्रशासन के 'कंट्री-स्पेसिफिक' (देश-विशिष्ट) टैरिफ ढांचे को खारिज कर दिया है। इसके जवाब में ट्रंप ने 150 दिनों के लिए सभी आयातों पर 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लगाया है और इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की योजना है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र को राहत
मूडीज के मुताबिक, इस 15% एकसमान टैरिफ से चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के उन देशों को फायदा हो सकता है, जो अब तक भारी टैरिफ का सामना कर रहे थे। हालांकि, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान पर इसका सीमित असर होगा क्योंकि उनके बेस टैरिफ पहले से ही 15% के करीब हैं।
भारत की व्यापारिक वार्ताओं पर अनिश्चितता: सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने भारत और इंडोनेशिया के साथ अमेरिका की व्यापारिक वार्ताओं पर अनिश्चितता के बादल ला दिए हैं। भारत ने वाशिंगटन भेजे जाने वाले अपने प्रतिनिधिमंडल का दौरा भी फिलहाल टाल दिया है।
अब आगे क्या?
आने वाले समय में वैश्विक व्यापार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। मूडीज ने चेतावनी दी है कि टैरिफ की दीवारें ऊंची होने की आशंका से अमेरिकी आयातक जल्दबाजी में अपने शिपमेंट मंगाने का प्रयास कर सकते हैं। इसके अलावा, कंपनियों द्वारा पहले चुकाए गए टैरिफ की वसूली की कोशिशें कानूनी विवादों को जन्म दे सकती हैं। हालांकि अमेरिका नए कानूनी रास्तों से टैरिफ बढ़ाने की कोशिश कर सकता है, लेकिन भारत की 8.1 प्रतिशत की अनुमानित तिमाही ग्रोथ यह आश्वस्त करती है कि मजबूत घरेलू खपत के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों को सहने में पूरी तरह सक्षम है।