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आरकॉम पर ईडी का शिकंजा: ₹40,185 करोड़ के मामले में क्या है नई शिकायत, अब किन आरोपों में फंसी कंपनी?
Sun, 09 Aug 2026 06:39 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 09 Aug 2026 06:39 PM IST
सार
प्रवर्तन निदेशालय ने ₹40,185.55 करोड़ के धनशोधन मामले में आरकॉम के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। जांच में रकम को घुमाने, पुराने कर्ज चुकाने और मंजूर उद्देश्य से अलग इस्तेमाल करने के आरोप सामने आए हैं। ईडी ने ₹8,078.06 करोड़ की पहले से कुर्क संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है। मामले में दो आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और जांच अभी जारी है।
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ED , ईडी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) के खिलाफ ₹40,185 करोड़ के धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। जांच एजेंसी ने शनिवार को धनशोधन निवारण कानून से जुड़े मामलों की विशेष अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की। यह शिकायत 27 मार्च को दाखिल की गई पहली अभियोजन शिकायत की आगे की कड़ी है। मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, गौतम भैलाल दोषी, सतीश सेठ, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य को आरोपी बनाया गया है। इन सभी पर धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 3 और धारा 70 के तहत अपराध का आरोप है।
ईडी की जांच में क्या सामने आया?
ईडी के अनुसार, इस मामले में अपराध से अर्जित रकम ₹40,185.55 करोड़ आंकी गई है। यह रकम कर्ज लेने वाली संस्थाओं पर बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बॉन्डधारकों की कुल बकाया राशि है। जांच में आरोपियों की भूमिका रकम जुटाने, उसके इस्तेमाल, उसे छिपाने और वैध दिखाने में सामने आने की बात कही गई है। ईडी के मुताबिक, एक अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड से मिली रकम के अंतिम इस्तेमाल को लेकर गलत प्रमाणन भी किया गया।
रकम के इस्तेमाल को लेकर क्या आरोप हैं?
कब से चल रहा था खेल, जांच में क्या दावा?
ईडी की आगे की जांच में सामने आया कि कथित वित्तीय गड़बड़ी की शुरुआत कम से कम 2007 में हो गई थी। एजेंसी के अनुसार, इसके बाद भी यह गतिविधि एक-दूसरे से जुड़ी और लगातार चलने वाली आपराधिक प्रक्रिया के रूप में जारी रही। जांच के मुताबिक, आरकॉम, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड ने कर्ज आधारित और गैर-कर्ज आधारित ऋण सुविधाएं कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल कीं। इन सुविधाओं से मिली रकम का इस्तेमाल मंजूर उद्देश्य के बजाय दूसरे कामों में किया गया।
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ईडी के अनुसार, कर्ज की रकम को रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड जैसी समूह कंपनियों में भेजा गया। जांच में यह भी आरोप है कि कुछ रकम का इस्तेमाल प्रवर्तकों के लिए भारत के बाहर निजी संपत्तियां खरीदने में किया गया। इसके अलावा आरकॉम के मुनाफे को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए भी रकम का इस्तेमाल किया गया।
यह भी पढ़ें: Mcap: देश की शीर्ष-10 कंपनियों में से चार का बाजार मूल्य बढ़ा; सूची में एसबीआई सबसे ऊपर, इन्हें लगा झटका
₹8,078.06 करोड़ की संपत्तियां कौन सी हैं, ईडी ने क्या मांग की?
प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत से ₹8,078.06 करोड़ की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है। ये संपत्तियां पहले ही कुर्क की जा चुकी हैं और निर्णायक प्राधिकरण ने उनकी कुर्की की पुष्टि भी कर दी है। इन संपत्तियों में नई दिल्ली, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे की पट्टे पर ली गई तथा अचल संपत्तियां शामिल हैं। मामले में गौतम भैलाल दोषी को 12 जून और सतीश सेठ को नौ जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। धनशोधन मामलों की विशेष अदालत ने 15 जून को इस मामले में दाखिल मुख्य अभियोजन शिकायत का संज्ञान लिया था।
किन शिकायतों पर कार्रवाई हुई?
ईडी ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की बैंकिंग प्रतिभूति और धोखाधड़ी शाखा, नई दिल्ली की ओर से दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी। ये प्राथमिकी बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं। इन मामलों में आरकॉम, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड की ओर से कर्ज और अन्य ऋण सुविधाएं कथित तौर पर धोखे से हासिल करने और रकम को दूसरी जगह लगाने के आरोपों की जांच की गई। ईडी ने कहा कि मामले में कई आपस में जुड़ी हुई लेनदेन की जांच की गई है। एजेंसी की आगे की जांच अभी जारी है।
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ईडी की जांच में क्या सामने आया?
ईडी के अनुसार, इस मामले में अपराध से अर्जित रकम ₹40,185.55 करोड़ आंकी गई है। यह रकम कर्ज लेने वाली संस्थाओं पर बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बॉन्डधारकों की कुल बकाया राशि है। जांच में आरोपियों की भूमिका रकम जुटाने, उसके इस्तेमाल, उसे छिपाने और वैध दिखाने में सामने आने की बात कही गई है। ईडी के मुताबिक, एक अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड से मिली रकम के अंतिम इस्तेमाल को लेकर गलत प्रमाणन भी किया गया।
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रकम के इस्तेमाल को लेकर क्या आरोप हैं?
- नई कर्ज सुविधाओं का इस्तेमाल पुराने घरेलू और विदेशी कर्ज चुकाने के लिए किया गया।
- रकम को बार-बार इधर-उधर घुमाकर पुराने कर्ज को बनाए रखने की कोशिश की गई।
- धन को समूह की कंपनियों, विशेष रूप से बनाई गई मध्यस्थ संस्थाओं और कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया।
- रकम का इस्तेमाल पुराने विदेशी वाणिज्यिक कर्ज और विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड की देनदारी चुकाने में किया गया।
- रकम को वैध कारोबारी खर्च और आय के रूप में दिखाया गया।
कब से चल रहा था खेल, जांच में क्या दावा?
ईडी की आगे की जांच में सामने आया कि कथित वित्तीय गड़बड़ी की शुरुआत कम से कम 2007 में हो गई थी। एजेंसी के अनुसार, इसके बाद भी यह गतिविधि एक-दूसरे से जुड़ी और लगातार चलने वाली आपराधिक प्रक्रिया के रूप में जारी रही। जांच के मुताबिक, आरकॉम, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड ने कर्ज आधारित और गैर-कर्ज आधारित ऋण सुविधाएं कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल कीं। इन सुविधाओं से मिली रकम का इस्तेमाल मंजूर उद्देश्य के बजाय दूसरे कामों में किया गया।
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ईडी के अनुसार, कर्ज की रकम को रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड जैसी समूह कंपनियों में भेजा गया। जांच में यह भी आरोप है कि कुछ रकम का इस्तेमाल प्रवर्तकों के लिए भारत के बाहर निजी संपत्तियां खरीदने में किया गया। इसके अलावा आरकॉम के मुनाफे को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए भी रकम का इस्तेमाल किया गया।
यह भी पढ़ें: Mcap: देश की शीर्ष-10 कंपनियों में से चार का बाजार मूल्य बढ़ा; सूची में एसबीआई सबसे ऊपर, इन्हें लगा झटका
₹8,078.06 करोड़ की संपत्तियां कौन सी हैं, ईडी ने क्या मांग की?
प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत से ₹8,078.06 करोड़ की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है। ये संपत्तियां पहले ही कुर्क की जा चुकी हैं और निर्णायक प्राधिकरण ने उनकी कुर्की की पुष्टि भी कर दी है। इन संपत्तियों में नई दिल्ली, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे की पट्टे पर ली गई तथा अचल संपत्तियां शामिल हैं। मामले में गौतम भैलाल दोषी को 12 जून और सतीश सेठ को नौ जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। धनशोधन मामलों की विशेष अदालत ने 15 जून को इस मामले में दाखिल मुख्य अभियोजन शिकायत का संज्ञान लिया था।
किन शिकायतों पर कार्रवाई हुई?
ईडी ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की बैंकिंग प्रतिभूति और धोखाधड़ी शाखा, नई दिल्ली की ओर से दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी। ये प्राथमिकी बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं। इन मामलों में आरकॉम, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड की ओर से कर्ज और अन्य ऋण सुविधाएं कथित तौर पर धोखे से हासिल करने और रकम को दूसरी जगह लगाने के आरोपों की जांच की गई। ईडी ने कहा कि मामले में कई आपस में जुड़ी हुई लेनदेन की जांच की गई है। एजेंसी की आगे की जांच अभी जारी है।