{"_id":"69621f7897601b903802c813","slug":"homebuyers-cheated-did-not-receive-flat-even-after-19-years-companies-collected-1075-crore-as-advance-booking-2026-01-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"ED: घर खरीदारों के साथ ठगी, 19 साल में नहीं मिला फ्लैट; बुकिंग के तौर पर 4771 ग्राहकों से वसूले 1075 करोड़","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
ED: घर खरीदारों के साथ ठगी, 19 साल में नहीं मिला फ्लैट; बुकिंग के तौर पर 4771 ग्राहकों से वसूले 1075 करोड़
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: लव गौर
Updated Sat, 10 Jan 2026 03:14 PM IST
विज्ञापन
सार
ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कंपनी की लगभग 585.46 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। यह पूरी कार्रवाई हाउसिंग कंपनी से जुड़ी है, जिसने अग्रिम बुकिंग के तौर पर 4771 ग्राहकों से 1075 करोड़ वसूले हैं।
ED
- फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन
विस्तार
हजारों लोगों ने यह सोच कर हाउसिंग कंपनियों में निवेश कर दिया कि उन्हें समय पर घर/फ्लैट मिल जाएगा। कंपनियों ने अग्रिम बुकिंग के तौर पर 4771 ग्राहकों से 1075 करोड़ रुपये वसूल लिए। ग्राहकों से कहा गया कि उन्हें तय समय पर मकान मिल जाएगा। उन्हें मालूम नहीं था कि फ्लैट मिलने में इतनी देरी हो जाएगी। घर खरीदारों के साथ धोखा किया गया। कई ग्राहकों को 12 से 19 साल की देरी के बाद भी फ्लैट नहीं मिल सका। ईडी ने इस केस में कार्रवाई करते हुए लगभग 585.46 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है।
इन संपत्तियों में हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, बहादुरगढ़ तथा उत्तर प्रदेश के मेरठ और गाजियाबाद में स्थित लगभग 340 एकड़ के विभिन्न भूखंड और जमीन के बड़े टुकड़े शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने 9 जनवरी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत यह अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया है। इसमें मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड (पूर्व में मेसर्स एरा लैंडमार्क्स लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी) और इसके प्रमोटर हेम सिंह भराना और सुमित भराना से जुड़े धन शोधन मामले में लगभग 585.46 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियां शामिल हैं। ईडी के मुताबिक, फिलहाल ये संपत्तियां मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड और इसकी संबद्ध/सहायक कंपनियों के स्वामित्व में हैं।
ईडी ने हरियाणा पुलिस, दिल्ली पुलिस और दिल्ली आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज की गई चौहत्तर (74) एफआईआर/आरोपपत्रों के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों के अनुसार, मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड, उसके प्रमोटरों और सहयोगी कंपनियों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर वादे के अनुसार फ्लैट और यूनिट उपलब्ध न कराकर कई घर खरीदारों को धोखा दिया गया। उनके साथ ठगी की गई। डेढ़ से दो दशक बाद भी फ्लैट नहीं मिल सका। ईडी की जांच में पता चला है कि मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड ने हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल में कई आवासीय समूह आवास परियोजनाएं शुरू की थीं। आठ परियोजनाओं - कॉस्मोकोर्ट, कॉस्मोसिटी-I, कॉस्मोसिटी-III, स्काईविले, रेडवुड रेजिडेंसी, एरा ग्रीन वर्ल्ड, एरा डिवाइन कोर्ट और एडीईएल डिवाइन कोर्ट - के लिए 4,771 ग्राहकों से लगभग 1,075 करोड़ रुपये अग्रिम बुकिंग राशि के रूप में एकत्र किए थे।
ये परियोजनाएं, जो 2006-2012 में शुरू की गई थीं, आज तक अधूरी हैं। जांच में यह भी पता चला कि प्रमोटरों/निदेशकों ने घर खरीदारों से एकत्र की गई बड़ी धनराशि को वादा किए गए आवास परियोजनाओं को पूरा करने के बजाय समूह की कंपनियों को भूमि पार्सल खरीदने और अन्य उद्देश्यों के लिए अग्रिम भुगतान के रूप में दे दिया। धनराशि का दुरुपयोग किया गया। इसके चलते अभी तक फ्लैट और प्लॉट वितरित नहीं किए गए हैं।
ये भी पढ़ें: रेलवे फर्जी भर्ती : मास्टरमाइंड के घर आठ घंटे तक ED ने खंगाले दस्तावेज, सात बजे दो गाड़ियों से पहुंची टीम
ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि सामान की डिलीवरी न होने पर मुआवज़ा मांगने वाले ग्राहकों को कंपनी द्वारा चेक जारी किए गए थे, जिनमें से कई चेक विभिन्न कारणों से बाधित हो गए। यह भी पता चला है कि मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड ने परियोजना योजनाओं और लाइसेंस प्राप्त भूमि क्षेत्रों में एकतरफा बदलाव किए, जिसमें मूल रूप से प्रस्तावित भूमि में कमी करना भी शामिल है। इस वजह से खरीदारों को शुरू में किए गए बुनियादी सुविधाओं के वादे पूरे नहीं किए गए। इसके अलावा, समूह के प्रमोटरों ने खरीदारों को सूचित किए बिना परियोजना की भूमि को बैंकों के पास गिरवी रखकर परियोजना विकास के लिए सावधि ऋण लिया था।
अन्य वीडियो
Trending Videos
इन संपत्तियों में हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, बहादुरगढ़ तथा उत्तर प्रदेश के मेरठ और गाजियाबाद में स्थित लगभग 340 एकड़ के विभिन्न भूखंड और जमीन के बड़े टुकड़े शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने 9 जनवरी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत यह अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया है। इसमें मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड (पूर्व में मेसर्स एरा लैंडमार्क्स लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी) और इसके प्रमोटर हेम सिंह भराना और सुमित भराना से जुड़े धन शोधन मामले में लगभग 585.46 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियां शामिल हैं। ईडी के मुताबिक, फिलहाल ये संपत्तियां मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड और इसकी संबद्ध/सहायक कंपनियों के स्वामित्व में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
ईडी ने हरियाणा पुलिस, दिल्ली पुलिस और दिल्ली आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज की गई चौहत्तर (74) एफआईआर/आरोपपत्रों के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों के अनुसार, मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड, उसके प्रमोटरों और सहयोगी कंपनियों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर वादे के अनुसार फ्लैट और यूनिट उपलब्ध न कराकर कई घर खरीदारों को धोखा दिया गया। उनके साथ ठगी की गई। डेढ़ से दो दशक बाद भी फ्लैट नहीं मिल सका। ईडी की जांच में पता चला है कि मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड ने हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल में कई आवासीय समूह आवास परियोजनाएं शुरू की थीं। आठ परियोजनाओं - कॉस्मोकोर्ट, कॉस्मोसिटी-I, कॉस्मोसिटी-III, स्काईविले, रेडवुड रेजिडेंसी, एरा ग्रीन वर्ल्ड, एरा डिवाइन कोर्ट और एडीईएल डिवाइन कोर्ट - के लिए 4,771 ग्राहकों से लगभग 1,075 करोड़ रुपये अग्रिम बुकिंग राशि के रूप में एकत्र किए थे।
ये परियोजनाएं, जो 2006-2012 में शुरू की गई थीं, आज तक अधूरी हैं। जांच में यह भी पता चला कि प्रमोटरों/निदेशकों ने घर खरीदारों से एकत्र की गई बड़ी धनराशि को वादा किए गए आवास परियोजनाओं को पूरा करने के बजाय समूह की कंपनियों को भूमि पार्सल खरीदने और अन्य उद्देश्यों के लिए अग्रिम भुगतान के रूप में दे दिया। धनराशि का दुरुपयोग किया गया। इसके चलते अभी तक फ्लैट और प्लॉट वितरित नहीं किए गए हैं।
ये भी पढ़ें: रेलवे फर्जी भर्ती : मास्टरमाइंड के घर आठ घंटे तक ED ने खंगाले दस्तावेज, सात बजे दो गाड़ियों से पहुंची टीम
ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि सामान की डिलीवरी न होने पर मुआवज़ा मांगने वाले ग्राहकों को कंपनी द्वारा चेक जारी किए गए थे, जिनमें से कई चेक विभिन्न कारणों से बाधित हो गए। यह भी पता चला है कि मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड ने परियोजना योजनाओं और लाइसेंस प्राप्त भूमि क्षेत्रों में एकतरफा बदलाव किए, जिसमें मूल रूप से प्रस्तावित भूमि में कमी करना भी शामिल है। इस वजह से खरीदारों को शुरू में किए गए बुनियादी सुविधाओं के वादे पूरे नहीं किए गए। इसके अलावा, समूह के प्रमोटरों ने खरीदारों को सूचित किए बिना परियोजना की भूमि को बैंकों के पास गिरवी रखकर परियोजना विकास के लिए सावधि ऋण लिया था।
अन्य वीडियो
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
विज्ञापन
विज्ञापन