SEBI: FY26 के पहले 9 महीनों में 311 IPO के जरिए कंपनियों ने जुटाए ₹1.7 लाख करोड़, जानिए क्या बोले सेबी प्रमुख
SEBI: सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में 311 IPOs से 1.7 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए। सेबी ने तकनीकी गड़बड़ियों के नियमों में बदलाव कर 60% छोटे ब्रोकर्स को राहत दी है।
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भारतीय पूंजी बाजार ने पिछले एक दशक में अभूतपूर्व विस्तार देखा है और निवेशकों का भरोसा नई ऊंचाई पर है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को बताया कि चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में ही 311 इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग्स (आईपीओ) के जरिए कंपनियों ने 1.7 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं।
चेन्नई में आयोजित 'एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंज मेंबर्स ऑफ इंडिया' (एएनएमआई) के 15वें इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट कन्वेंशन 2026 को संबोधित करते हुए, सेबी प्रमुख ने बाजार की मजबूती और नियामकीय सुधारों के बारे में बताया।
2020 से अब तक निवेशकों की संख्या कितनी बढ़ी?
बाजार की गहराई के बारे में बताते हुए सेबी अध्यक्ष ने कहा कि भारत में यूनिक इन्वेस्टर्स की संख्या में भारी उछाल आया है। वित्त वर्ष 2020 में यह संख्या 4.3 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 13.7 करोड़ हो गई है। पूंजी निर्माण की गति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चालू वित्त वर्ष में कुल इक्विटी मोबिलाइजेशन पहले ही 3.8 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के कैलेंडर वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, मेनबोर्ड आईपीओ ने सालाना आधार पर 8% की वृद्धि दर्ज करते हुए 1.72 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस गतिविधि में महाराष्ट्र, दिल्ली-एनसीआर और कर्नाटक वॉल्यूम और वैल्यू दोनों ही मामलों में सबसे आगे रहे।
छोटे स्टॉक ब्रोकर्स के लिए सेबी ने क्या कदम उठाए?
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के मकसद से, सेबी ने स्टॉक ब्रोकर्स के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सिस्टम में आने वाली तकनीकी गड़बड़ियों से निपटने के लिए ढांचे में बड़े बदलाव की घोषणा की है।
नए ढांचे की क्या है प्रमुख विशेषताएं-
- पात्रता में बदलाव: तकनीकी गड़बड़ियों से जुड़ा नया ढांचा अब केवल उन स्टॉक ब्रोकर्स पर लागू होगा जिनके पास 10,000 से अधिक पंजीकृत ग्राहक हैं।
- अनुपालन बोझ कम: सेबी के अनुसार, इस नए मानदंड के परिणामस्वरूप लगभग 60% स्टॉक ब्रोकर्स इस कड़े ढांचे से बाहर हो जाएंगे, जिससे उनकी अनुपालन आवश्यकताओं में भारी कमी आएगी।
- रिपोर्टिंग में ढील: तकनीकी गड़बड़ी की रिपोर्टिंग का समय एक घंटे से बढ़ाकर दो घंटे कर दिया गया है। साथ ही, अब अलग-अलग एक्सचेंजों को रिपोर्ट करने के बजाय 'सिंगल रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म' का उपयोग किया जाएगा।
स्मार्ट रेगुलेशन के लिए क्या कर रही सेबी?
तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि नियामक एक 'स्मार्ट रेगुलेटरी आर्किटेक्चर' का निर्माण कर रहा है जो अनुपालन को सुव्यवस्थित करता है और जिससे दोहराव की गुंजाइश खत्म होती है। हाल ही में अधिसूचित 'सेबी स्टॉकब्रोकर्स विनियम 2026' का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अब ब्रोकर्स को निर्धारित सुरक्षा उपायों के अधीन अन्य वित्तीय क्षेत्र के नियामकों द्वारा देखरेख की जाने वाली गतिविधियों में विविधता लाने की अनुमति दी गई है।
एनएसई के आईपीओ की लिस्टिंग पर क्या बोले सेबी प्रमुख?
भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड यानी सेबी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग को अपनी मंजूरी देने के बेहद करीब है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को संकेत दिया कि विनियामक एनएसई के आईपीओ के लिए एनओसी जारी करने के अंतिम चरण में है, जिससे एक्सचेंज की सर्वजनिक लिस्टिंग की उम्मीदें एक बार फिर जीवंत हो गई हैं।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हम एनएसई आईपीओ के लिए एनओसी जारी करने के बहुत उन्नत चरण में हैं। संभवतः इसी महीने के भीतर यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है।" हालांकि, सेबी प्रमुख ने किसी निश्चित समयसीमा की घोषणा करने से परहेज किया, लेकिन उनके बयान से यह साफ है पिछले कई वर्षों से लंबित इस प्रक्रिया में अब बड़ी बाधाएं दूर हो गई हैं।