Trade: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर लुटनिक के बयान पर जीटीआरआई क्यों बोला- बहाने बना रहे? जानें वजह
जीटीआरआई ने कहा है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी किसी नेता की फोन कॉल की वजह से नहीं, बल्कि टैरिफ, कृषि और डिजिटल व्यापार जैसे नीतिगत मतभेदों के कारण है। थिंक टैंक के मुताबिक, लुटनिक का बयान जटिल व्यापार वार्ताओं की वास्तविक वजहों से ध्यान भटकाता है।
विस्तार
भारत स्थित थिंक टैंक जीटीआरआई ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के बयान पर कड़ा सवाल उठाया है। जीटीआरआई ने कहा कि बड़े व्यापार समझौते नेताओं के बीच प्रतीकात्मक संवाद पर नहीं, बल्कि नीतिगत सहमति और हितधारकों के बीच तालमेल पर निर्भर करते हैं।
लुटनिक ने व्यापार समझौते को लेकर क्या किया दावा?
बता दें कि लुटनिक ने दावा किया था कि भारत-व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो सका क्योंकि प्रधानमंत्री पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को व्यक्तिगत रूप से फोन नहीं किया। उन्होंने अमेरिकी निवेशक के साथ एक पॉडकास्ट बातचीत में कहा था कि सौदे की संरचना तैयार थी, लेकिन अंतिम चरण में नेतृत्व- स्तर की सीधी बातचीत जरूरी थी।
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सौदा नहीं करने के फैसले के बावजूद चर्चा क्यों हुई?
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआआई) का कहना है कि ऐसे बयान व्यापार वार्ताओं की वास्तविक प्रक्रिया को सरल बनाकर पेश करते हैं। संस्था ने सवाल उठाया कि अगर जुलाई 2025 में ही अमेरिका ने 'कोई सौदा नहीं' का फैसला कर लिया था, तो इसके बाद दोनों देशों के बीच महीनों तक बाजार पहुंच, शुल्क और नियामकीय मुद्दों पर बातचीत क्यों चलती रही।
जीटीआरआई के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में लगातार हो रही देरी के बीच, अमेरिकी वाणिज्य सचिव की एक टिप्पणी ने ध्यान को वास्तविक मुद्दे से प्रतीकात्मकता की ओर मोड़ दिया है। संस्था ने कहा कि लुटनिक की व्याख्या से जटिल व्यापार वार्ताओं के वास्तव में विफल होने के तरीके के बारे में जवाब मिलने की तुलना में अधिक प्रश्न उठते हैं।
लुटनिक ने कहा था कि पीएम मोदी बाद में फोन करने के लिए सहमत हो गए थे, लेकिन तब तक "बहुत देर हो चुकी थी", क्योंकि अमेरिका पहले ही अन्य देशों के साथ व्यापार सौदों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर चुका था।
थिंक टैंक ने क्या याद दिलाया?
थिंक टैंक ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका ने जुलाई 2025 के आसपास इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस के साथ व्यापार समझौते पूरे कर लिए थे, जबकि भारत-अमेरिका वार्ता उसके बाद भी जारी रही। इससे यह संकेत मिलता है कि फोन कॉल को कारण बताना तात्कालिक वजह से अधिक बाद में गढ़ा गया तर्क है।
जीटीआरआई के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार गतिरोध की जड़ें टैरिफ, कृषि, डिजिटल व्यापार और नियामकीय स्वायत्तता जैसे कठिन नीतिगत मतभेदों में हैं, न कि किसी नेता की कॉल में। संस्था ने कहा कि व्यक्तिगत कूटनीति पर जोर देने से वास्तविक संरचनात्मक चुनौतियां ओझल हो जाती हैं।
देरी को व्यक्तिगत कूटनीति बताना गलत
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करने वाले देशों पर सख्त शुल्क लगाए हैं। अगस्त 2025 से भारत से अमेरिका जाने वाले कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लागू हैं, जिससे द्विपक्षीय व्यापार संबंधों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
जीटीआरआई की रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि "इस देरी को व्यक्तिगत कूटनीति का मामला बताना एक सुविधाजनक कहानी पेश कर सकता है, लेकिन यह उन महत्वपूर्ण मतभेदों को छिपा देता है जिन्हें दोनों पक्षों को अभी हल करना बाकी है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंधों में से एक को तुच्छ समझने का जोखिम पैदा करता है।"