India-AI Summit: एआई-मीडिया पर तन्मय माहेश्वरी बोले- हम तकनीक को रिप्लेसमेंट की तरह नहीं, टूल की तरह देखते हैं
इंडिया-एआई समिट 2026 के वैश्विक मंच पर आज दुनियाभर के दिग्गज जमा हुए। अलग-अलग विषयों पर मंथन के दौरान मीडिया में एआई की भूमिका पर भी चर्चा हुई। उजाला समूह के एमडी तन्मय माहेश्वरी ने कहा कि हम एआई को रिप्लेसमेंट की तरह नहीं टूल की तरह देखते हैं।
विस्तार
राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया-एआई समिट 2026 में आज एआई एंड मीडिया: अपॉर्च्युनिटीज, रिस्पॉन्सिबल पाथवेज एंड द रोड अहेड विषय पर एक महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में अमर उजाला समूह के एमडी तन्मय माहेश्वरी, इंडिया टुडे ग्रुप से कली पुरी, दैनिक भास्कर ग्रुप के पवन अग्रवाल, बेनेट कॉलमैन ग्रुप (टाइम्स ऑफ इंडिया) की तरफ से मोहित जैन, द हिंदू के नवनीत एलवी, आईएनएमए के रॉबर्ट व्हाइटहेड और ईवाई समूह के आशीष फेरवानी शामिल हुए। सभी मीडिया दिग्गजों ने मीडिया के बदलते स्वरूप के बीच एआई की भूमिका पर अपने विचार रखे।
एआई को रिप्लेसमेंट की तरह नहीं टूल की तरह देखें
अमर उजाला समूह के एमडी तन्मय माहेश्वरी ने कहा कि एआई हमारे लिए दूसरी तकनीक के जैसा ही है, हर तकनीक के अच्छे और बुरे, दोनों पहलू होते हैं। परमाणु इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो तबाही भी मचा सकता है और स्वच्छ ऊर्जा के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। एआई के साथ भी ऐसा ही है। आपको इसे ह्यूमन लेयर से जोड़ना ही होगा।
हमारी संस्थान में एआई का इस्तेमाल कंटेट को बेहतर करने के लिए किया जाता है। कैसे किसी आर्टिकल पर गहन रिसर्च की जाएं, कैसे किसी खबर की गुणवत्ता को और बढ़ाया जाए? इसलिए हम एआई को रिप्लेसमेंट की तरह नहीं टूल की तरह देखते हैं। हम इसका इस्तेमाल अपने कंटेंट की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए करते हैं।
एआई किसी को नहीं करेगा रिप्लेस- माहेश्वरी
उन्होंने आगे कहा कि अंत में हमारा मकसद अपने यूजर्स को बेहतर कंटेट देना होता है। हम ऐसा कभी नहीं सोचते कि एआई किसी को रिप्लेस करेगा। पूरे एआई इंजन में कंटेट लेयर सबसे महत्वपूर्ण लेयर है , उसके बाद डेटा लेयर, प्रोसेसिंग लेयर, एप्लिकेशन लेयर, पावर एनर्जी लेयर। एक जिम्मेदार संस्थान होने के नाते हमें पता है कि इस लेयर का उपयोग कंटेंट प्रोडक्शन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और स्वचालित बनाने के लिए किया जाएगा। इसके माध्यम से गहराई वाले कंटेंट को ऑटोमेशन किया जा सकता है, साथ ही कई स्वायत्त कार्यों को भी आसानी से संभाला जा सकेगा। इससे समय की बचत होगी और उस समय का उपयोग अधिक बेहतर, शोध-आधारित और गुणवत्तापूर्ण सामग्री तैयार करने में किया जा सकेगा।
माहेश्वरी से पूछा गया कि क्या जब मॉडल का उपयोग भारतीय भाषाओं में किया जाता है, तब भी संदर्भ सही तरीके से काम करता है? उन्होंने जवाब दिया नहीं, भाषा के मॉडल में सटीकता 50 से 55% रहती है। उन्होंने ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन की एक बात को याद किया कि AI दुनिया का अंत कर देगा, लेकिन तब तक हम कई बड़ी कंपनियां बना सकते हैं। यह हमारे लिए एक डार्क ह्यूमर की तरह हो सकता है। लेकिन जब भी हम कुछ इनोवेट करते हैं, कल के लिए, आने वाली पीढ़ी के लिए , हम केवल सहभागी हैं, हमें ये दुनिया मिली और अब हम इसे दूसरी पीढ़ी को देकर चले जाएंगे।
एआई के इस्तेमाल के बीच विश्वसनीयता को बनाए रखना जरूरी
इंडिया टुडे ग्रुप की उपाध्यक्ष कली पुरी ने कहा कि डिजिटल मीडिया ब्रांड राय बनाते हैं। इसलिए एआई हमारे लिए बहुत जरूरी । यह जरूरी है कि एआई के इस्तेमाल से कैसे विश्वसनीयता बनाए रखें। एआई सैंडविच के मॉडल पर हम कर रहे हैं कि जिसमें आखिरी पड़ाव की पुष्टि एक इंसान ही कर रहा है।