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Aviation: देश में 2030 तक 60 नए एयरपोर्ट का बड़ा प्लान, लेकिन इस रिपोर्ट में सामने आई ये बड़ी चुनौती
Mon, 06 Jul 2026 05:56 PM IST
निर्मल कांत
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 06 Jul 2026 05:56 PM IST
सार
केंद्र सरकार की नीतियां भी विमानन क्षेत्र की तेज वृद्धि को समर्थन देंगी। करीब 28,840 करोड़ रुपये की उड़ान योजना, वर्ष 2014 के बाद 25 ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को मिली मंजूरी, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकास में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और डिजी यात्रा व गगन जैसी डिजिटल पहल आने वाले वर्षों में विमानन क्षेत्र के विस्तार को गति देंगी।
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विमानन क्षेत्र के विस्तार में कितनी चुनौतियां?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/आई-स्टॉक
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विस्तार
भारत का विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में देश में बड़े पैमाने पर नए हवाई अड्डों का निर्माण होने की उम्मीद है। हालांकि, इस विस्तार के लिए जरूरी निवेश जुटाना और नए एयरपोर्ट्स को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। भारतीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ब्रिकवर्क रेटिंग्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक 50 से 60 करोड़ यात्रियों की क्षमता विकसित करने और 55-60 नए हवाई अड्डों के निर्माण के लिए करीब 3 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। 30 नए हवाई अड्डों के जरिये 12 करोड़ अतिरिक्त यात्रियों की क्षमता विकसित करने के लिए करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती हवाई यात्रा की मांग को पूरा करने के लिए आने वाले वर्षों में विमानन क्षेत्र में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।
एयरपोर्ट का मुनाफा हो सकता है कम
एविएशन सेक्टर में भारी निवेश के बावजूद ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 तक विमानन क्षेत्र की क्रेडिट रेटिंग आउटलुक को स्थिर बताया है। हवाई यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या, नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं की तेज रफ्तार और प्रमुख एयरपोर्ट ऑपरेटरों पर घटते कर्ज के कारण क्षेत्र की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रहेगी। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि, भारी निवेश और लंबी निर्माण अवधि के कारण वित्त वर्ष 2021 से 2027 के बीच एयरपोर्ट ऑपरेटरों का शुद्ध मुनाफा कम हो सकती है। पश्चिम एशिया की संकट के चलते एविएशन टर्बाइन ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव, भूमि अधिग्रहण में देरी, विभिन्न एजेंसियों से मंजूरी मिलने में लगने वाला समय और मेट्रो शहरों के हवाई अड्डों पर क्षमता की कमी आने वाले वर्षों में विमानन क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियां बनी रहेंगी। हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया कि, सरकार की नीतियां विमानन क्षेत्र की तेज वृद्धि को समर्थन देंगी। करीब 28,840 करोड़ रुपये की उड़ान योजना, वर्ष 2014 के बाद 25 ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को मिली मंजूरी, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकास में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और डिजी यात्रा व गगन जैसी डिजिटल पहलें आने वाले वर्षों में विमानन क्षेत्र के विस्तार को गति देंगी।
2036 में 48 करोड़ हो सकती है हवाई यात्रियों की संख्या
पिछले एक दशक में भारत का विमानन क्षेत्र तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2014 में देश में 74 परिचालन हवाई अड्डे थे, जो अब बढ़कर 163 हो गए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से जनवरी के दौरान देश के हवाई अड्डों से करीब 35.05 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की। इनमें 28.18 करोड़ घरेलू और 6.87 करोड़ अंतरराष्ट्रीय यात्री शामिल रहे है।
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ये भी पढ़ें: सरकारी बैंकों के दम पर सुधरेगा सीडी रेशियो, FY27 में 14% रहेगी क्रेडिट ग्रोथ; जानिए रिपोर्ट में क्या
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हवाई यात्री बाजार बन जाएगा। वहीं, वर्ष 2036 तक देश में हवाई यात्रियों की संख्या बढ़कर करीब 48 करोड़ पहुंचने का अनुमान है।
देश में हवाई अड्डों के विकास पर बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 तक करीब 3.7 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 205 एयरपोर्ट परियोजनाएं विभिन्न चरणों में हैं। इनमें 2.5 लाख करोड़ रुपये की 131 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। जबकि पिछले पांच वर्षों में 75 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली 84 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 85 हजार करोड़ रुपये की 66 नई परियोजनाओं की घोषणा की गई है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2027 से 2029 के बीच करीब 47 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी होने की उम्मीद है। नवी मुंबई, पुणे, जेवर, श्रीपेरंबदूर और भिवाड़ी में नए हवाई अड्डों का निर्माण किया जा रहा है। वहीं, बेंगलुरु, दिल्ली और हैदराबाद एयरपोर्ट के विस्तार का काम भी तेजी से चल रहा है।
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एयरपोर्ट का मुनाफा हो सकता है कम
एविएशन सेक्टर में भारी निवेश के बावजूद ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 तक विमानन क्षेत्र की क्रेडिट रेटिंग आउटलुक को स्थिर बताया है। हवाई यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या, नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं की तेज रफ्तार और प्रमुख एयरपोर्ट ऑपरेटरों पर घटते कर्ज के कारण क्षेत्र की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रहेगी। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि, भारी निवेश और लंबी निर्माण अवधि के कारण वित्त वर्ष 2021 से 2027 के बीच एयरपोर्ट ऑपरेटरों का शुद्ध मुनाफा कम हो सकती है। पश्चिम एशिया की संकट के चलते एविएशन टर्बाइन ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव, भूमि अधिग्रहण में देरी, विभिन्न एजेंसियों से मंजूरी मिलने में लगने वाला समय और मेट्रो शहरों के हवाई अड्डों पर क्षमता की कमी आने वाले वर्षों में विमानन क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियां बनी रहेंगी। हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया कि, सरकार की नीतियां विमानन क्षेत्र की तेज वृद्धि को समर्थन देंगी। करीब 28,840 करोड़ रुपये की उड़ान योजना, वर्ष 2014 के बाद 25 ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को मिली मंजूरी, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकास में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और डिजी यात्रा व गगन जैसी डिजिटल पहलें आने वाले वर्षों में विमानन क्षेत्र के विस्तार को गति देंगी।
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2036 में 48 करोड़ हो सकती है हवाई यात्रियों की संख्या
पिछले एक दशक में भारत का विमानन क्षेत्र तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2014 में देश में 74 परिचालन हवाई अड्डे थे, जो अब बढ़कर 163 हो गए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से जनवरी के दौरान देश के हवाई अड्डों से करीब 35.05 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की। इनमें 28.18 करोड़ घरेलू और 6.87 करोड़ अंतरराष्ट्रीय यात्री शामिल रहे है।
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इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हवाई यात्री बाजार बन जाएगा। वहीं, वर्ष 2036 तक देश में हवाई यात्रियों की संख्या बढ़कर करीब 48 करोड़ पहुंचने का अनुमान है।
देश में हवाई अड्डों के विकास पर बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 तक करीब 3.7 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 205 एयरपोर्ट परियोजनाएं विभिन्न चरणों में हैं। इनमें 2.5 लाख करोड़ रुपये की 131 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। जबकि पिछले पांच वर्षों में 75 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली 84 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 85 हजार करोड़ रुपये की 66 नई परियोजनाओं की घोषणा की गई है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2027 से 2029 के बीच करीब 47 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी होने की उम्मीद है। नवी मुंबई, पुणे, जेवर, श्रीपेरंबदूर और भिवाड़ी में नए हवाई अड्डों का निर्माण किया जा रहा है। वहीं, बेंगलुरु, दिल्ली और हैदराबाद एयरपोर्ट के विस्तार का काम भी तेजी से चल रहा है।