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Adani Row: अदाणी मामले में साल्वे बोले- ये बदनाव करने की साजिश थी, DoJ की ओर से मामला वापस लेने पर कही यह बात

Mon, 06 Jul 2026 02:34 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 06 Jul 2026 02:34 PM IST
सार

अमेरिकी न्याय विभाग यानी डीओजे ने गौतम अदाणी के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों को वापस लेने का बचाव किया है। विभाग ने सबूतों की कमजोरी और अधिकार क्षेत्र के उल्लंघन का हवाला देते हुए अदाणी के खिलाफ मामला वापस लेने की बात कही है। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने इस पूरे प्रकरण को बदनाम करने की साजिश बताया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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US DoJ Defends Dropping Adani Case, Salve Calls it 'Name and Shame'
अदाणी समूह के प्रोजेक्ट का श्रीलंका में विरोध - फोटो : एएनआई

विस्तार

अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अदाणी के खिलाफ कथित आपराधिक रिश्वतखोरी मामले में आरोपों को वापस लेने के अपने निर्णय का दृढ़ता से बचाव किया है। विभाग ने सबूतों की कमजोरी, अधिकार क्षेत्र के उल्लंघन और न्यायिक शक्ति की सांविधानिक सीमाओं का हवाला दिया है।। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उनके अनुसार अदाणी और अन्य लोगों के खिलाफ जो केस दर्ज किया गया है, उसका मकसद कोर्ट में कानूनी रूप से मुकदमा लड़ना या न्याय पाना नहीं था। बल्कि, यह केस सिर्फ इसलिए किया गया था ताकि:

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  • छवि खराब की जा सके: बिना किसी ठोस सबूत या अदालती कार्यवाही के उन पर आरोप मढ़कर उनकी साख को नुकसान पहुंचाया जा सके।
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  • सार्वजनिक अपमान हो: उनका नाम मीडिया और जनता के बीच उछालकर उन्हें केवल शर्मिंदा किया जा सके।

साल्वे ने कहा कि इसका उद्देश्य बिना किसी मुकदमे की संभावना के आरोप लगाना था। उन्होंने मूल आरोप को एक मानक कानूनी कार्यवाही के बजाय व्यापक राजनीतिक एजेंडा का हिस्सा बताया। साल्वे के अनुसार, बाइडन प्रशासन लगातार भारत विरोधी बातें कर रहा था और भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी न्याय विभाग ने अपने जवाब में कहा कि अभियोजकों को अपने तर्क का विस्तार से वर्णन करने के लिए मजबूर करना सांविधानिक अधिकार को कमजोर कर सकता है। 

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अभियोजकों ने बताया कि कथित मामला भारत में हुआ था, इसलिए अमेरिकी अभियोजकों के लिए इसमें शामिल होना उचित नहीं था। न्याय विभाग ने अपने जवाब में यह भी तर्क दिया कि सबूतों की समस्याओं के कारण मामला कमजोर था। विभाग ने कहा कि अधिकांश कथित सबूत भारत में आधारित थे, जिससे अमेरिकी अभियोजन मुश्किल हो गया। कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि न्याय विभाग के इस दृढ़ रुख से पीठासीन न्यायाधीश के पास मामले को जीवित रखने के लिए बहुत कम गुंजाइश बची है।

क्या न्यायाधीश जल्द ही मामला बंद कर देंगे?

साल्वे ने कहा कि न्यायाधीश को जल्द ही मामला बंद करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि न्यायाधीश ऐसा नहीं करते हैं, तो यह एक बड़ा मुद्दा बन जाएगा। संविधान अभियोजन शक्ति कार्यपालिका में निहित करता है, न्यायपालिका में नहीं। न्याय विभाग न्यायाधीश से कह रहा है कि मुकदमा चलाना है या नहीं, यह उनका निर्णय है।

न्याय विभाग का लहजा कितना मजबूत था?

वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी कहा कि अदालत को दिए गए जवाब में अमेरिकी न्याय विभाग का लहजा उल्लेखनीय रूप से दृढ़ था। यह अमेरिकी कानूनी संचार की सीधी प्रकृति को ध्यान में रखते हुए भी कठोर था। साल्वे ने कहा कि न्याय विभाग ने यह भी कहा कि वे संतुष्ट नहीं थे। उनके अनुसार, उन्हें यह मामला कभी लाना ही नहीं चाहिए था। मई 2026 में न्याय विभाग ने इन आरोपों को खारिज करने का प्रस्ताव रखा था।

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