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ओपेक प्लस का फैसला: अगस्त से रोजाना 1.88 लाख बैरल और जुड़ेगा, होर्मुज खुलने के बाद अभी कितना तेल का उत्पादन?
Sun, 05 Jul 2026 09:55 PM IST
Pavan
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Sun, 05 Jul 2026 09:55 PM IST
सार
ओपेक प्लस ने अगस्त 2026 से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है, जब ईरान-इस्राइल संघर्ष के बाद तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर के करीब लौट आई हैं और वैश्विक बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति की आशंका बढ़ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुलने से तेल निर्यात सामान्य हो रहा है, जबकि सऊदी अरब समेत खाड़ी देश तेजी से उत्पादन बढ़ा रहे हैं।
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ओपेक प्लस अगस्त से बढ़ाएगा तेल उत्पादन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस ने अगस्त 2026 से उत्पादन में प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल की वृद्धि करने का फैसला किया है। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है, जब होर्मुज से तेल निर्यात धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है और वैश्विक बाजार में कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर के करीब लौट आई हैं।
यह भी पढ़ें- होर्मुज से भारत के लिए अच्छी खबर: उर्वरक से लदे 15 जहाज सुरक्षित निकले, भारत ने कैसे संभाली सप्लाई चेन?
समूह का उत्पादन फरवरी में 4.28 करोड़ बैरल प्रतिदिन से घटकर मई में 3.31 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गया था। जून में निर्यात में सुधार के कारण उत्पादन बढ़ना शुरू हुआ, लेकिन यह अभी युद्ध-पूर्व स्तर से नीचे है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) अप्रैल के अंत में समूह से अलग हो चुका है।
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ओपेक और सहयोगी देशों के सात प्रमुख उत्पादक अप्रैल से जुलाई के बीच अपने उत्पादन कोटे में करीब 8 लाख बैरल रोजाना की वृद्धि कर चुके हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान तेल निर्यात प्रभावित हुआ, इसलिए बढ़ोतरी का असर बाजार में नहीं दिखा। 21 सदस्य देशों में से सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कजाकिस्तान और ओमान 2023 में तय की गई 16.5 लाख बैरल प्रतिदिन की उत्पादन कटौती को चरणबद्ध तरीके से वापस ले रहे हैं।
यह भी पढ़ें- MCap: देश की 10 प्रमुख कंपनियों में से छह के मार्केट कैप में ₹1 लाख करोड़ बढ़े, एयरटेल और बजाज फाइनेंस अव्वल
आपूर्ति व्यवधान के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर पर लौट आई हैं। इसकी प्रमुख वजह चीन की कमजोर आयात मांग, मध्य पूर्व के बाहर के देशों से बढ़ती आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा रणनीतिक तेल भंडार की रिकॉर्ड रिलीज है। पिछले हफ्ते शुक्रवार के बंद भाव के अनुसार, ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। वहीं, विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती आपूर्ति के कारण बाजार में ओवरसप्लाई की स्थिति बन सकती है, जिससे तेल कीमतों पर दबाव रहेगा। वहीं, यूएई के ओपेक छोड़ने से संगठन की एकजुटता पर भी सवाल उठ रहे
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ओपेक और सहयोगी देशों के सात प्रमुख उत्पादक अप्रैल से जुलाई के बीच अपने उत्पादन कोटे में करीब 8 लाख बैरल रोजाना की वृद्धि कर चुके हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान तेल निर्यात प्रभावित हुआ, इसलिए बढ़ोतरी का असर बाजार में नहीं दिखा। 21 सदस्य देशों में से सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कजाकिस्तान और ओमान 2023 में तय की गई 16.5 लाख बैरल प्रतिदिन की उत्पादन कटौती को चरणबद्ध तरीके से वापस ले रहे हैं।
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आपूर्ति व्यवधान के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर पर लौट आई हैं। इसकी प्रमुख वजह चीन की कमजोर आयात मांग, मध्य पूर्व के बाहर के देशों से बढ़ती आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा रणनीतिक तेल भंडार की रिकॉर्ड रिलीज है। पिछले हफ्ते शुक्रवार के बंद भाव के अनुसार, ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। वहीं, विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती आपूर्ति के कारण बाजार में ओवरसप्लाई की स्थिति बन सकती है, जिससे तेल कीमतों पर दबाव रहेगा। वहीं, यूएई के ओपेक छोड़ने से संगठन की एकजुटता पर भी सवाल उठ रहे